पद्म अवार्ड की सूची देख निराश हुए Putla आर्टिस्ट अशोक, कहा-अब नहीं बनायेंगे रावण

पटना (शशांक मुकुट शेखर) : कल बुधवार  25 जनवरी को 2017 के पद्म अवार्ड्स की घोषणा की गई थी . इस अवार्ड के लिए #Bihar से भी दो नामों स्वामी निरंजनानंद सरस्वती (पद्मभूषण) और बौआ देवी (पद्मश्री) का चयन किया गया है. मगर एक ऐसे भी कलाकार हैं जो पद्म अवार्ड नहीं मिलने से बेहद निराश हैं और सरकार के खिलाफ मोर्चा करने के मूड में हैं.37 वसंत देख चुके अशोक सुधाकर पिछले 18 सालों से Bihar में दुर्गापूजा के अवसर पर पटना के गांधी मैदान में होने वाले प्रसिद्ध रावण दहन की परंपरा को अकेले आगे बढ़ा रहे हैं.इस समय वे बिहारी स्टाइल में रावण,कुंभकरण और मेघनाद का पुतला बनाने वाले भारत के इकलौते कलाकार हैं.महज 15 साल की उम्र में इन्होंने Famous पुतला मेकिंग आर्टिस्ट जमाल मियां के कहने पर इस कला के प्रति अपना जीवन समर्पित कर दिया था.तब से इन्होंने अपना तन,मन और धन सब कुछ इसी के पीछे लगा दिया.दुर्गापूजा के अवसर पर पटना के गाँधी मैदान सहित पटना सिटी,सिवान,मुजफ्फरपुर सहित कई अन्य जगहों पर भी जाकर ये पुतला बनाते हैं.
हर साल गाँधी मैदान में होने वाले पुतला दहन कार्यक्रम में बिहार के मुख्यमंत्री और राज्यपाल अतिथि के तौर पर शिरकत करते हैं. साथ ही 5-7 लाख लोग बिहार के कोने-कोने से इनके बनाए पुतले को देखने आते हैं,इनके द्वारा बनाए रावण का पुतला दहन आज बिहार में विजयादशमी का अभिन्न अंग बन गया है. इस पेशे के प्रति इनके जूनून का आलम यह है कि कई दफा आयोजकों द्वारा कम फंड मिलने पर पॉकेट से पैसे लगाकर ये पुतला निर्माण के काम को पूरा करते हैं.

अगस्त 2016 में इनको बिहार सरकार के गृह विभाग से कॉल आया.कहा गया कि इस साल पद्म अवार्ड के लिए इनका नाम भेजा जा रहा है.सारी प्रक्रिया पूरी करते हुए इनको अपने काम का मीडिया कवरेज व फोटोग्राफ्स भेजने को कहा गया.इन्होने सारे दस्तावेज PMO तथा पद्म अवार्ड की वेबसाइट पर जमा करवाया.साथ ही सबकी एक कॉपी बिहार सरकार में संबंधित विभाग के पास भी भेजा. भारत सरकार के गृह विभाग द्वारा दस्तावेजों के जमा होने का रिसीविंग भी इनको भेजा गया.जॉइंट सेक्रेटरी डॉ आर के मित्रा से फ़ोन पर बात करने पर इनके नाम पर विचार करने की बात कही गई . बिहार सरकार के अधिकारियों द्वारा भी इस साल इनको पद्म अवार्ड मिलने का आश्वासन कई बार दिया गया. 
दरअसल कुछ साल पहले भी इनके नाम की सिफारिश की गई थी.मगर बाद में नाम काट कट गया . BHU में शिल्पकला के छात्र रहे अशोक  ने इतने सालों से अपने दम पर विलुप्तता के कगार पर खड़ी इस कला को जीवित रखा है.उनके अनुसार वे पद्म कला के असली हकदार हैं.मगर इनके साथ मौके पर पॉलिटिक्स हो जाता है. इस कारण उनके जैसे आर्टिस्ट अवार्ड से वंचित रह जाते हैं.

इस साल भी पद्म अवार्ड नहीं मिलने से निराश अशोक  ने आगे से गाँधी मैदान सहित सभी जगहों पर पुतला नहीं बनाने का प्रण लिया है.

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