नीतीश सरकार में गांधी संग्रहालय का अधिक विकास हुआ- रजी अहमद

gandhi-sangrahlay-news

पटना (नियाज आलम) : चम्पारण सत्याग्रह शताब्दी समारोह को लेकर देश भर में, विशेष तौर पर बिहार में चारों तरफ बापू की ही चर्चा है. इस पर राजनीति भी खूब हो रही है. महात्मा गांधी को आम लोग कितना याद कर रहे हैं और उनकी यादों को कितना ताजा किया जा रहा है इसकी वास्तविक स्थिति जानने के लिए हमने गांधी मैदान स्थित गांधी संग्रहालय का भ्रमण किया. संग्रहालय में दाखिल होते ही इसकी साफ-सफाई को देखर इतना तो पहली नजर में ही साफ हो गया कि गांधी संग्रहालय फिलहाल उपेक्षा का शिकार नहीं. हालांकि कई बार जो दिखता है वैसा होता नहीं, इसी मुहावरे को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़े और संग्रहालय के सभी विभाग जैसे मुख्य संग्रहालय समेत सत्याग्रह भवन आदि को भी देखा. हालांकि यहां आगन्तुक तो बस दो-चार ही मिले लेकिन संग्रहालय के संयुक्त सचिव की माने तो रोजाना लगभग सौ लोग तो यहां आते ही है.

सरकार की पहल के बाद से स्कूली छात्रों के आने का भी सिलसिला लगा रहता है. हालांकि शुक्रवार को ऐसी स्थिति देखने को नहीं मिली. बहरहाल संग्रहालय की वास्तविक स्थिति, उसके खर्चे, सरकार की उसके प्रति जिम्मेदारी, भवन की देख रेख आदि पर जब संग्रहालय के संस्थापक सचिव रजी अहमद से बातचीत की गई तो उन्होंने सबसे पहले यही कहा कि संग्रहालय की जिम्मेदारी उसे चलाने वाली गांधी स्मारक संग्रहालय समिति द्वारा बखूबी निभाई जा रही है. समिति का एक कोष है, जिससे स्मारक के खर्चे उठाए जाते हैं, हम किसी से डोनेशन नहीं लेते.

raji ahmad
संग्रहालय के संस्थापक सचिव रजी अहमद

सरकारों का इसके प्रति क्या रवैया रहा है, इस पर रजी अहमद ने कहा कि न काहु से दोस्ती और न काहु से बैर, यानि सरकारों के संबंध में ज्यादा कुछ कहने से मना किया. उन्होंने कहा कि उनकी संस्था ही इसके लिए अपनी क्षमता के अनुसार सब कुछ करती है. किसी तरह के राजनीतिक विवाद में न पड़ने की कोशिश करने वाले रजी अहमद ने कहा कि पिछली सरकारों ने भी जितना हुआ उतनी मदद की है लेकिन नीतीश सरकार ने इस पर विशेष ध्यान दिया है. उन्होंने बताया कि हम सरकार से किसी भी तरह की मदद के तौर पर धन नहीं लेते बल्कि उन्हें अपनी आवश्यक्ता बताकर उनसे ही काम करवाने के लिए कहते हैं.

गांधी संग्रहालय

इसकी मिसाल देते हुए उन्होंने कहा कि बीते 15 अप्रैल को चम्पारण सत्याग्रह शताब्दी समारोह के तहत मुख्यमंत्री गांधी संग्रहालय आए थे, जहां उनसे संग्रहालय में एक ऑडिटोरियम बनवाने का आग्रह किया गया. अहमद ने बताया कि मुख्यमंत्री ने इसे स्वीकार किया और उसके दो दिन बाद ही निर्माण विभाग के अधिकारियों ने ऑडिटोरियम बनाने की प्रक्रिया शुरु कर दी और संग्राहलय में आकर उसका माप आदि लेकर गए. संयुक्त सचिव असिफ वसी ने पिछली सरकारों पर प्रत्यक्ष रूप से तो अनदेखी का आरोप नहीं लगाया लेकिन उनके मुताबिक यहां बिजली पानी की बड़ी समस्या थी जो नीतीश सरकार के आने के बाद दूर हुई.

संयुक्त सचिव असिफ वसी

चम्पारण सत्याग्रह को लेकर संग्रहालय में आने वालों की संख्या पर कितना असर हुआ, इस पर संयुक्त सचिव आसिफ वसी ने बताया कि इस दौरान लगभग एक हफ्ते तक आगन्तुकों की संख्या दो गुनी हो गई. सम्मान समारोह में शामिल होने आए स्वतंत्रता सेनानियों ने भी बड़ी संख्या में संग्रहालय का भ्रमण किया. आसिफ ने यह भी बताया कि संग्रहालय ने महात्मा गांधी पर 6 किताबों का प्रकाशन किया है, जिसे राजधानी के लगभग 60 स्कूलों और 15 कॉलेजों में बांटा जा रहा है.

बता दें कि 30 जनवरी 1948 को महात्मा गांधी की हत्या के बाद उसके दर्द से उबरने के लिए तत्कालीन राष्ट्रीय नेताओं ने उनकी यादों को संजोने के लिए डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की अध्यक्षता में एक स्मारक फंड एकत्र करने के लिए गांधी स्मारक निधी का गठन किया. जेबी कृपलानी और जेसी कुमारप्पा उसके मंत्री थे. जवाहर लाल नेहरू, सरदार पटेल, मौलाना आजाद, चक्रवर्ती राजगोपालाचार्य, राजकुमारी अमृत कौर, जगजीवन राम, देवदास गांधी और जयराम दौलत राम उसके सदस्य थे. 31 मार्च, 1951 को केन्द्रीय गांधी स्मारक निधी ने देश के विभिन्न स्थानों पर गांधी जी से जुड़े संग्रहालय बनाने का निर्णय लिया. इसके लिए दिल्ली में केन्द्रीय गांधी स्मारक संग्रहालय समिति का गठन किया गया.

 

मोहनदास करमचन्द गांधी को महात्मा बनाने वाले बिहार की विशेषता को समझते हुए 9 दिसंबर, 1955 को समिति ने बिहार में गांधी संग्रहालय बनाने का निर्णय लिया. 9 अप्रैल, 1962 को तय किया किया गया कि संग्रहालय पटना में बनाया जाएगा और इसके लिए जमीन की तलाश शुरु की गई. इसके बाद 9 नवंबर, 1967 को वर्तमान गांधी संग्रहालय का निर्माण किया गया. एक कमरी की चित्र प्रदर्शनी से शुरु हुआ संग्रहालय आज पूरी तरह से विकसित है और यहां आने वाले को गांधी के विचारों और उनसे संबंधित अन्य जानकारियां बखूबी मिल जाती हैं.

गांधी संग्रहालय एक नजर में…

प्रांगण में बापू की मूर्ति

गांधी संग्रहालय में निर्माण कार्य की शुरुआत उपेन्द्र महारथी के मार्ग-दर्शन में बनी बापू की मूर्ति की स्थापना से हुई. मूर्ति का अनावरण 10 जून, 1975 तो त्तकालीन राज्यपाल आरडी भंडारे ने किया.

चित्र कक्ष

संग्रहालय के चित्र कक्ष का उद्घाटन 21 मार्च, 1976 को तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष डॉ. बलिराम भगत ने किया. इसके बाद इसमें समय समय पर परिवर्तन होता रहा.

सभा कक्ष

गांधी संग्रहालय में दो सभा कक्ष हैं. कस्तूरबा गांधी कक्ष और बादशाह खां कक्ष. कस्तूरबा गांदी कक्ष का उद्घाटन 2 अक्तूबर, 1978 को तत्कालीन शिक्षा मंत्री ठाकुर प्रसाद सिंह ने किया जबकि बादशाह खां कक्ष का उद्घाटन महान स्वतंत्रता सेनानी और महाराष्ट्र व तमिलनाडु के पूर्व राज्यपाल सादिक अली ने 9 अगस्त 1998 को किया.

मेरा जीवन ही मेरा सन्देश है

मेरा जीवन ही मेरा सन्देश है, मोरॉल पर गांधीजी की पूरी जीवनी को संक्षिप्त तौर पर पेश किया गया है. इसका अनावरण 2 अक्तूबर, 1998 को पटना हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति सरवर अली ने किया था.

गांधी साहित्य केन्द्र

गांधी साहित्य केन्द्र में रचनात्मक गांधी साहित्य के अलावा स्वतंत्रता सेनानियों की जीवनी पर साहित्य भी उपलब्ध है. इस केन्द्र का उद्घाटन 2 अक्तूबर, 1989 को तत्कालीन राज्यपाल डॉ. ए आर किदवई ने किया.

‘हिन्दुस्तान हमारा’ मूर्ति

गांधी संग्रहालय प्रांगण में गांधी विचार के सारांश पर आधारित एकता को दर्शाता हिन्दुस्तान हमारा मूर्ति का निर्माण हुआ. 2 अक्तूबर, 1998 को तत्कालीन राज्यपाल सुंदर सिंह भंडारी और स्वतंत्रता सेनानी देवेन्द्र प्रसाद सिंह ने इसका अनावरण किया.

गांधी-टैगोर कक्ष

बिहार के तत्कालीन राज्यपाल आर एस गवई ने 9 दिसंबर, 2006 को गांधी-टैगोर मंडप का उद्घाटन किया. 1940 में गांधीजी और और रविंद्रनाथ टैगोर की शांति निकेतन में आखिरी मुलाकात हुई थी. इसी ऐतिहासिक भेंट को दर्शाने के लिए यहां दोनों की प्रतिमाएं लगाई गई हैं.

सत्याग्रह-शताब्द स्मृति मंडप

दक्षिण अफ्रीका में गांधी जी के पहले सत्याग्रह की शताब्दी के तौर पर 2006 में सत्याग्र शताब्दी स्मृति मंडप का उद्घाटन 30 जनवरी, 2007 को तत्कालीन राज्यपाल डॉ. आर एस गवई और मुख्यमंत्री नीथीश कुमार ने संयुक्त रूप से किया.

तीन महापुरुषों की परिणति

प्रसिद्ध चित्रकार उपेन्द्र महारथी द्वारा बनाए गए विश्व प्रसिद्ध चित्र को फ्लैक्स बोर्ड पर प्रिंट कर लगाया गया है. इसमें बुद्ध, ईसा मसीह और महात्मा गांधी के अन्त को दर्शाया गया है. दूरदर्शन बिहार के तत्कालीन निदेशक डॉ शशांक ने इसका अनावरण किया.

सत्याग्रह भवन

इस साल चम्पारण सत्याग्रह शताब्दी समारोह के तहत 2 अक्तूबर, 2012 को मुख्यमंत्री नीथीश कुमार ने सत्याग्रह भवन का विधिवत उद्घाटन किया.

इस भवन में उस गांव को मॉडल, वास्तविक ग्रामीण वस्तुओं और लिखित वर्णनों के माध्यम से प्रस्तुत करने की कोशिश की गई है, जिसकी बुनियाद पर हिन्दुस्तान की अर्थ व्यवस्था सदृढ़ थी और हिन्दुस्तान सोने की चिड़िया कहलाता था. इसमें 10 तरह के चरखे, करघा, चाक, चक्की, धुनकी, तकुली और छोटे औजारों को स्तायी तौर पर रखा गया है. इसके अलावा सत्य की खोज, एकादश-व्रत पार्क, देवघर-बैद्यनाश धाम मंडप और पुस्तकालय लोगों के आकर्षण का केनद्र है.

देखें गांधी संग्रहालय की और तस्वीरें

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*