लाइव सिटीज, जमुई/राजेश : जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर की जन्मभूमि क्षत्रिय कुंडग्राम जन्मस्थान में भगवान महावीर की 2600 साल पुरानी मूर्ति में प्राण प्रतिष्ठा की भव्य तैयारी चल रही है. आठ फरवरी को मूर्ति में प्राण प्रतिष्ठा की तिथि तय है जिसको लेकर भारी संख्या में जैन धर्मावलंबियों व श्रद्धालुओं का वहां आवागमन शुरू हो चुका है.

सूबे के मुखिया नीतीश कुमार का भी भगवान महावीर की मूर्ति में प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर जन्मस्थान जाने का कार्यक्रम लगभग तय है, जिसको लेकर प्रशासनिक तैयारियां भी जोर शोर से चल रही है. हेलीपैड का निर्माण लगभग पूरा होने को है. वहीं सुरक्षा के मद्देनजर हथियार बंद जवानों का बाइक काफिला अभी से ही पूरे क्षेत्र में सक्रिय हो चुका है.
जैनाचार्यों व जैन ग्रंथों के मुताबिक भगवान महावीर की जीवित स्वामी प्रतिमा की शाश्वत प्रतिष्ठा उनके बड़े भाई नंदी वर्धन ने 2600 साल पहले कराई थी. इसके बाद यह पहला अवसर है जब जीवित स्वामी भगवान महावीर की अपनी ही जन्म भूमि पर भव्य मंदिर में प्रतिष्ठा होने जा रहा है.

लिहाजा जैन धर्मावलंबियों के लिए जीवन का यह अंतिम अवसर बना है. इसी भक्तिभाव को समेटे देश-विदेश से श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरु हो गया है. इधर, शाश्वत प्रतिष्ठा में शामिल होने की इच्छा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी जताई है. इस बाबत प्रशासनिक तैयारियां शुरु हो गई है. हैलीपैड बनाने का काम युद्धस्तर पर जारी है. 13 दिवसीय भव्य महोत्सव में कुंडघाट स्थित पहाड़ की तलहटी में च्यवण व दीक्षा कल्याणक मंदिर में प्रतिष्ठा कार्यक्रम संपन्न हो चुका है.

8 फरवरी को भगवान महावीर की प्रतिमा का प्राण-प्रतिष्ठा होना है. सिकंदरा प्रखंड क्षेत्र स्थित लछुआड़ से पहाड़ी रास्ता होते हुए खैरा प्रखंड क्षेत्र स्थित भगवान महावीर का जन्मस्थान क्षत्रिय कुंडग्राम की दुरी लगभग सत्रह किलोमीटर है और यह रास्ता जंगलों से घिरा है. पहाड़ी को काट कर बनाए गए इस रास्ते के मनोरम दृश्य को देखकर जैन धर्मावलंबी व पर्यटक काफी प्रसन्न हैं.

उनका मनाना है कि भगवान महावीर की असीम अनुकम्पा से ही हरे भरे जंगलों से ऐसा मांगलिक कार्य संभव हो पाया है। कई एकड़ में पंडाल बनाए गए हैं. पंडालों में आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की तैयारी अंतिम दौर में है. श्रद्धालुओं के लिए क्षत्रिय कुंड के साथ-साथ लछुआड़ में विशाल जैन धर्मशाला ठिकाना बनेगा. दोनों ही जगह आवासन से लेकर भोजन का व्यापक बंदोबस्त स्थायी रूप से है.

व्यवस्था एवं जन्मभूमि की अलौकिक छटा देख जैन श्रद्घालु अभिभूत दिख रहे हैं. मुंबई, अहमदाबाद, जयपुर, कोलकाता सहित अन्य स्थानों से आए श्रद्धालुओं ने कहा कि जंगल में मंगल है. 2600 साल बाद शाश्वत प्रतिष्ठा का अवसर आया है. इस पुनीत अवसर पर शामिल नहीं हो पाना दुर्भाग्यपूर्ण होगा. बिहार की छवि और नक्सल इलाके को लेकर पूछे गए सवालों का एक ही जवाब सबों के पास जंगल में मंगल होने का होता है.