MP पप्‍पू यादव ने उठाये सवाल, बोले-बाढ़ पीड़ितों के बीच क्यों नहीं जाते जनप्रतिनिधि…

पटना: जन अधिकार पार्टी (लो.) के संरक्षक व मधेपुरा के सांसद पप्पू यादव ने बिहार में आई बाढ़ पर बड़ी बहस छेड़ी है और जनप्रतिनिधियों से पूछा है कि नेता बाढ़ से परेशान लोगों के बीच क्यों नहीं जा रहे हैं? क्यों नहीं पीड़ितों का दु:ख दर्द बांट रहे हैं? जनता से उनकी इस बेरूखी की वजह क्या है? सांसद पप्‍पू यादव इन‍ दिनों पूरी तरह से बाढ़ से प्रभावित कोसी, सीमांचल और मिथिलांचल के इलाकों में कैंप करने में समय दे रहे हैं. इस दौरान उन्‍होंने संकट की घड़ी में चुनाव में करोड़ों रूपये खर्च करने वाले जनप्रतिनिधियों पर सवाल खड़ी कर बड़ी बहस छेड़ी है.

पप्पू यादव ने इस बाबत कहा कि वे पिछले कई दिनों से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में हैं. पानी में घुसकर लोगों से मिल रहे हैं. उनकी पीड़ा बांट रहे हैं, उनकी जरूरतों की जानकारी ले रहे हैं और उन्हें मदद पहुंचा रहे हैं. वहीं दूसरे सभी नेता चैन की नींद सो रहे हैं. दूसरे नेता क्‍यों नहीं आ रहे हैं बाढ़ पीड़ितों के बीच? उन्होंने बताया कि बाढ़ से करीब दो करोड़ की आबादी प्रभावित है. मृतकों की संख्‍या गिनती नहीं की जा सकती है. इतने लोगों की इस विभीषिका में मौत हो चुकी है. ऐसी हालात देखकर रोना आता है. लोग भूखे-प्‍यासे हैं. बीमार हैं. पीने का पानी नहीं है. शौच की जगह नहीं है. सरकार की राहत सामग्री सभी लोगों के पास ठीक से अब भी नहीं पहुंच पाई है.

उन्‍होंने कहा कि इस भीषण त्रासदी के समय हम आपसे कुछ सवालों के साथ मुखातिब होना चाहते हैं. जवाब आपको ही तलाशने हैं. क्‍या यह सही नहीं हैं कि मुखिया का चुनाव लड़ने में लोग 25-25 लाख रुपये तक खर्च कर देते हैं? क्‍या यह सही नहीं है कि वार्ड समिति/पंचायत समिति का सदस्‍य बनने को लोग 10 लाख रुपये तक का खर्च किया जाता है? क्‍या यह सही नहीं है कि जिला परिषद और नगर निकाय का प्रधान बनने को 1 करोड़ से 3 करोड़ रुपये तक खर्च किये जाते हैं ? क्‍या यह सही नहीं है कि बिहार विधान सभा का चुनाव लड़ने को प्रत्‍येक चुनाव में 1 करोड़ से 5 रुपये तक खर्च किये जाते हैं, चाहे कागज पर जितना कम खर्च क्‍यों न दिखाया जाता हो? क्‍या यह सही नहीं है कि लोक सभा का चुनाव लड़ने को 5 करोड़ से 10 करोड़ रुपये तक खर्च किये जाते हैं?
सांसद ने कहा कि यदि आप हमारी बातों से सहमत हैं, तो जवाब दें कि लाखों-करोड़ों खर्च करने वाले ये लोग अभी बाढ़ में फंसे और भूख से बिलबिलाते अपने पंचायत और क्षेत्र के लोगों के लिए क्‍या चावल-दाल की व्‍यवस्‍था भी नहीं कर सकते हैं? हम कहते हैं कि कर सकते हैं. हम भी करने की कोशिश कर रहे हैं. हम इस बहस को बस इसलिए छेड़ रहे हैं, ताकि कुछ और लोग बाढ़ पीडि़तों की मदद को आगे आएं. मकसद सिर्फ उनके लिए मदद जुटाना है. आप जिनसे वोट मांगने जाते हैं, उनकी मदद में वे आगे आएं. कुछ तो उनकी परेशानी कम होगी. पप्पू यादव के ये सवाल तीखे हैं लेकिन कटु सत्य भी.

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