भागवत कथाः लोभ माया का त्याग ही धर्म का रास्ता

दरभंगा (प्रिन्स सिंह ): भागवत कथा की सार्थकता तभी रहेगी जब कथा सुनकर उसको अपने जीवन के व्यवहार में उतारेंगे. साथ ही कथा के एक- एक अश्लोक को अक्छर सह जीवन को खुशहाल, आंनदमय बनाने के लिए अपनाने से ही प्रमात्मा की प्राप्ती होती है.



यह बातें शनिवार को शहर के केएम टैंक स्थित शिव मंदिर में कथा पाठ के छठे दिन कथा वाचक वेदानन्द शास्त्री ने कही.

कथा सुनने आए सैकडों भक्तों को संबोधित करते हुए कथा वाचक श्री शास्त्री ने बताया कि जब तक लोभ- माया का त्याग नहीं करेंगे तब तक धर्म के मुख्य मार्ग से नहीं जुड़ सकते हैं.

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