NMCH में बढ़ रही निमोनिया पीड़ित बच्चों की संख्या, डॉक्टर से जानें लक्षण और उपचार

पटना :  ठंड के मौसम में छोटे बच्चे अक्सर निमोनिया (कोल्ड डायरिया) से पीड़ित हो जाते है. इस बीमारी से पूरे देश में प्रत्येक वर्ष लगभग दो लाख बच्चों की मौत हो जाती है. अन्य राज्यों की अपेक्षा इस बीमारी से बिहार में शिशु मृत्यु दर अधिक है. कुल संख्या में से बिहार में प्रत्येक साल 19 हजार बच्चों की मौत निमोनिया से होती है. आंकड़ों में देखें तो प्रत्येक 1000 बच्चों पर 48 मौतें होती है, जिसका मुख्य कारण है नियमित रूप से टीकाकरण न होना.

फेफड़े में जमा हो जाता है कफ

इन दिनों पटना सिटी के नालन्दा मेडिकल कालेज अस्पताल (NMCH) के शिशु विभाग में निमोनिया से पीड़ित बच्चो की संख्या बढ़ने लगी है. अस्पताल में शिशु रोग चिकित्सक डॉ. बी पी जायसवाल की मानें तो यह बीमारी 5 साल तक के बच्चे को ज्यादा प्रभावित करती है. उन्होंने बताया कि इस बीमारी में बच्चों के फेफड़े में कफ जमा हो जाता है जिससे उन्हें सांस लेने में काफी परेशानी होने लगती है.

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जानें बीमारी के मुख्य लक्षण

डॉ. जायसवाल के मुताबिक़ इस बीमारी में अगर ससमय उपचार न किया जाए तो बच्चे की मौत भी हो जाती है. वायरस और फंगस के जरिये फैलने वाले इस बीमारी का मुख्य लक्षण है, तेज बुखार आना , खांसी होना और सास की गति तेज होना.

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अब अस्पताल में मिल रही मुफ्त मेडिसिन

निमोनिया के उपचार संबंधित जानकारी देते हुए डॉक्टर जायसवाल ने बताया कि सरकार की ओर से कई वैक्सीन फ्री में दी जाती है. पहले इस रोग से निबटने के लिए न्यूमोकोकल वैक्सीन बाजार में आई थी. लेकिन काफी महंगी होने की वजह से गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए यह दवा खरीदना मुश्किल था. अब सरकार ने इस महंगे न्यूमोकोकल वैक्सीन को फरवरी माह से सभी सरकारी अस्पतालों में मुफ्त उपलब्ध कराया जा रहा है.

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उन्होंने कहा कि इससे अब बिहार में भी निमोनिया से होने वाली शिशु मृत्यु दर में काफी कमी आएगी. सरकार के इस पहल से चिकित्सक से लेकर आम लोग भी काफी खुश हैं.

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