पटना हाईकोर्ट में अब हिंदी में भी दायर की जायेंगी याचिकाएं

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पटना (एहतेशाम) : न्यायिक कार्यों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने की ख्वाहिश रखनेवाले लोगों को हाईकोर्ट ने दी बड़ी राहत. अब पटना हाईकोर्ट में दायर होनेवाली सभी तरह की रिट याचिकाएं हिंदी में भी दायर की जा सकेंगी. हाईकोर्ट ने कहा कि अंग्रेजी में रिट याचिका दायर करने की कोई बाध्यता नहीं है. हिंदी में भी याचिकाएं दायर कर सकते हैं.

मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने जयप्रकाश की ओर से दायर लोकहित याचिका पर गुरुवार को सुनवाई करते हुए याचिका को यह कहते हुए निष्पादित कर दिया कि हिंदी में रिट याचिकाएं दायर करने का पटना उच्च न्यायालय का पहले ही आदेश दिया जा चुका है. ऐसी स्थिति में नया आदेश पारित करने की कोई आवश्यकता नहीं है.

दायर याचिका में कहा गया है कि बिहार सरकार ने 6 जून, 1948 को एक कानून बनाया था कि बिहार प्रांत के न्यायालयों की भाषा हिंदी होगी, जो बिहार सरकार के अधिनियम संख्या 157 जेआर, 26 जून 1948 के रूप में अधिनियमित है, साथ ही 26 जनवरी, 1950 में जब भारतीय संविधन लागू हुआ, तो उसके अनुच्छेद 243 में प्रावधान बना कि भारत संघ की राजभाषा हिंदी लिपि देवनागरी होगी, लेकिन पूर्व की भांति 15 वर्षों तक अंग्रेजी भाषा का प्रयोग होता रहा. वहीं अंग्रेजी भाषा का प्रयोग अदालतों में भी होता रहा है.

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इसी आलोक में भारतीय संविधन के अनुच्छेद 48 के अनुसार हाइकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की भाषा अंग्रेजी है. इसी अनुच्छेद की उक्त कंडिका 2 में राज्य के राज्यपाल से उच्च न्यायालय के न्यायिक कार्रवाई में हिंदी भाषा का प्रयोग करने की शक्ति है, जिसके तहत बिहार के राज्यपाल के द्वारा अधिसूचित किया गया कि उच्च न्यायालय पटना में हिंदी भाषा के वैकल्पिक प्रयोग होगा. दीवानी, फौजदारी मामलों में बहस करने के लिए और शपथ पत्रों सहित आवेदन प्रस्तुत करने के लिए अपवाद स्वरूप भारतीय संविधान के अनुच्छेद 226 और 227 के आवेदनों के लिए अंग्रेजी भाषा का प्रयोग किया जाता रहेगा, जिसके चलते उच्च न्यायालय में हिंदी एवं अंग्रेजी का विवाद जारी रहा कि याचिका हिंदी में दायर की जायेगी या नहीं.

इसी को लेकर याचिकाकर्ता ने लोकहित याचिका यह कहते हुए दायर किया था कि उच्च न्यायालय में जो रिट याचिकाएं संविधान के अनुच्छेद 226 और 227 के तहत दायर हो, वह अंग्रेजी के बजाय हिंदी में दायर हो. क्योंकि, हाईकोर्ट ने राज्यपाल के उक्त आदेश को असंवैधानिक करार दे दिया है. बावजूद इसके कई न्यायाधीशों द्वारा हिंदी में दायर याचिकाओं को सुनने से आनाकानी की जाती रही है.

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मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष जब यह मामला सुनवाई के लिए आया, तब राज्य सरकार के प्रधान अपर महाधिवक्ता द्वारा यह बताया गया कि पटना हाईकोर्ट के द्वारा पूर्व में भी इस प्रकार के आदेश दिये गये हैं कि यहां हिंदी में भी याचिकाएं दायर की जा सकती हैं, इसलिए ऐसी स्थिति में पुनः आदेश देने का कोई औचित्य नहीं है. प्रधान अपर महाधिवक्ता को सुनने के बाद अदालत ने कहा कि अगर हाईकोर्ट में हिंदी में रिट याचिका दायर करने का आदेश पूर्व में ही दिया जा चुका है, ऐसी स्थिति में इस याचिका को निष्पादित किया जाता है.

अदालत के आदेश के बाद अब पटना हाइकोर्ट में हिंदी में भी रिट याचिकाएं दायर की जा सकती हैं. अभी तक इस बात पर विवाद चल रहा था कि हाईकोर्ट में केवल अंग्रेजी में ही याचिकाएं दायर की जायेंगी. अदालती आदेश के बाद हिंदी में याचिका दायर करने वाले अधिवक्ताओं को एक बड़ी राहत मिली है.

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