नीतीश से मिले स्वामी अग्निवेश, शराबबंदी-महिला आरक्षण को देशभर में करेंगे प्रचारित

पटना (मनोज प्रियदर्शी) : बंधुआ मजदूरी मुक्ति आंदोलन के मुखिया रहे और आर्यसमाज के वरिष्ठ अधिकारी स्वामी अग्निवेश ने सोमवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाक़ात की. इस दौरान स्वामी अग्निवेश ने चम्पारण सत्याग्रह शताब्दी समारोह में प्रमुखता से शरीक होने और शराबबंदी नीति व महिलाओं के लिए आरक्षण नीति को पूरे देश में प्रचारित करने की भी बात कही.

 

मुख्यमंत्री से मुलाक़ात के बाद दोपहर में स्वामी अग्निवेश दानापुर के प्रयाग सेंटर नामक सामाजिक संस्थान भी पहुँचे और संस्थान में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे युवकों को अपने विचारों से अवगत कराया. स्वामी ने धर्मनिरपेक्षता के सवाल पर कहा कि आर्थिक विषमता से सभी प्रकार का आतंकवाद फैलता है और धार्मिक स्थलों पर दान आदि की परंपरा से ही भ्रष्टाचार की शुरूआत होती है. उन्होंने लिंगभेद, जातिधर्म पर सामाजिक जागरूकता को कानून से ज्यादा जरुरी बताया.

स्वामी अग्निवेश ने 37 वर्ष पूर्व शुरू बंधूआ मजदूरी परंपरा को आज भी गरीबी और महिलाओं के मामले में प्रासंगिक बताया और इसकी समाप्ति के लिए बिहार में सामाजिक संगठनों और सरकारी तंत्र द्वारा किये जा रहे कामों की सराहना की.
बता दें कि 37 वर्ष पूर्व हरियाणा के फरीदाबाद शहर से बंधूआ मजदूरी के विरूद्ध स्वामी ने अभियान छेड़ा और बाद में कानून बनाकर सरकार ने इसपर रोक लगाई. तब साल 1979 में स्वामी हरियाणा में शिक्षा मंत्री थे. फरीदाबाद जाकर जब उन्होंने खदानों और इंट भट्ठों पर मजदूरों की दुर्दशा देखी और उन्हें कई प्रदेशों से लाकर बंधूआ बनाकर मजदूरी कराने की व्यथा सुनी तो सबसे पहले अपना मंत्री पद छोड़ दिया था और इसकी समाप्ति तक अपना आंदोलन चलाये रखा.
आज स्वामी ने सतीप्रथा के विरूद्ध छेड़े गये आंदोलन के तथ्यों को साझा करते हुए धार्मिक आतंकवाद की जिम्मेवारी धर्म और व्यवस्था पर डाली. उन्होंने बताया कि राँची के कान्वेंट स्कूल में पढ़ी और मात्र 17 वर्ष की उम्र में ब्याह दी गयी राजस्थान की रूपकुंवर को जबरन धर्म और परंपरा की दुहाई देकर पति के साथ जला दिया गया और सती कहकर लड़की को देवी बताकर 70 लाख चन्दा इकट्ठा किया गया. सती वाले स्थान पर तब धर्म के ठेकेदारों ने चूनरी महोत्सव कराया और चंदे इकठ्ठे किये.
इसके विरुद्ध भी स्वामी ने 20 दिनों तक देशव्यापी आंदोलन चलाया तब जाकर तत्कालीन राजीव गांधी सरकार को क़ानून बनाकर इसे प्रतिबंधित कर मामले में गिरफ्तारियां करनी पड़ी थी.

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