वाहे गुरु सतनाम… वाहे गुरु, हम तो गुरु साहिब का प्रकाश भरने आए हैं

पटना : शनिवार सुबह के 10:30 बजे थे. पटना के गांधी मैदान के हर कोने से वाहे गुरू सतनाम की गुंज सुनाई दे रही थी. दशमेश गुरु श्री गुरु गोविन्द सिंह का जन्म हो चुका था. फिजां में हर ओर था बस गुरु साहिब का प्रकाश. जिसे खुद में भर लेने आए थे देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु.

350वें प्रकाश पर्व में शामिल होने के लिए PM नरेन्द्र मोदी गांधी मैदान आने वाले थे. सुरक्षा बलों को इसकी खासी चिंता थी. चप्पे-चप्पे पर जवान तैनात थे. मगर श्रद्धालु तो अपने गुरु साहिब की भक्ति में मगन थे. जैसे ही गांधी मैदान परिसर में प्रवेश करते वाहे गुरु का जयकारा शुरु हो जाता.

दीवान साहिब तक जाने के लिए आज पहली बार श्रद्धालुओं की लंबी लाइन दिखी. इससे पहले तक श्रद्धालु बड़े आराम से दीवान साहिब तक पहुंच जाया करते थे. लेकिन, आज भीड़ सबसे अधिक थी. देश छोड़िए… विदेशों से भी हजारों श्रद्धालु गुरु साहिब का जन्मदिन मनाने इस पावन भूमि पर आ चुके थे.

गुरुवार का दिन गांधी मैदान के इतिहास के स्वर्णिम दिनों मे दर्ज होगा. इसलिए नहीं कि यहां प्रधानमंत्री गुरुग्रंथ साहिब का दर्शन करने आए थे. बल्कि इसलिए कि, पहली बार गांधी मैदान में गुरुग्रंथ साहिब आया था. जिसका दर्शन करने के लिए दुनिया भर के सिख श्रद्धालु जमा हुए थे.

वैसे तो जब भी प्रधानमंत्री किसी जगह जाते हैं तब सारी नजरें उनपर ही टिकी रहती हैं. लेकिन, यहां ऐसा नहीं था. श्रद्धालु खुद में और अपने गुरु साहिब में ही मगन थे. पीएम की सुरक्षा में लगी पुलिस के लिए भी ये एक तरह से काफी राहत भरा था. खास बात ये है कि श्रद्धालुओं के नियंत्रित करने के लिए पुलिस को मशक्कत नहीं करनी पड़ रही थी. वो खुद से खुद को नियंत्रित कर रहे थे.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यक्रम के अनुसार वो लंगर भी छकने वाले थे. इसीलिए दरबार हॉल से सटे लंगल हॉल 1 को खास तौर पर तैयार किया गया था. एसपीजी के जवानों ने भी लंगर हॉल का मुआयना कर लिया था. सेवादार सारे इंतजामात जुटा कर तैयार थे. PM को लंगर में परोसने के लिए खास तौर पर व्यंजन बनाए गए थे. काफी देर तक सेवादारों ने इंतजार किया. मगर दरबार हॉल के कार्यक्रम में देरी हो जाने के कारण प्रधानमंत्री लंगर छकने नहीं आ सके.

गांधी मैदान में सुबह से दोपहर तक यानी प्रधानमंत्री के कार्यक्रम तक केवल सिख श्रद्धालुओं को ही एंट्री दी जा रही थी. इधर बाहर स्थानीय लोग जमा हो गए थे. उन्हें भी दीवान साहिब में मत्था टेकना था. गेट नंबर 10, 11, 12 और 13 पर हुजूम इतना जमा हो गया था कि कई बार पुलिस के लिए संभालना मुश्किल पड़ गया. किसी तरह पुलिस ने समझा-बुझा कर आम लोगों को रोके रखा. और जैसे ही उनके लिए गेट खोला गया, सबके चेहरे पर खुशी आ गई. बस पूरे गांधी मैदान में जो बोले सो निहाल के जयकारे लगने लगे.

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