रमजान का पहला दिन, पटना में इफ्तार 6 : 35 PM

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पटना/फुलवारी शरीफ (अजीत) : नेकियो और रहमतो की बारिश का पाक व मुकद्दस माहे रमजान का पहला रोजा मुसलमान भाई आज से रखना शुरू कर दिया. शनिवार की रात से राजधानी के तमाम मुस्लिम इलाके में तरावीह  की नमाज भी शुरू हो गयी. रोज़ेदार रमजान के पाक महीने में ज्यादा से ज्यादा नेकियां कमाने के लिए गरीबो की मदद करने में लगे हैं.
तरावीह की नमाज अदा करने के लिए लोग शाम के बाद से ही तैयारियां शुरूर दिए. रमजान के पूरे महीने रात में विशेष नमाज तरावीह की नमाज अदा की जाती है. वहीं इबादतगाहों में सफाई व अन्य इंतजाम किए गये हैं. लोग मस्जिदों और घरो में भी हाफिज कुरआन शरीफ दोहरा रहे हैं. औरतें भी खुदा की इबादत में मशगूल हैं. रमजान की आमद से बाजार में रौनक दिखने लगी है.
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प्रसिद्ध खानकाह-ए-मुजिबिया के प्रबंधक हजरत सय्यद शाह मौलाना मिन्हाजुद्दीन मुजीबी कादरी ने कहा की रमजान का पाक महीना का चाँद शाबान की 29 तारीख को नही देखा गया और शाबान की 30 तारीख को चाँद नजर आये या न आये उसके दूसरे दिन से रमजान का महीना शुरू हो जाता है.
उन्होंने बताया की इस्लाम धर्म में रमजान एक तरह पर्व की तरह होता है जो इस्लामी कैलेन्डर के नौवें महीने में मनाया जाता है. रमजान को सबसे पवित्र महीना माना जाता है. इस पवित्र महीने में मुस्लिम समुदाय के लोग सूर्योदय से लेकर सूर्योस्त तक रोजा (उपवास रहना) रखते हैं. इस दौरान कुछ भी खाया-पिया नहीं जाता है. शाम में तय समय पर एक साथ सभी लोग रोजा खोलते हैं.
रोजा रखने की सबसे बड़ी हिकमत यह है कि इससे परहेजगारी मिलती है. इसलिए तमाम मुसलमानों को चाहिए कि रब का शुक्र अदा करते हुए खुशदिली से रोजा रखें. खूब इबादत करें और इस माहे मुबारक के फैज से मालामाल हों. इमारत शरिया के उप नाजिम मौलाना सुहैल अहमद नदवी ने कहा इशा की नमाज के बाद तरावीह शुरू हो गयी. रमजान का मुबारक महीना 28 मई रविवार से पहले रोजा के साथ शुरू हो गया. उन्होंने बताया की पूरे महीने रमजान की रात में विशेष नमाज अदा की जाती है, जिसे तरावीह कहते हैं. पूरी दुनिया में मुस्लिम समाज इस पाक महीने को पूरी श्रद्धा से साथ मनाते हैं. इस माह में पवित्र कुरान जमीन पर उतारा था.
                             
रोजा रखना फर्ज है लेकिन बीमार लचारों की रोजा न रखने की मिलती है छूट – मौलाना मिन्हाजउद्दीन 
 
प्रसिद्द खानकाह ए मुजिबिया के प्रबंधक हजरत मौलाना सय्यद शाह मो. मिन्हाज मुजीबी कादरी ने रमजान के बारे में बताया की मुस्लिम धर्म में रोजा रखना अनिवार्य माना जाता है लेकिन कुछ लोगों को छूट भी मिलती है. जैसे की बीमार, दूध पिलाने वाली महिला और अबोध बच्चों को इस माह में रोजा रखने की छूट दी जाती है, लेकिन बाद में वो किसी दूसरे महीने में रोजा रख सकते हैं. उन्होंने बताया की रमजान के महीने में कुछ खास बातों पर ध्यान रखने की सलाह दी जाती है.
इफ्तार के बाद ज्यादा से ज्यादा पानी पीना चाहिए. दिनभर में रोजे के बाद शरीर में पानी की काफी कमी हो जाती है. अगर रोजा रखने वाले जानबूझकर कुछ खा लेता है तो उसका रोजा टूट जाता है. लेकिन अगर गलती से कुछ खा लिया तो रोजा नहीं टूटता. रोजे सुबह सहरी खाने के साथ रखा जाता है और इफ्तार के साथ खत्म कर दिया जाता है. रोजे रखने वाले सहरी से पहले जो खाना और पीना होता है वह कर लेते हैं. इसके बाद पूरे दिन कुछ भी खाया पिया नहीं जाता. फिर शाम को सूर्यास्त के बाद इफ्तार किया जाता है. जिसमें रोजा खोला जाता है और उसके बाद कुछ भी खाया पिया जा सकता है. 
 
बाज़ार में रमजान को लेकर बढ़ी रौनक 
रब के बंदे इस मुबारक माह रमजान के इस्तकबाल के लिए तैयार हैं. सहरी और इफ्तार के सामानों की खरीददारी में तेजी आ गई है. सूजी, बेसन, चना, मसाला, तेल, चिप्स, पापड़, मेवे आदि की जमकर खरीदारी हो रही है. बाजारों में इत्र और सेवैयाँ की खुशबु से फिजां महकने लगी है. लोग सेवैयों की खरीदारी करते देखे गये. इतना ही नहीं किसिम किसिम के इत्र, मिस्वाक,रुमाल और टोपी की दुकानों पर भी बढ़ी रौनक बढ़ी हुयी है.
राजधानी के सब्जीबाग़, पटना मार्केट, राजा बाजार, शेखपुरा, समनपूरा, फुलवारी शरीफ,चितकोहरा, खगौल, दानापुर समेत तमाम मुस्लिम इलाकों के बाज़ार भी रमजान महीने के लिए तैयार हो चुके हैं. बाज़ार में खूब रौनक देखने को मिल रही है. इफ्तार के समय रोजा खोलने के लिए सबसे पसंदीदा चीज खजूर भी दुकानों पर रोजेदारो को अपनी और आकर्षित कर रहा है.  खजूर से रोजा तोड़ना सुन्नत मन जाता है यही वजह है कि बाज़ार में खजूरों की ज़्यादा डिमांड पूरे माह रहती है.
लच्छे और सिवइयां भी लोगों की प्राथमिकता में है. घरों में महिलाएं इफ्तार की सामग्री को पकाने के लिए मेहनत करती नजर आई तो मर्द बाजारों से सब्जियां, फल, बेसन, तेल, रिफाइन समेत अन्य किराना सामानों की खरीदारी में मशगुल रहे. हालांकि महंगाई का असर यहां भी नज़र आ रहा है फिर भी लोग अपने क्षमता के मुताबिक अपनी जरूरत के चीजो को खरीदने में लगे रहे. 
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