सांसद पप्‍पू यादव की गिरफ्तारी के खिलाफ JAP ने राज्‍यपाल को सौंपा ज्ञापन

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पटना : जन अधिकार पार्टी (लो) के प्रदेश अध्‍यक्ष सह पूर्व मंत्री श्रीभगवान सिंह कुशवाहा और पार्टी के संरक्षक व सांसद के पिता चंद्र नारायण प्रसाद के नेतृत्‍व में आज एक प्रतिनिधि मंडल ने महाम‍हिम राज्‍यपाल रामनाथ कोविंद से मुलाकात कर पांच सूत्री मांगों का एक ज्ञापन सौंपा. इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने पार्टी के राष्‍ट्रीय संरक्षक व सांसद पप्‍पू यादव की साजिश के तहत सारे कानूनी प्रक्रियाओं का उल्‍लंघन कर गिरफ्तारी और शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों पर पुलिसिया ज्‍यादती की न्‍यायिक जांच करवा कर इंसाफ दिलाने की मांग की. राज्यपाल ने प्रतिनिधि मंडल को उचित कार्रवाई करने का आश्‍वासन दिया.

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इस मौके पर प्रतिनिधिमंडल ने BSSC परीक्षा प्रश्‍न पत्र लीक घोटाले की सीबीआई जांच और इसमें कद्दावर राजनेताओं व पदाधिकारियों की संलिप्‍तता की जांच कराने की मांग की. साथ ही दलित दा‍मिनी सेक्‍स स्‍कैंडल की न्‍यायिक जांच और इसमें संलिप्‍त राजनेताओं व पदाधिकारियों की संलिप्‍तता की जांच की मांग भी की गयी. इसके अलावा क्लीनिक एक्‍ट लागू कर सरकारी डॉक्‍टरों के निजी प्रैक्टिस पर रोक व निजी शिक्षण संस्‍थानों में एडमीशन, री-एडमिशन और डोनेशन के अलावा बढ़े हुए बिजली दर को वापस लेने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वादे पर अमल करते हुए बेनामी सं‍‍पत्ति की जांच व उनपर कार्रवाई की मांग की.

ज्ञापन के जरिए उन्‍होंने महामहिम से कहा कि पार्टी द्वारा पूर्व से घोषित और उक्‍त मांगों को लेकर प्रदर्शन की सक्षम पदाधिकारियों से अनुमति के बाद शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया जा रहा था. इस दौरान सांसद पप्‍पू यादव कार्यकर्ताओं को प्रदर्शन के उद्देश्‍य को लेकर संबोधित कर रहे थे, तभी अचानक पुलिस ने वाटर कैनन, लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले का इस्‍तेमाल बिना किसी चेतावनी व उद्धोषण के किया. पुलिस की कार्यकर्ताओं, महिलाओं और मीडियाकर्मियों पर बर्बरतापूर्ण व अमानवीय कार्रवाई में सैकड़ों कार्यकर्ता घायल हुए. कईयों को गंभीर चोटें आईं. कईयों के हाथ-पैर टूटे और गंभीर रूप से भी बड़ी संख्‍या में लोग घायल हुए.

उन्‍होंने वीडियो फुटेज व समाचार पत्रों के कतरन का हवाला देते हुए कि हद तो तब हो गई, जब पप्‍पू यादव को टारगेट कर ड्यूटी पर तैनात डीएसपी के ईशारे पर जानलेवा हमला किया गया. मगर वहां मौजूद सांसद यादव के सुरक्षाकर्मियों ने उन्‍हें सुरक्षा घेरे में ले लेकर उनकी जान बचाई. गौरतलब है कि सांसद को वाई श्रेणी की सुरक्षा प्राप्‍त है. उन्‍होंने कहा कि इस अमानवीय कार्रवाई पर जब सरकार की निंदा होने लगी तब राज्‍य सरकार ने इस मामले से ध्‍यान भटकाने के लिए पटना पुलिस के एसपी, डीएसपी और कई थानों की पुलिस को उनके आवास पर भेजकर नजरबंद रखा. इस दौरान उन्‍हें मानसिक रूप से प्रताडि़त भी किया गया. सांसद की अवमानना करते हुए संसद की कार्रवाई में भी भाग लेने से रोकने के लिए पुलिस ने 6 बजे और 8 बजे की फ्लाइट नहीं लेने दी गई.

उन्‍होंने कहा कि माननीय सांसद की गिरफ्तारी संसदीय परंपरा की अवमानना है. सांसद को जिस मुकदमे में फंसाया गया, वो जनवरी 2017 के राजभवन मार्च की है. इस मामले में रात के अंधेरे में झूठा मुकदमा कर न सिर्फ माननीय न्‍यायालय गुमरा‍ह करते हुए उन्‍हें गिरफ्तार किया, बल्कि माननीय उच्‍चतम न्‍यायालय के उस आदेश की भी अवमानना की,‍ जिसमें उल्‍लेख है कि रात के अंधेरे में पुलिस द्वारा किसी को गिरफ्तार नहीं किया जाए. मगर पुलिस ने उनकी गिरफ्तारी का मन बना रखा था कि ताकि वे सदन की कार्यवाही में हिस्‍सा नहीं ले सकें और वे इस मामले को सदन में न उठा सकें. इसलिए पुलिस ने झूठे मुकदमे में सभी नियमों को ताक पर रखकर उनकी गिरफ्तारी की. इसके अलावा सचिवालय थाना अतंगर्त विधान विधान सभा के सामने प्रदर्शन करते हुए छात्रों को भी झूठे तरीके से फंसाने के उद्देश्‍य से गिरफ्तार किया गया है.

प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश अध्‍यक्ष सह पूर्व मंत्री श्रीभगवान सिंह कुशवाहा और पार्टी के संरक्षक व सांसद के पिता चंद्र नारायण प्रसाद के अलावा प्रेमचंद सिंह, रघुपति प्रसाद सिंह, राघवेंद्र कुशवाहा, राजेश रंजन पप्‍पू, अकबर अली परवेज, एजाज अहमद, श्‍याम सुदंर, शंकर पटेल, आजाद चांद शामिल थे.

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