मानव श्रृंखला में महिलाओं की भी ऐतिहासिक भागीदारी

लाइव सिटीज डेस्क : 21 जनवरी 2017 बिहार के लिए काफी उत्साह भरा दिन साबित हुआ. बिहारियों के लिए एक ऐतिहासिक लम्हा बने इस मानव श्रृंखला में सभी 38 जिलों के लोग शामिल हुए और तकरीबन दो करोड़ लोग इसका हिस्सा बने. इस कार्यक्रम में हर उम्र के लोग भाग लेते दिखे, खासकर महिलाओं ने इसमें काफी उत्साह से भाग लिया.

मुस्लिम औरतों के बीच दिखे मुस्कान भरे चेहरे

नशाबंदी को लेकर महिलाओं में काफी उत्साह देखने को मिला है. खासकर मुस्लिम औरतें नीतीश के इस फैसले से काफी खुश हैं वजह कि इस्लाम में शराब पीना हराम माना जाता है. इस बारे में गांधी मैदान आई समर जहां ने कहा कि इस पहल से उनकी घर की स्थिति में बहुत सुधार आया है.  यास्मिन बानू ने कहा कि इस अभियान से बिहार की हालत बहुत अच्छी हो जाएगी.

पेशे से वार्ड पार्षद मुमताज़ जहां ने कहा कि मानव श्रृंखला को लेकर वह काफी उत्साहित हैं, नशा बहुत ही खराब बीमारी है. घर उजाड़ कर रख देती है इसलिए नशाबंदी से हालात में कुछ सुधार आएगा. औरतों पर जुर्म-अत्याचार की घटनाएं कम हो जाएंगी.

अब निडर होकर बाहर निकलती हैं बच्चियां

मानव श्रृंखला में भाग लेने आयी लड़कियों के चेहरे पर भी मुस्कान देखने को मिली. उनका कहना रहा की अब वह घर से बाहर निकलने में नहीं डरती हैं. शराबबंदी के बाद घर के हालात में भी काफी सुधार आया है.

वर्षा और मधु ने कहा कि शराबबंदी से वह बेहद खुश है. इससे बिहार में विकास होगा और लड़कियों के साथ मारपीट या बदसलूकी की घटनाएं भी बंद हो जायेंगी. वहीँ नेहा ने यह बताते हुए ख़ुशी जताई कि पहले उसके पापा बहुत दारू पिया करते थे, जिससे घर की हालत बहुत खराब थी. मगर शराबबंदी के बाद उन्होंने पीना छोड़ दिया. नीतीश कुमार के इस फैसले ने उसके जीवन में बहुत अच्छा बदलाव लाया है.

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