जानिए कहां है बिहार में काशी…

पटना/मोकामा: पटना जिला के बाढ़ प्रखंड में शहर के उत्तरी छोर पर अवस्थित प्राचीन उमानाथ शिवमंदिर बिहार के काशी के तौर पर चर्चित धर्मस्थल है. आस्था विश्वास और समर्पण का अद्भुत केन्द्र बाढ़ उमानाथ मंदिर में बिहार के कोने कोने से आकर श्रद्धालु भगवान शिव और पार्वती का उत्तरवाहिनी गंगा के जल से जलाभिषेक कर मन्नतें मांगते हैं. उत्तरवाहिनी गंगा तट पर स्थित इस प्राचीन मंदिर में महादेव का अंकुरित स्वरूप विद्यमान है.

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आस्था है कि सोमवारी के दिन उत्तरायण गंगा के जल से अभिषेक करने पर उमानाथ महादेव प्रसन्न होते हैं और श्रद्धालुओं की कामनाओं की पूर्ति होती है. उमानाथ मंदिर में सावन महीने की सोमवारी को यहां दूर दूर से हजारों की तादाद में श्रद्धालु आते हैं और भगवान शंकर का जलाभिषेक करते हैं. विघ्न बाधाओं से मुक्ति और शादी विवाह के प्रयोजन से मनोकामनाएं रखने के लिए यहां कई जिलों से श्रद्धालु आते रहते हैं. माना जाता है कि पूरे देश में भागीरथी गंगा केवल चार स्थलों पर उत्तरवाहिनी बहती है जिनमे बिहार का उमानाथ और सुलतानगंज शामिल है.सावन माह में दूर दराज से आये श्रद्धालु जहां भगवान शिव और पार्वती का जलाभिषेक करते हैं वहीं हजारों की संख्या में श्रद्धालु उत्तरायण गंगा का जल लेकर बाबाधाम सहित अन्य शिवालयों के लिए प्रस्थान भी करते हैं.

महादेव का अंकुरित स्वरूप हैं उमानाथ !

उमानाथ मंदिर हजारों वर्ष पुराने इतिहास का साक्षी है. वैसे तो मंदिर की स्थापना को लेकर साक्ष्य कम और श्रुतियां ज्यादा प्रचलित हैं. एक किवदंति के अनुसार त्रेतायुग में भगवान  श्रीराम अयोध्या से जनकपुर के लिए यात्रा कर रहे थे.hhh-1 उत्तरवाहिणी गंगा के सुरम्य तट पर रूककर श्रीराम ने भगवान शिव की उपासना की थी और तब से ही यहां मंदिर की स्थापना की गई. एक दूसरी किवदंति के मुताबिक सैकड़ों वर्ष पूर्व मंदिर में विराजमान शिवलिंग को उखाडकर उसे मंदिर के मध्य स्थापित करने का निर्णय हुआ. शिवलिंग के किनारे खुदाई शुरू हुई ताकि शिवलिंग को निकालकर दूसरे जगह स्थापित किया जा सके. खुदाई गहरी होती गई और शिवलिंग का धरती के अंदर आकार बढ़ता गया. पचास फीट से अधिक की खुदाई हुई मगर शिवलिंग का अंतिम छोर पता नहीं चल सका. मंदिर के पुजारी बताते हैं कि तब खुदाई में लगे लोगों के स्वप्न में आकर भगवान शिव ने स्वयं कहा कि वे आदि उमानाथ हैं. उसके बाद लोगों ने खुदाई बंद कर दी. इसी कारण महादेव के इस स्वरूप को अंकुरित महादेव भी कहा जाता है.

बिहार के काशी के रूप में भी है प्रचलित

प्राचीन स्थाप्तथ्य कला का सुंदर नमूना उमानाथ मंदिर की पहचान बिहार के काशी के तौर पर भी है. उत्तरायण गंगा के तट पर देश में गिने चुने ही शिव मंदिर हैं. उमानाथ मंदिर उनमें से एक है. माना जाता है कि गोमुख से निकलने के बाद गंगा नदी पूरे देश में कुछ ही स्थलों पर उत्तरायण यानी उत्तरागामी है. इनमें बनारस, उमानाथ और सुलतानगंज शामिल हैं. इसी कारण इसे बिहार का काशी भी कहा जाता है. मंदिर की दीवाल पर अंकित ‘बाढ बनारस एक है बसत गंग के तीर, उमानाथ के दरस से कंचन होत शरीर’ उक्ति से श्रद्धालु भी गदगद होते हैं.vlcsnap-2016-10-31-10h52m54s214

पहुंचने का मार्ग

उमानाथ धाम आने के लिए हावड़ा दिल्ली मेन लाइन के पटना मोकामा रेलखंड पर स्थित बाढ़ स्टेशन उतरना पड़ता है. स्टेशन से चार किलोमीटर की दूरी पर है मंदिर जहां रिक्शा या ऑटो से पहुंचा जा सकता है. सड़क मार्ग से आने के लिए पटना से बख्तियारपुर होते हुए एनएच 31 या बेगूसराय लखीसराय से आने के लिए मोकामा होते हुए बाढ़ जाना होता है. पटना से लगभग 75 किलोमीटर की दूरी पर है बाढ़ का उमानाथ धाम.

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