शारदीय नवरात्र: सिंह पर सवार मां कात्यायनी की पूजा आज, जानें महत्व

लाइव सिटीज डेस्क: नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा का विधान है. माता के इस स्वरूप की उपासना करने से अविवाहित लोगों के विवाह में आ रही परेशानियां दूर हो जाती है. इनकी चार भुजाएं हैं, इनका वाहन सिंह है. ये ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी हैं. ऐसी मान्यता है कि द्वापर युग में गोपियों ने भगवान कृष्ण को पति रूप में पाने के लिए मां कात्यायनी की पूजा की थी.

जानिए पूजा विधि:

मां कात्यायनी की पूजा शुरू करने से पहले हाथ में फूल लेकर या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता. नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥ मंत्र का जाप करें और फूल मां के चरणों में चढ़ा दें. इसके बाद मां को लाल वस्त्र, हल्दी की गांठ, पीले फूल चढ़ाएं और मां की विधिवत पूजा करें. इसके अलावा दुर्गा सप्तशती के 11वें अध्याय का पाठ करें. आखिर में मां की कथा सुनें, आरती उतार कर भोग लगाएं. इनके भोग में शहद का भोग लगाना सबसे उत्तम माना गया है.

पूजा का महत्व
देवी कात्यायनी की पूजा करने से भक्तजनों में शक्ति का संचार होता है और वो इनकी कृपा से अपने दुश्मनों का संहार करने में सक्षम हो पाते हैं. इनकी पूजा से हर तरह के संकट दूर हो जाते हैं. मां कात्यायनी की पूजा से अविवाहित लड़कियों के विवाह के योग बनते हैं और सुयोग्य वर भी मिलता है. देवी कात्यायनी की पूजा से रोग, शोक, संताप, भय आदि का नाश हो जाता है. देवी कात्यायनी की पूजा करने से हर तरह का भय भी दूर हो जाता है.

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