सिविल सेवा दिवस पर बोले मोदी : सेवा भाव से काम करें, नाम कमाने की इच्छा से नहीं

नई दिल्ली.  आज ग्यारहवां लोक सेवा दिवस है. इस मौके पर कार्यक्रम का आयोजन भी किया गया. सिविल सर्विसेस डे के प्रोग्राम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हुए.  मौके पर उन्होंने अच्छा काम करने वालों अफसरों को सम्मानित भी किया. उन्होंने कहा कि आज के वक्त में अफसरों की जिम्मेदारियां और चुनौतियां बढ़ गई हैं.  इस दौरान उन्होंने अफसरों से कॉम्पिटीशन, काम के तरीके, आइडिया, माइंडसेट, एप्रोच और सिस्टम जैसे सब्जेक्ट पर बात की. 
उन्होंने कहा कि आप सोचिए आप में से ही कुछ लोग, जवान जब कश्मीर में बाढ़ आने पर लोगों की मदद करते हैं, तो उनको वहां तालियां भी मिलती हैं. भले ही बाद में वे ही लोग आपको पत्थर मारें, लेकिन कुछ समय के लिए उनके मन में भी आता है कि ये लोग हमारे लिए जान दे सकते हैं. कहने का मतलब काम में लोगों की सेवा का भाव होना चाहिए अभाव नहीं. अफसर सोशल मीडिया का इस्तेमाल खुद के प्रचार के लिए न करें. बस काम करने का तरीका बदलें.
पीएम मोदी ने कहा कि सबसे मेधावी छात्र अाईएएस बनते हैं, काम भी उसी हिसाब से होना चाहिए. अब लोग निजी अस्पतालों की तुलना सरकारी अस्पतालों से करते हैं. अगर काम करने के तरीके को बदलेंगे तो चुनौती भी अवसर में बदल जाएगी. यह प्रतियोगिता का दौर है इसलिए चुनौती भी ज्यादा बड़ी है. समर्पण भाव से काम करना चाहिए, नाम कमाने की इच्छा न होना ही सबसे बड़ी ताकत है.अच्छे काम के लिए टीम वर्क जरूरी है. ताकत का सही इस्तेमाल पता होना चाहिए.  
मोदी के स्पीच की खास बातें-
 काम का बोझ नहीं बढ़ा है, चुनौतियां बढ़ी हैं
मोदी ने कहा- “मुझे अफसरों की जिम्मेदारियों का पता है. 15-20 साल पहले हमी हम थे. ऐसे में कमियां नजरअंदाज करने की आदत बन जाती है. आम लोगों को लगता है कि सामान्य मानवीय के जीवन में 15-20 साल में एक विकल्प पैदा होता है.”
 ” इसके चलते सरकार में बैठे लोगों की जिम्मेवारी पहले से ज्यादा बढ़ गई है. काम का बोझ नहीं बढ़ा है, चुनौतियां बढ़ी हैं. कोई भी सिस्टम कॉम्पिटीशन में होनी ही चाहिए. अब लोग प्राइवेट अस्पताल से सरकारी अस्पताल की तुलना करते हैं.”
 “तुलना करने पर हमें भी लगता है कि हमें आगे बढ़ना चाहिए. अच्छा ये होगा कि जितना जल्दी हम अपनी काम करने के तरीकों को बदलेंगे, तो ये चुनौती अवसर में बदल जाएंगी. बदलते समय में सरकार के बिना कमी महसूस हो, लेकिन सरकार के रहते कमी महसूस न हो, लेकिन ये सिस्टम तब बनेगा, जब हम चीजों को उस तरीके से देखना शुरू करेंगे.”
 काम का क्वालिटेटिव एनालिसिस होना चाहिए
मोदी ने कहा- “क्वांटम जम्प तो हुआ है, हम इसका स्वागत करते हैं. मेरे सामने रिपोर्ट आई तो मेरा दिमाग और चलने लगा। अब थोड़ा क्वालिटेटिव एनालिसिस होना चाहिए.  हमें ये तो देखें कि कैसे किया है.  मैं चाहता हूं कि एक साल में क्वालिटेटिव चेंज होना चाहिए.”
 “ये कॉम्पिटीशन का दौर है, चुनौतियां बड़ी हैं. आपने देखा होगा गृहणी की योग्यता पर कभी गौर नहीं किया जाता, लेकिन जब परिवार का मुखिया अचानक छिन जाता है तो दिखाई पड़ता है कि गृहणी घर संभालना शुरू कर देती है. मेरे कहने का मतलब सबसे मेधावी लोग आईएएस बनते हैं काम भी उसी हिसाब से होना चाहिए.” 
“हमें ये देखना चाहिए कि कहीं हमारा अनुभव ब्रेक तो नहीं बन रहा? हमें फख्र होना चाहिए कि हमनें जो खेत जोता था, आगे के लोगों की वजह से उसमें फल भी आया. हमें इसी भाव से काम करना चाहिए. कई अफसर आप देखेंगे कि उन्होंने किसी आइडिया को बड़ा बनाया. आज खोजे से भी पता नहीं चलेगा कि वह कौन अफसर था. लेकिन आज कहीं इसमें कमी तो नहीं आ रही है.”
सेवा भाव से काम करें, नाम कमाने की इच्छा से नहीं
मोदी बोले, “समर्पण भाव से काम करना चाहिए, नाम कमाने की इच्छा न होना ही सबसे बड़ी ताकत है. ओनरशिप का मोमेंट होना सबसे जरूरी है. व्यक्ति के तौर पर इंसान की सबसे सही कसौटी कब होती है, अभाव ग्रस्त व्यवस्था व्यक्ति का सही मूल्यांकन नहीं करती है, प्रभाव ग्रस्त व्यवस्था ही व्यक्ति का सही मूल्यांकन कर सकती है.”
 अनुभव बोझ नहीं बनना चाहिए
मोदी ने कहा- “अनुभव बोझ नहीं बनना चाहिए. अच्छे और नए काम को बढ़ावा मिलना चाहिए. अफसर मोबाइल पर लगे रहते हैं, इसलिए मैंने इसे बैठक में बंद कर दिया.आज दुनिया ई गवर्नेंस से एम गवर्नेंस की तरफ चल पड़ी है. कौन सी ताकत कब और किस काम आनी चाहिए, ये हमें पता होना चाहिए.”
 “परंपरा को बरकरार रखना भी एक चुनौती है, हमें इसका ध्यान रखना होगा. मैं 16 साल से आप लोगों के साथ काम कर रहा हूं। इस व्यवस्था में काम करने वाले जो लोग हैं, उनका सुझाव ही सबसे उत्तम हो सकता है. अच्छे काम के लिए टीम वर्क जरूरी है.”  
आज एक अवसर आया है स्थितियों को बदलने का
मोदी बोले, “सरकारें आएंगी-जाएंगी, व्यवस्था लागू रहेगी। आज एक अवसर आया है स्थितियों को बदलने का। सत्यनिष्ठा से काम होना चाहिए, मैं आपके साथ खड़ा हूं. उस वक्त को याद कीजिए, जब आपने सिविल सेवा परीक्षा पास की थी तो क्या सपने थे, क्या उसमें कोई बदलाव आया है.”
” हम अपनी जिंदगी से ही प्रेरणा ले सकते हैं. गड्ढा खोदने-भरने से काम नहीं चलेगा, पेड़ भी लगना चाहिए। हम जो काम करें, उसका नतीजा भी निकलना चाहिए। अब हमें हर काम को आउटकम के तराजू पर तौलना होगा. परफॉर्म करने के लिए कमर कसना होगा”
 अफसर चाहें तो गंगा साफ हो सकती है
मोदी ने कहा– “कल तक हम अपना गुजारा जैसे तैसे करते थे, लेकिन 2022 में भारत को ताकत बनाने के लिए काम करें. विभागों में मतभेद और अहम नहीं होना चाहिए. अफसर चाहें तो गंगा साफ हो सकती है। अगर हम मिलकर कोशिश करें तो गंगा साफ हो सकती है.”
– ” कश्मीर में बाढ़ आती है, तो जवान लोगों की जान बचाते हैं, भले वहां लोग जवानों को पत्थर मारें, लेकिन उनके लिए तालियां बजाई जाती हैं. लोगों के मन में भाव पैदा करें, अभाव नहीं.”

सोशल मीडिया पर खुद का प्रचार जरुरी नहीं

मोदी ने कहा कि मैं सोशल मीडिया की ताकत को जानता हूं, सोशल मीडिया के जरिए लोगों को जागरुक किया जा सकता है। जिला लेवल के अफसर भी इसका फायदा उठा सकते हैं, वह अफसर इसका फायदा भी उठा रहे हैं।मोदी ने कहा कि काम के दौरान सोशल मीडिया पर खुद का प्रचार जरुरी नहीं है, सोशल मीडिया का इस्तेमाल जनता की भलाई के लिए करना चाहिए। अपने विवेक से ताकत का इस्तेमाल करना चाहिए. 

मैं हमेशा ही ईमानदार अफसरों के साथ हूं

मोदी ने कहा कि अफसरों की काफी ताकत है, आपके हस्ताक्षर  से बहुत कुछ बदलता है. उन्होंने कहा कि देश की शासन व्यवस्था अफसरों की ऊंगलियों पर मौजूद है. आपको अभाव के बीच भी रास्ते खोजने होंगे. मोदी ने कहा कि अफसरों को अपने हर निर्णय को राष्ट्रहित के तराजू में तौलना चाहिए. इस बात में कभी भी कमी नहीं आनी चाहिए.

मोदी ने कहा कि एक अफसर अगर फाइल में कुछ गलत लिख दे, तो मामला कोर्ट में चला जाता है और वर्षों तक मामला अटक जाता है. मोदी ने कहा कि इन छोटी वजहों से कई काम अटकते हैं। मैं हमेशा ही ईमानदार अफसरों के साथ हूं.

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