जगदीशपुर-हल्दिया गैस पाइपलाइन परियोजना का विरोध

पटना : केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जगदीशपुर हल्दिया गैस पाइपलाइन परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण का मुद्दा किसानों की नाराजगी का सबब बन गया है. 2500 किलोमीटर वाली जगदीशपुर हल्दिया गैस पाइपलाइन परियोजना 12000 करोड़ की लागत से पूरी होगी तथा बिहार में इस परियोजना का पहला चरण पूरा होना है. पहले चरण में इलाहाबाद के फूलपुर से गया के डोभी तक और उसके बाद बरौनी और पटना को पाइप लाइन परियोजना से जोड़ा जाना है. इस परियोजना से बिहार के बरौनी रिफाइनरी के साथ-साथ बरौनी के बंद पड़े खाद उर्वरक कारखाने को भी लाभ पहुंचने की बात बताई जा रही थी लेकिन अधिग्रहण के सवाल पर उठे विवाद के कारण परियोजना के विलंबित होने की भी संभावनाएं बढ़ गई है. किसान किसी सूरत में झुकने को तैयार नहीं दिख रहे हैं. मरांची के किसान नेता अरविंद सिंह कहते हैं 1962 में पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा बनाए गए अधिग्रहण कानून को विधि मंत्रालय ने जारी किया था जिसमें स्पष्ट है कि आबादी वाले हिस्से रिहाइशी इलाके तथा मकानों के आसपास से पाइप लाइन नहीं ले जाया जा सकता है.

जदयू नेता पवन कुमार ने बताया कि 2013 में यूपीए सरकार द्वारा बनाए गए भूमि अधिग्रहण संशोधन कानून में किसानों की 70 फ़ीसदी सहमति को अनिवार्य बताया गया था तथा सिंचित भूमि का अधिग्रहण नहीं करने की बात कही गई थी. किसानों का दावा है कि 2013 के भूमि अधिग्रहण संशोधन कानून की भी अवहेलना की जा रही है क्योंकि उसमें 70 फीसदी किसानों की सहमति अनिवार्य बताई गई है लेकिन मरांची से गैस पाइपलाइन परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण में एक किसान भी सहमत नहीं है. विवादों में फंसे जगदीशपुर हल्दिया गैस पाइपलाइन परियोजना के लिए मोकामा के मरांची में जमीन अधिग्रहण के सवाल पर गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड के अधिकारी और मरांची के किसान आमने सामने हैं. दरअसल 12000 करोड़ रुपए लागत वाली जगदीशपुर हल्दिया गैस पाइपलाइन परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण कर रहे गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड के अधिकारी पाइपलाइन को मरांची गांव के बीच से ले जाना चाहते हैं. जिसके लिए किसान सहमत नहीं है.mokama-pic-maranchi-me-sdm-2

किसानों का दावा है कि मरांची गांव के बीच से होकर पाइपलाइन ले जाना खतरे से खाली नहीं है और इससे पूरा गांव उजड़ जाएगा. किसानों का आरोप है कि 2015 के अक्टूबर महीने में प्रकाशित गजट में पाइपलाइन का रूट मरांची गांव से बाहर था लेकिन 2016 के अक्टूबर में दुबारा गजट प्रकाशित कर पूर्व के अलाइनमेंट को बदल दिया गया और नए अलाइनमेंट के तहत गांव के बीच से होकर पाइप लाइन ले जाने के लिए अधिकारियों ने नक्शा बना दिया है. जमीन अधिग्रहण के लिए ग्रामीणों को नोटिस भी भेजा जाने लगा है.mokama-pic-maranchi-me-sdm

ग्रामीणों ने जमकर हंगामा भी किया था बाद में पटना डीएम के निर्देश पर बाढ़ एसडीएम सुब्रत कुमार सेन ने ग्रामीणों के साथ बैठक की लेकिन कोई सहमति नहीं बन पाई है. किसान साफ तौर पर कहते हैं कि गांव से बाहर पाइपलाइन परियोजना ले जाने में कोई आपत्ति नहीं है लेकिन गांव के बीच से होकर पाइपलाइन परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण नहीं होने दिया जाएगा. किसानों का आरोप है कि गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड के अधिकारी अधिग्रहण कानून का उल्लंघन कर रहे हैं. गौरतलब है कि पेट्रोलियम मंत्रालय के भू-अर्जन अधिनियम 1962 के अनुसार आबादी और रिहायशी वाले इलाकों से गैस पाइपलाइन नहीं ले जाया जा सकता है. अधिग्रहण के सवाल पर मरांची में किसान आंदोलन के मूड में हैं और प्रशासन के समक्ष अभी भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है.vlcsnap-2016-12-07-12h33m21s206

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