वैश्य समाज में तिलक-दहेज का चलन सबसे अधिक, इसे खत्म कीजिएः सुमो

पटना (नियाज आलम) : वैश्य समाज को राजनीतिक तौर पर मजबूत करने के उद्देश्य से शनिवार को रवींद्र भवन में वैश्य जनप्रतिनिधि सम्मान समारोह और जागृति सम्मेलन का आयोजन किया गया. इस मौके पर पूर्व उप मुख्यनमंत्री सुशील कुमार मोदी और उत्तर प्रदेश की मंत्री अनुपमा जायसवाल ने अलग-अलग क्षेत्रों में विशिष्टी उपलब्धि हासिल करने वाले वैश्य समाज के लोगों को सम्मांनित किया. जनप्रतिनिधियों को सम्मालन स्वरूप शाल किये. इनमें मोतिहारी जिला परिषद अध्यपक्ष प्रियंका जायसवाल, राष्ट्री य महिला आयोग की सदस्य सुषमा साहू, जदयू महिला प्रकोष्ठय की प्रदेश अध्यक्ष कंचन गुप्ता, पिछड़ा वर्ग आयोग के पूर्व सदस्य जगन्ना प्रसाद गुप्ता आदि शामिल थे.

कार्यक्रम में अलग-अलग राजनीतिक दल के वैश्य समाज के नेता एक मंच पर नजर आए. इस दौरान वैश्य समाज जिन्दाबाद और वैस्य एकता जिंदाबाद के नारों से रविन्द्र भवन गूंजता रहा. इस अवसर पर बड़ी संख्या में आए वैश्य समाज के लोगों को भाजपा नेता ने संबोधित करते हुए उन्हें उपजातियों के बंधन से मुक्त होने की नसीहत की. मोदी ने कहा कि आज वैश्य समाज 56 उपजातियों में विभाजित हैं. कोई एक दूसरे जाति में सादी करने को तैयार नहीं होता. उन्होंने कहा कि उपजातीय सीमाओं के बंधन से मुक्त होकर वैश्य समाज को एक होना चाहिए, तभी वे राजनीति में बड़ी ताकत बन सकते हैं.

सुशील मोदी ने कहा कि वह अपने बच्चों की शादी भी उपजाति में करेंगे. इसके साथ ही मोदी ने कहा कि आज वैश्य समाज में सबसे ज्यादा दहेज और तिलक की परंपरा है. इसको खत्म करना होगा. उन्होंने दहेज मुक्त शादी की वकालत भी की. मोदी ने कहा कि समाज को बदलने का काम भी राजनीति से ही संभव है. इस संबंध में वैश्यव जनप्रतिनिधियों को सकारात्मक पहल करनी चाहिए.

‘कतरा-कतरा रहोगे तो सूख जाओगे’

उत्तर प्रदेश सरकार में शिक्षा राज्य मंत्री अनुपमा जायसवाल ने कहा कि इस तरह का आयोजन एक दूसरे को करीब लाने में मदद करता है. उन्होंने कहा कि वैश्यों ने अपनी मेहतन और लगन से समाज बनाने का काम किया है. हम एक होकर ही बड़े लक्ष्यों को हासिल कर सकते हैं. अनुपमा ने कहा कि कतरा-कतरा होकर सूख जाओगे लेकिन यही कतरा अगर समाज के दरिया में मिल जाए तो भारत मां के माथे की बिन्दिया बन जाओगे.

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