आप भी देखिए सरकारी प्रबंध, कैसे होता हैं यहां पटवन

पटना : सरकारी विभागों में मैनपॉवर की कमी की वजह काम का प्रभावित होना कोई नहीं बात नहीं है. अब कुछ ऐसा ही नजारा पटना के मनेर इलाके में देखने को मिल रहा है. लघु सिंचाई विभाग नलकूप प्रशाखा कार्यालय मनेर प्रखंड के अंर्तगत राजकीय नलकूपों की संख्या 43 वहीं नाबार्ड फेज 2 व फेज 8 मिला कर लगभग 55 नलकूप हैं. इनमें से लगभग 41 नलकूप चालू अवस्था में हैं, मगर इसके चालन के लिए नलकूप चालक मात्र छह हैं. यह है मनेर में सुखाड़ से निपटने का इंतजाम.
चालक के अभाव में कई राजकीय नलकूप बंद
इस सुखाड़ की स्थिति में वर्ष 2014-15 में मौसमी मजदूर के नाम पर पटना मुख्य् कार्यालय में नियुक्ति की गई. मनेर प्रशाखा कार्यालय में भेजा गया और मात्र तीन माह में ही उन्हें हटा दिया गया. नलकूप चालक के अभाव में कई राजकीय नलकूप बंद हैं. एक—एक नलकूप चालक को छह से आठ नलकूप चालक के लिए दिये गये हैं. इस कारण देख रेख में कमी से बार—बार नलकूप के मोटर जल रहे हैं. पटवन व सुखाड़ से निबटने के नाम पर यह खानापूर्ति ही है.
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इलेक्ट्रिशियन व फीटर में एक भी कर्मचारी नहीं
इलेक्ट्रिशियन व फीटर की हालत भी ठीक नहीं  है.  इसमें एक भी कर्मचारी नहीं है. प्राईवेट मिस्त्री के भरोसे कार्य होने से मरम्मती में भी देर होती है. नाले की स्थिति भी खराब है. आधे से अधिक टूटें हैं. मरम्मती के नाम पर भी लूट हुई. कनीय अभियंता अविनाश कुमार का कहना है कि नलकूप फिलहाल यहां 44 चालू हैं, जबकि 21 किसी ना किसी कारण से बंद हैं. इसकी डीपीआर हमने बना कर विभाग को सौंप दिया है. विभाग की ओर से आवंटन आते ही इसके लिए टेंडर होगा.
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एक चालक 6 से 8 बोरिंग चलाते हैं 
44 नलकूप पर मात्र छह ऑपरेटर पर जेई नें कहा कि एक एक नलकूप चालक को छह से आठ बोरिंग चलाने पर लगाया गया है. विभाग को और ऑपरेटर देने के लिए भी लिखा गया है. अनुबंध पर मौसमी मजदूर रखने की प्रक्रिया में भी
विभाग लगा है.

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