अदालत में IAS सुधीर कुमार का कच्चा चिट्ठा जमा, SIT का दावा – पर्याप्त हैं सबूत

फाइल फोटो

पटना : BSSC पेपर लीक मामले के आरोपियों में से एक आयोग के पूर्व चेयरमैन IAS सुधीर कुमार की गुरुवार को निगरानी कोर्ट में पेशी हुई. इधर SIT ने भी पेपर लीक मामले के जांच की केस डायरी अदालत में जमा कर दी. सुधीर कुमार की ओर से दायर की गई याचिका पर सुनवाई के दौरान SIT और सुधीर कुमार के पक्षों के बीच तीखी बहस हुई. एक तरफ जहां SIT का दावा है कि पेपर लीक मामले की जांच में सुधीर कुमार के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिल गए हैं, जबकि दूसरी तरफ सुधीर कुमार के पक्ष की ओर से कहा गया कि पूर्व चेयरमैन की पेपर लीक में कोई भूमिका नहीं है. SIT को सुधीर कुमार के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिल पाए हैं. फिर भी उन्हें जेल में बंद कर रखा गया है.

सुधीर कुमार के वकील ने कहा कि अभी तक आरोपों की प्रति एसआईटी द्वारा नहीं दी गई है. इसीलिए निगरानी कोर्ट में एसआईटी ने जो आरोप लगाए हैं उसका जवाब देने के लिए समय मिलना चाहिए. निगरानी के विशेष न्यायाधीश मधुकर कुमार ने जवाब देने के लिए चार अप्रैल की तारीख निर्धारित की है. निगरानी के विशेष न्यायाधीश ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद कहा कि इस पर फैसला 4 अप्रैल को किया जाएगा.

अपने ऊपर लगे आरोपों को नहीं सुन सके सुधीर कुमार

आज निगरानी कोर्ट में पेशी के दौरान सुधीर कुमार आधा घंटा तक पीछे की बेंच पर बैठे रहे. कुछ देर बाद उनके वकील जमानत दिलाने के लिए कोर्ट में उनकी तरफ से बहस करने वाले थे. पब्लिक प्रासिक्यूटर उनपर लगे आरोपों की जानकारी कोर्ट को बताते, लेकिन जमानत अर्जी पर बहस होने से पहले ही पुलिस सुधीर कुमार को जेल लेकर चली गयी. वे अपने ऊपर लगे आरोपों को नहीं सुन सके. कोर्ट में परिजनों से बात करते रहे. वहीं दूसरी ओर बेउर जेल से कोर्ट में पेशी के लिए आए बीएसएससी के पूर्व सचिव परमेश्वर राम, अवधेश कुमार, मंजू देवी कोर्ट के बरामदे में देर तक अपने परिजनों से बातचीत करते रहे.

SIT का दावा, सारी जिम्मेदारी अध्यक्ष की ही 

एसआईटी ने दावा किया था कि पर्चा लीक में पूर्व अध्यक्ष की अहम भूमिका रही है. सुधीर ने अपने बड़े भाई की पत्नी मंजू देवी को लाभ पहुंचाने के लिए पर्चा लीक करवाया है, क्योंकि मंजू देवी बीएसएससी की परीक्षा में अभ्यर्थी भी थीं. एसआईटी के समक्ष भांजा आशीष, भाई अवधेश कुमार, भावज मंजू ने दोष स्वीकारोक्ति बयान में इसका खुलासा भी किया है.

एसआईटी द्वारा कोर्ट में प्रस्तुत केस डायरी में जिक्र किया गया है कि सुधीर ने पूछताछ में दास गुप्ता को पेपर सेट करने की बात कही थी. जांच में पाया गया कि दास गुप्ता नाम का कोई व्यक्ति नहीं है. इस संबंध में नई दिल्ली आईआईटी के प्रोफेसर देवव्रत दास गुप्ता से भी पूछताछ की गई, मगर उन्होंने पेपर सेट करने की बात से इनकार किया है. पुलिस ने इसके लिए बाकायदे कोर्ट में उनका 164 का बयान भी कराया है. सुधीर के कॉल डिटेल से पता चला कि वह दिल्ली के अनंत प्रीत सिंह बरार व नितिन के संपर्क में थे.

सुधीर कुमार के पक्ष ने कहा, साजिश के तहत फंसाया जा रहा 

दूसरी ओर सुधीर कुमार के वकील राम विनय सिंह ने बहस करते हुए कहा कि उनके मुवक्किल को साजिश के तहत फंसाया गया है. उन्होंने कहा कि पर्चा लीक प्रकरण में सुधीर कुमार की कोई भूमिका नहीं है. उन्होंने प्रश्न पत्र सेट करने, प्रश्न पत्र तैयार करने, प्रिंट करने व परीक्षा केन्द्र पहुंचाने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी. पत्र सेट करने के बाद प्रिंट होता है. परीक्षा के दो दिन पहले जिले के डीएम कोषागार में रखा जाता है. इसके बाद की जिम्मेदारी जिले के डीएम व एसएसपी की होती है कि प्रश्न पत्र को सुरक्षित व समय पर परीक्षा केन्द्र पर पहुंचाया जाए. ऐसे में पर्चा लीक में सुधीर कुमार की भूमिका किस तरह है. SIT यह स्पष्ट नहीं कर रही है.

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