जानिये, बीच रोड पर घंटों क्‍यों बेबस पड़े रहे हड्डी रोग विशेषज्ञ डा. अमूल्‍य सिंह

पटना : जाने-माने हड्डी रोग विशेषज्ञ डा. अमूल्‍य सिंह रविवार की रात बेहद बेबसी की अवस्‍था में थे . वे बड़े डाक्‍टर हैं, कोई पालिटिकल-एडमिनिस्‍ट्रेटिव वीवीआईपी तो ठहरे नहीं, जो कष्‍ट हरने बड़ा प्रशासनिक अमला तुरंत पहुंच जाता . अमूल्‍य सिंह ने जो दर्द रात को भुगता है,वह बिहार के आम लोगों की दैनिक डायरी में शामिल हो चुका है . लेकिन फिक्र कौन करता है ? 

बिहार सरकार कहती है कि उसने प्रदेश में सड़कों का ऐसा नेटवर्क बनाया है कि लोग छह घंटे में एक हिस्‍से से दूसरे हिस्‍से में पहुंच सकते हैं . लेकिन,सत्‍य को परखेंगे,तो ऐसा सिर्फ वीवीआईपी लोगों  के लिए होता है . दावा कितना झूठा है,पहले अकेले महात्‍मा गांधी सेतु को पार करने वाले जानते थे . पर,अब तो आरा के कोइलवर पुल का हाल ऐसा है कि कुछ कहिए ही नहीं . पिछले हफ्ते लाइवसिटीज ने विशेष रिपोर्ट में कोइलवर पुल पर रोज लगने वाले महाजाम की चर्चा की थी .

अब जानिए,डा. अमूल्‍य सिंह के साथ संडे की रात में जो कुछ हुआ,उसे . डा. सिंह वाराणसी गये हुए थे . डाक्‍टरों के सेमिनार में शिरकत करने को . क्‍लार्क होटल में ठहरे थे . बहुत जॉली मूड में थे . संडे की मार्निंग में डा. सिंह ने कूल मूड में वाराण्‍सी से ही फेसबुक पर अपने परिवार  के साथ सुंदर तस्‍वीर स्‍टेटस के साथ फेसबुक पर अपलोड की थी . लिखा था – Lucky are those…who r blessed with daughters . 

 

शाम को वे वाराणसी से पटना के लिए सड़क मार्ग से चले . भरोसा था, रात को पटना पहुंच जायेंगे . डिनर घर पर ही करेंगे . लेकिन यह क्‍या, आरा पहुंचते ही वे बुरे फंस गये . पता चला कि आगे कोइलवर पुल पर महाजाम लगा है . घंटे भर से नहीं कई घंटों से . कोई संभावना नहीं कि कब जाम खत्‍म होगा और ट्राफिक चालू होगा . डा. सिंह ने समझ लिया कि विपत्ति सामने आ गई . अब इनसे जूझना ही होगा . मन बेचैन था . एक्‍सपीरियंस उन्‍होंने फेसबुक पर शेयर करना शुरु किया . रात को 11.29 बजे उन्‍होंने लिखा –Travelling on road in Bihar – HORRIBLE . Already 9 hours…just covered a distance of 200 km.

जाम में फंसे डा. सिंह के पास कोई रास्‍ता नहीं था . घर वाले फोन कर पूछते कि कब आ रहे हैं,लेकिन वे बताते कैसे,खुद भी जो नहीं जान रहे थे . आगे का हालात जानने को कभी स्‍वयं गाड़ी से उतर कर आगे-पीछे देखते, तो कभी ड्राइवर देखता . अब अपने गम को वे महाजाम में फंसे दूसरों के गम को जान मन को शांत करने की कोशिश करने लगे .

महाजाम में कई बाराती फंसी थी . जानते ही हैं कि 23 अप्रैल को बहुत लगन था . डा. सिंह ने बारात वाली एक गाड़ी के भीतर से आती आवाज को सुना . पंडित जी दूल्‍हे को कह रहे थे – जाम में ही शुभ लगन का समय खत्‍म हो गया . अब यहीं से फोन पर मंत्र पढ़ देता हूं . इस पीड़ा को सुन-देख डा. सिंह ने अपनी पीड़ा को कम मान लिया और फिर से मौन भाव में शांत बैठ गये . 

और वक्‍त गुजरा,तो नींद हमला बोलने लगी . सुबह डा. सिंह को क्‍लीनिक भी जाना था . नींद आंखों में बिना हार्न के चिल-पों की आवाज और मच्‍छरों के डंक की फिक्र किए बिना घुस आई थी . सो,वे बीच रोड पर खड़ी गाड़ी की पिछली सीट पर तकिया लगा सोने लगे . बैटरी न बैठ जाए,इसलिए कभी इंजन स्‍टार्ट कर एयर कंडीशन ऑन कर देते तो फिर कुछ देर बाद ऑफ . घंटे-घंटे गुजरते गये,फिर महाजाम अपनी चाल से छूटा और डा. अमूल्‍य सिंह पटना पहुंचे . लेकिन इस नसीहत के साथ कि आगे कभी आरा भी जाना हो तो सड़क से जाने के पहले मन को सब कुछ झेल पाने के लिए तैयार कर लेना होगा .

 

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