ऐतिहासिक हांडी साहेब गुरुद्वारा में खिचड़ी का प्रसाद है खास

पटना (मनोज प्रियदर्शी) : राजधानी में मनाये जा रहे सिखों के दसवें गुरु गुरू गोविन्द सिंह के 350वें प्रकाशोत्सव पर पटनासाहिब आ रहे श्रद्धालु दानापुर के हांडी साहेब गुरुद्वारा भी उसी उत्सुकतावश पहुंच रहे हैं. यहां आ रहे श्रद्धालु गुरु जी के बाल्यकाल में छोड़ी पादूका-निशानी का दर्शन कर और हांडी खिचड़ी छक कर खुद को भाग्यशाली मान रहे हैं.

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पटना सिटी स्थित तख़्त श्रीहरमंदिर साहिब में चल रहे महोत्सव को लेकर यहां भी रोजाना लंगर और अरदास किया जा रहा है. जिसमें देश-विदेश से शामिल होने वाले श्रद्धालुओं की संख्या रोजाना बढ़ती जा रही है. इस वक़्त गुरुद्वारा में लुधियाना से आये बीटू बाबा अपने 2 सौ सेवको के साथ श्रद्धालुओं को लंगर खिलाने में जुटे हैं.

क्या है इस गुरुद्वारे का इतिहास

बता दें कि गुरू गोविन्द सिंह अपनी मां गूजरी और मामा कृपाल सिंह के साथ पटना साहिब से अपने पिता के पास पंजाब के आनंदपुर गुरुद्वारा जाने के लिए निकले थे. इस रास्ते में उनका पहला पड़ाव दानापुर के उत्तर -पूर्व में गंगा किनारे स्थित जमुनी माई की कुटिया थी.

उस वक़्त गुरू जी बाला प्रीतम कहलाते थे और उनकी उम्र मात्र 8 वर्ष थी. ये 1674 की बात है. संगत के साथ आये बाला प्रीतम को खिलाने को लेकर जमुनी चिंतित हो उठी. उनकी इस परेशानी को भांप बाला प्रीतम ने हांडी को कपडे से ढंक खिचड़ी खिलाते जाने को कहा.

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कहते हैं कि जामुनी ने ऐसा ही किया और सभी का पेट भर गया. इस चमत्कार को देख जमुनी ने बाला प्रीतम से एक शिलापट्ट पर पादूका के निशान मांगे. इस निशान को सहेज कर रखा और पूजा करती रही. निशान का दर्शन करने आनेवालो को प्रसाद के रूप में हांडी की खिचड़ी खिलाती रही. उसी वक्त से जमुनी की कुटिया गुरुद्वारा के रूप में स्थापित हुई.

प्रशासन ने आज ली सुध

प्रकाशोत्सव को लेकर गुरुद्वारा के पास औऱ गंगा घाट पर पसरे कचरे को हटाने के लिए स्थानीय प्रशासन की नींद आज खुली है. सिटी एसपी, एसडीओ आदि अधिकारियों ने  गुरुवार को हांडी साहेब गुरुद्वारा का भी दौरा किया. यहां उन्होंने गुरूद्वारे की व्यवस्था का जायजा लिया और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिये. 350वां प्रकाशोत्सव : लेज़र लाइट्स के जरिए देखिए गुरु महाराज से जुड़ी यादें

हालांकि हांडी साहेब गुरुद्वारा तक वाहनों के आने जाने के लिए अभी तक अतिक्रमण हटाने का काम शुरू नहीं हो सका है, जिनके चलते दानापुर बस अड्डा व रेलवे स्टेशन से यहां तक पहुंचने में श्रद्धालुओं को कठिनाई हो रही है.

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