नहीं छूटेगा छठ : कोरिया से चल मोकामा आ रही है मोना

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पटना (कुमार कृष्‍णा) : मोकामा की मोनी सिंह का इस बार छठ नहीं छूटेगा. मोनी फिलहाल साउथ कोरिया में बतौर इंजीनियर कार्यरत हैं. दो सालों से वह लोक आस्था के महापर्व पर अपने घर नहीं आ रही थीं. मोनी की मां सुनीता देवी कई सालों से छठ कर रही हैं. बेटी के पर्व पर घर नहीं आने का गम पूरे परिवार को सालता था. कभी सिंगापुर और कभी ऑस्ट्रेलिया में समुद्र से तेल गैस की संभावनाओं की तलाश वाले प्रोजेक्ट में व्यस्त रहने के कारण छठ पर घर आने की उसकी संभावनाएं व्यस्तता की भेंट चढ़ जाती थीं. इस बार ऐसा नहीं होगा.

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बिहार सरकार के पर्यटन विभाग के विज्ञापन बुला रही है रिश्तों और प्यार की चौखट, घर आ जाओ कहीं छूट न जाए छठ को देखकर रोते हुए हजारों मील दूर छठ को मिस करने वाली इस बार छठ को नहीं छोड़ेगी. साउथ कोरिया के बुसान शहर में गेओजे के पास रहने वाली मोनी टैक्सी, ट्रेन, तीन फ्लाइट और फिर ट्रेन पकड़कर मोकामा आ रही हैं….

आखिर बुला रही है रिश्तों और प्यार की चौखट, घर आ जाओ कहीं छूट न जाए छठ

आप भी पढिए मोकामा की मोनी का भावुक फेसबुक पोस्ट. “कहीं छूट ना जाए छठ”, ये ऐड पिछले दो सालों से देख सुन रहे थे. छठ पे अपने घर पे ना होना क्या होता है ये एक बिहारी से कोई ना ही पूछे तो अच्छा. वो भी तब जब आपकी मां छठ कर रही होती हैं. अपनी बेटियों को सामने देख-देख के मम्मी का वो “रुनकी झुनकी बेटी मांगब” गीत गाना, याद कर के कलेजे से जो आह उठती है वो एक बेटी बयान नहीं कर सकती. हर साल घाट पे भैया की वो मस्ती. पिछले दो सालों से मेरा छठ छूट रहा था. वीडियो कॉल से भैया हर वक़्त की अपडेट्स देता रहता था. ताकि ज़्यादा मिस ना करें. बाहर रहने के कारण छुट्टी कब मिलेगी, ये पहले से ही निर्धारित होता है.

 

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पर इस बार ठान रखा था कि चाहे कुछ करना पड़े छठ में घर ज़रूर जाएंगे. और मेरी ख़ुशक़िस्मती कि सही समय पे मेरी छुट्टियाँ पड़ीं. मोनी आगे लिखती हैं दिवाली के दिन घर पहुंच रहे हैं हम. अब यहां लोगों के सवाल कि दिवाली तुम्हारा Grand festival है तो तुम दिवाली के दिन घर क्यूं पहुंच रही. दो सप्ताह की छुट्टी है. एक वीक पहले जाओ.

छठ में आ रहे हैं, तो मुश्किल से बचने को जानें…

अब यहां साउथ कोरिया में मेरे कोई भी बिहारी या फिर नॉर्थ इंडियन कलिग भी नहीं हैं. साउथ इंडिया में भी लोगों को अब पता चलने लगा है कि हमारे लिए दिवाली से भी कहीं बढ़ के छठ है. चलो इंडियंस को समझाना तो फिर भी बहुत आसान है मगर अब Foreigners को कैसे समझाएं कि दिवाली के बाद छठ होता है जो ज़्यादा इम्पोर्टेंट है हमारे लिए. समझाना मुश्किल तो था मगर हम ठहरे बिहारी. और लानत है बिहारी होने पे अगर “छठ” के बारे में नहीं बता पाये किसी को भी तो. फ़ोटो, वीडियो गूगल की मदद से समझा दिया अपने कलिग्स को. और हां, नाम भी याद करवा दिया है. चलिए, हमने तो अपना सारा काम निबटा के, सब कुछ से मुक्त हो के छठ पर अपने घर पे होने के लिए अपनी यात्रा शुरू कर दी है. बस भगवान से यही मना रहे हैं कि ये वाली ख़ुशी भगवान हर साल दे हमको और सारे बिहरियों को. ”

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