शहीदी दिवस पर विशेष: सिख धर्म के पहले शहीद गुरु अर्जुन देव

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लाइव सिटीज डेस्क : शांति के पुंज, शहीदों के सरताज, सिखों के पांचवें गुरु श्री अर्जुन देव जी की शहादत अतुलनीय है. मानवता के सच्चे सेवक, धर्म के रक्षक, शांत और गंभीर स्वभाव के स्वामी श्री गुरु अर्जुन देव जी अपने युग के सर्वमान्य लोकनायक थे. वह दिन-रात संगत की सेवा में लगे रहते थे.
उनके मन में सभी धर्मों के प्रति अथाह सम्मान था. श्री गुरु अर्जुन देव जी सिख धर्म के पहले शहीद थे. सिखों के चौथे गुरु रामदास जी के पुत्र थे, पांचवेंक गुरु अर्जुनदेव जी. अर्जुनदेव की मां का नाम भानी था. उनकी पत्नी का नाम गंगा जी और पुत्र का नाम हरगोविंद सिंह था. जो आगे चलकर सिखों के 6वें गुरु बने.
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आइये जानते हैं गुरू अर्जुनदेव जी के जीवन से जुड़ी रोचक बातें…
– जब गुरु अर्जुन देव जी की उम्र 16 वर्ष थी, तो 23 आषाढ़ संवत 1636 को आपकी शादी श्री कृष्ण चंद जी की सुपुत्री गंगा जी शादी हुई. यह शादी तहसील फिल्लोर के मऊ नामक स्थान पर हुई थी.
– ग्रंथ साहिब का संपादन गुरु अर्जुन देव जी ने भाई गुरदास की सहायता से 1604 में किया था.
– गुरु अर्जुनदेव ने ‘अमृत सरोवर’ का निर्माण कराकर उसमें ‘हरमंदिर साहब’ का निर्माण भी कराया, जिसकी नींव सूफ़ी संत मियां मीर के हाथों से रखवाई गई थी.
– उन्होंने एक नगर भी बसाया जिसका रखा गया तरनतारन नगर. अर्जन देव की रचना ‘सुषमनपाठ’ का सिख नित्य पारायण करते हैं.
– इतिहासकारों का यह भी मत है कि शहजादा खुसरो को शरण देने के कारण जहांगीर गुरु अर्जुन देव जी से नाराज था. 15 मई1606 ई. को बादशाह ने गुरु जी को परिवार सहित पकडने का हुक्म जारी किया था.
 

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