सुप्रीम कोर्ट का तंज : ‘आप कुछ करते नहीं, फिर कहते हैं कि सरकार को अदालतें चला रहीं हैं’

लाइव सिटीज डेस्क : सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार पर तल्ख़ टिपण्णी की है. कोर्ट ने कहा कि केंद्र से आरोप लगाया जाता है कि अदालतें ‘सराकर चलाने की कोशिश कर रही हैं’ जो काम ही नहीं करना चाहती. न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने देश में निराश्रित विधवाओं की स्थिति पर ध्यान न दिए जाने पर सरकार की खिंचाई करते हुए कहा, ‘‘आप (सरकार) इसे करना नहीं चाहते और जब हम कुछ कहते हैं तो आप कहते हैं कि अदालत सरकार चलाने की कोशिश कर रही है.’’ 
शीर्ष अदालत ने निराश्रित विधवाओं की स्थिति में सुधार के लिए अपने निर्देशों के बावजूद सहमति युक्त दिशा-निर्देशों के साथ न आने पर सरकार पर एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया और उसे ऐसा करने के लिए चार हफ्ते का समय दिया. पीठ ने कहा, ‘‘आप भारत की विधवाओं की स्थिति पर ध्यान नहीं देते हो. आप हलफनामा दायर करें और कहें कि आप भारत की विधवाओं को लेकर चिंतित नहीं हैं. आपने कुछ नहीं किया है…यह पूरी तरह बेबसी है. सरकार कुछ नहीं करना चाहती.’’ 
गत 6 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने महिला एवं बाल कल्याण मंत्रलय के अधिकारियों को नालसा समेत अन्य के साथ बैठक पर इस मुद्दे को लेकर महिला आयोग की सिफारिशों पर विचार करने को कहा था. पीठ ने सभी को 10 अप्रैल तक यह बताने के लिए कहा था कि किन दो-तीन मसलों पर फिलहाल निर्देश जारी किए जा सकते हैं.

10 अप्रैल को मंत्रालय ने पीठ को बताया कि इसे लेकर 12 और 13 अप्रैल को बैठक होने वाली है. इसके बाद सुनवाई 21 अप्रैल तक के लिए टाल दी गई थी. शुक्रवार को मंत्रालय की ओर से पेश हलफनामे में किसी तरह का सुझाव न होने पर पीठ ने कड़ी आपत्ति जताई. अपने हलफनामे में मंत्रालय ने सरकार द्वारा कई योजनाओं का जिक्र किया था. 

पीठ ने कहा कि आपने कहा था कि 12 व 13 अप्रैल को बैठक है लेकिन आपने बैठक नहीं की और अब स्पष्टीकरण दे रहे हैं. कोर्ट का सख्त रुख देखते हुए मंत्रलय की ओर से पेश वकील ने पीठ से और वक्त मांगा. इस पर पीठ ने मंत्रलय को जवाब देने के लिए चार हफ्ते का वक्त तो दिया लेकिन उसके रवैये पर एक लाख रुपये का जुर्माना कर दिया. कोर्ट पर्यावरण एवं उपभोक्ता संरक्षण फाउंडेशन द्वारा दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा है.

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