प्रभु स्मरण से होती है ज्ञान प्राप्तिः प्रशांत कृष्ण जी महाराज

दरभंगा (कमतौल)  : प्रभु स्मरण से मनुष्य को ज्ञान की प्राप्ति होती है. दुख में सभी भगवान का सुमिरन करते हैं. जबकि सुख में कोई भगवान का सुमिरन नहीं करता है. दुखी व्यक्ति ही सच्ची श्रद्धा से परमात्मा को पूजते हैं.

महाभारत में कुन्ती ने भी भगबान श्रीकृष्ण से दुख की घड़ी में मदद मांगी थी. भीष्म पितामह भी जब शर शैय्या पर लेटे थे तभी उन्होंने कृष्ण से कहा- हे कृष्ण मै अभी बहुत दुखी हूं. आप मेरे नजर के सामने खड़ा रहें तो मैं अपना प्राण त्याग दूंगा.

 ये बात संत बाल व्यास श्री प्रशांत कृष्ण जी महाराज ने मंगलवार को कमतौल के भगत सिंह चौक स्थित आशा देवी भवन में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन मंगलवार को कही.

उन्होंने कहाकि कंठी लेने या चन्दन लगाने से प्रभु स्मरण नही होता है और न ही वृंदावन, अयोध्या आदि तीर्थ धामों पर जाने से भगवान मिलते हैं. सद्गति प्राप्त करने के लिए, सच्ची श्रद्धा से ईश्वर भक्ति की जरूरत है.

जिस मानव में दया, धर्म, भक्ति, कर्म आदि की भावना नहीं है उसे मानव नहीं कहा जा सकता है.

भगवान की सच्चे मन से भक्ति ही हमें अच्छे-बुरे की पहचान बताती है.

bhakti

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