गौरी शंकर महादेव मंदिर : इनके दरबार से कोई खाली हाथ नहीं लौटता

शिवहर (लालबाबू पाण्डेय): प्राचीन काल से शिवहर शिव की धरती मना जाता रहा. शिव कई रुपों में यहां रचे बसे हुए है. शिव के इन्ही रुपों में कस्तुरियां गांव में गौरीशंकर महादेव विराजमान है. शिवहर जिला मुख्यालय से सात किलोमीटर दक्षिण और मुजफ्फरपुर जिला मुख्यालय से पचास किलोमीटर उत्तर शिवहर मुजफ्फरपुर राज्य हाईवे सड़क के किनारे कस्तुरिया गांव के समीप गौरी शंकर महादेव मंदिर में देव स्थल की प्रसिद्धि शिवलिंग रुप में है.

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इस देव स्थल की प्रसिद्धि का आलम यह है कि आसपास के क्षेत्र ही नहीं बल्कि मुजफ्फरपुर के श्रद्धालू यहां पूजा अर्चना को आते हैं. इस देव स्थल के संबंध में कई जनश्रुतियां प्रसिद्ध है. कहा जाता है कि पांडवों के अज्ञातवास के क्रम में भीमसेन ने यहीं रुक कर आराध्य देव शिव की पूजा अर्चना की थी. उसी समय से लोग देव स्थल के रुप में जानने लगे थे. कुछ लोग यह भी कहते है कि यहां घनघोर जंगल हुआ करता था उस जंगल में बाघ शेर सहित बहुत भयानक जंगली जानवर रहते थे. एक चारवाहे अपनी गाय चराते जंगल के अंदर चले गये तो देखा कि एक टीले पर काले शिवलिंग के आकार का कोई वस्तु है जिससे रोशनी निकल रही थी. सभी डर कर भाग गये.

इसकी जानकारी आसपास के लोगों को दी. लोगों ने आकर देखा तो उन्हें साक्षात शिवशंकर की आकृति शिवलिंग में दिखाई दी. लोग वहीं अरघा गाड़ कर पूजा अर्चना शुरु कर दी. जो टीला था उसके चारो तरफ पानी था, जो एक बड़ा तालाब बन गया. कुछ चोरों ने अंदर खजाना होने की बात पर शिवलिंग की खुदाई कर रहे थे तो उन्हें कोई छोर नहीं मिला. एक विशाल नाग निकला जिसे देखकर भागने के दौरान उनके कुदाल शिवलिंग पर गिर गया जिससे शिवलिंग का एक भाग कट गया जो आज भी विराजमान है.

बाद में वहां एक मंदिर का निर्माण कर मां पार्वती की मूर्ति स्थापित कर पूजा अर्चना प्रारंभ कर दिया गया. लोग कहते है कि यहां जिसने भी कोई मनोकामना की और विपत्ति के समय बाबा की गुहार लगाई. उसकी मुराद बाबा ने पूरी कर दी. रविवार और सोमवार को यहां शिवभक्तों की अच्छी खासी भीड़ उमड़ती है. भक्त यहां पूजा अर्चना के साथ जलाभिषेक करते है.

खासकर सावन के महीने में बागमती से जलभरकर कांवरियां पैदल चलते हुए गौरी शंकर महादेव मंदिर आते हैं और जलाभिषेक करते हैं.