‘प्रधान स्वास्थ्य सचिव ब्यौरा दें या कोर्ट में हाजिर हों’

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पटना (एहतेशाम) : सूबे के सभी मेडिकल कॉलेजों एवं अस्पतालों में सिटी स्कैन व एमआरआई मशीनें कब तक लगायी जाएंगी या फिर इस संबंध में क्या कार्रवाई की जा रही है, इसका पूरा ब्यौरा एक मई तक अदालत में प्रस्तुत करें. स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव के ऐसा नहीं करने पर उन्हें अदालत में हाजिर होकर इसका जवाब देना होगा. मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन एवं न्यायाधीश सुधीर सिंह के खंडपीठ ने नागरिक अधिकार मंच की ओर से दायर लोकहित याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करते हुए उक्त निर्देश दिया.

याचिकाकर्ता की ओर से हाईकोर्ट को बताया गया कि सूबे के सभी मेडिकल कॉलेजों व अस्पतालों में सिटी स्कैन व एमआरआई मशीनों को लगाने का आदेश पटना हाईकोर्ट द्वारा पूर्व में ही दिया जा चुका है. बावजूद इसके अभी तक अदालती आदेश का अनुपालन नहीं किया गया है. इस कारण सूबे के गरीब लाचार व बेसहारा मरीजों की जांच नहीं हो पा रही है. इससे उनका इलाज सही तरीके से नहीं हो पा रहा है.

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हॉस्टलों पर अवैध कब्जा मामले में भी मांगी रिपोर्ट
उधर एक अन्य मामले में हाईकोर्ट ने मंगलवार को ही पटना विवि के हॉस्टलों में अवैध कब्जा मामले की सुनवाई की. हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार ने राजधानी स्थित पटना विश्वविद्यालय अंतर्गत सैदपुर व अन्य हॉस्टलों में अवैध तरीके से कब्जा को मुक्त करने के लिए अब तक क्या कार्रवाई की है, इसकी पूरी रिपोर्ट अगली सुनवाई में प्रस्तुत करें. मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन एवं न्यायाधीश सुधीर सिंह के खंडपीठ ने विकासचन्द्र उर्फ गुड्डू बाबा की ओर से दायर लोकहित याचिका पर सुनवाई करते हुए उक्त निर्देश दिया. मामले की अगली सुनवाई ग्रीष्मकालीन छुट्टी के बाद होगी. गौरतलब है कि पूर्व की सुनवाई में याचिकाकर्ता द्वारा अदालत को बताया गया था कि पटना विश्वविद्यालय अन्तर्गत सैदपुर सहित अन्य हॉस्टलों पर अवैध तरीके से कब्जा किया गया है, जिस कारण बाहर से यहां आकर पढनेवाले छात्रों को हॉस्टल में कमरा नहीं मिल पाता है. अदालत को यह भी बताया गया कि इन हॉस्टलों पर कब्जे का आलम यह है कि वर्षों पूर्व पढाई कर चुके और आवंटन समाप्त होने के बावजूद दबंग छात्रों का कब्जा अब भी बरकरार है.

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