गंगा में फिर चलने लगे ओवरलोड नाव, ‘नदी थाना’ को नहीं खबर

पटना (जुलकर नैन) : बीते 14 जनबरी को पतंगबाजी के मौके पर NIT नाव हादसे में दर्जनों लोगो की मौत हुई थी. इस दर्दनाक हादसे में मरने वालो के परिजनों का दर्द अभी भरा भी नहीं है. लेकिन ऐसा लगता है कि जिला प्रशासन उस घटना को भूल चुकी है. पटना जिला प्रशासन की इस लापरवाही का नजारा देखने को मिला है फतुहा के कच्ची दरगाह गंगा घाट और जेठुली घाट पर.

यहां गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण तीन दिनों पूर्व कच्ची दरगाह-राघोपुर पीपा पुल खोल दिया गया. अब लगभग चार लाख की आबादी वाले राघोपुर विधानसभा के लोगों को जनवरी 2018 तक यानि छह महीने तक नाव की सवारी करनी पड़ेगी. इससे इन घाटों पर अब नाविकों की बल्ले-बल्ले हो गयी है.

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मिल रही जानकारी के अनुसार इन घाटों पर नाव चालक क्षमता से तिगुने, चौगुने सवारी लोडकर नाव को गंगा पार करा रहे हैं. नाविक भेड़-बकरियों की तरह महिला, पुरुष और बच्चों को नाव पर चढ़ाते हैं. यात्रियों की भी मजबूरी है कि उन्हें इस स्थिति में यात्रा करनी पड़ रही है.

ये तो हुई यात्रियों की मजबूरी की बात लेकिन इन नाविकों को रोकने के लिए गंगा के दोनों तटों पर एक भी सुरक्षाकर्मी नहीं रहते हैं. दोनों घाटों पर लगभग दो सौ नावें हैं. हर पांच से दस मिनट पर नाव ओवरलोड कर खोले जाते हैं. जबकि जेठुली घाट से डेढ़ किलोमीटर और कच्ची दरगाह घाट से ढाई किलोमीटर पर नदी थाना है, पर पुलिस को इसकी परवाह नहीं है.

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बता दें कि 20 मई 2011 को नदी थाना का शुभारम्भ किया गया था. लेकिन सीमांकन नहीं होने के कारण थाना में कोई काम नहीं होता था. इसी साल हुए NIT नाव हादसे के दूसरे दिन आनन फानन में थाना का सीमांकन कर नदी थाना का काम शुरू करवा दिया गया था. यहां गौरतलब है कि नदी थाना का मूल काम नदी के रास्ते होने वाले अपराध नियंत्रण को दरकिनार कर फतुहा शहरी क्षेत्र सहित 14 गांवों की सुरक्षा का भार दे दिया गया. इस वजह से पुलिस अब नदी की गश्ती छोड़कर गांवों का भ्रमण करने में व्यस्त रहती है. ऐसे नाव पर सवारी करने वाले यात्री भगवान भरोसे यात्रा करने को मजबूर हैं. इस बारे में फिलहाल नदी थाना के अधिकारियों का बयान नहीं लिया जा सका है. उनके बयान को भी अगली खबर में प्रकाशित किया जाएगा.

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