भारत के साथ विदेश में हैं देवी सरस्वती के 6 सबसे खास मंदिर, इसके साथ जुड़े हैं कई रहस्य

लाइव सिटीज डेस्क : 22 जनवरी यानि आज बसंत पंचमी है. ये पर्व देवी सरस्वती को समर्पित है. इस दिन सरस्वतीजी की पूजा करने से देवी प्रसन्न होती है और उनकी कृपा से बुद्धि का विकास होता है. मां सरस्वती ज्ञान-विज्ञान, कला, संगीत की देवी हैं. बसंत पंचमी पर अज्ञानता को दूर करने और जीवन में नया उत्साह प्राप्त करने के लिए देवी सरस्वती को पूजा जाता है. देवी कृपा से दिमाग तेज चलता है और धन संबंधी कामों में सही निर्णय ले पाते हैं.

इस मौके पर हम आपको आज मां सरस्वती के 6 मंदिरों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनसे कई सारे रहस्य जुड़े हैं. ये मंदिर प्रसिद्ध होने के साथ-साथ अपने साथ कई कहानियां और रहस्य जोड़े हुए हैं.



1. श्री ज्ञान सरस्वती मंदिर (आंध्रप्रदेश)

कथाओं के अनुसार, महाभारत युद्ध के बाद इसी जगह वेदव्यास ने देवी सरस्वती की तपस्या की थीं, जिससे खुश होकर देवी ने उन्हें दर्शन दिए थे. देवी के आदेश पर उन्होंने तीन जगह तीन मुट्ठी रेत रखी. चमत्कार स्वरूप रेत सरस्वती, लक्ष्मी और काली प्रतिमा में बदल गईं.

2. कोट्टयम का सरस्वती मंदिर (केरल)

इसे केरल का एकमात्र ऐसा मंदिर कहा जाता है, जो देवी सरस्वती को समर्पित है. इस मंदिर को दक्षिण मूकाम्बिका के नाम से भी जाना जाता है. यहां देवी सरस्वती की मूर्ति पूर्व दिशा की ओर मुंह करके स्थापित है.

3. पुरा तमन सरस्वती मंदिर (बाली)

देवी सरस्वती को समर्पित यह मंदिर बाली के उबुद में है. यह इंडोनेशिया के प्रमुख हिंदू मंदिरों में से एक है. यहां बना कुंड इस मंदिर का मुख्य आकर्षण है. यहां हर रोज संगीत के कार्यक्रम होते हैं.

4. श्रृंगेरी का मंदिर (कर्नाटक)

कहा जाता है कि यहां का सरस्वती मंदिर श्री शंकर भागावात्पदा ने 7वीं शताब्दी में बनाया गया था. यहां की मूर्ति को लेकर कहा जाता है कि पहले यहां चंदन की मूर्ति थी, बाद में जिसकी जगह सोने की मूर्ति स्थापित कर दी गई.

5. मैहर का शारदा मंदिर (मध्यप्रदेश)

मध्यप्रदेश के सतना जिले त्रिकुटा पहाड़ी पर मां दुर्गा के शारदीय रूप देवी शारदा का मंदिर है. इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि आल्हा और उदल नाम के दो चिरंजीवी हजारों सालों से रोज देवी की पूजा कर रहे हैं.

6. पुष्कर का सरस्वती मंदिर (राजस्थान)

राजस्थान के पुष्कर में विश्व का एकमात्र ब्रह्मा मंदिर है. ब्रह्मा मंदिर से कुछ दूर पहाड़ी पर देवी सरस्वती का मंदिर है. कहते हैं कि देवी सरस्वती ने ही ब्रह्माजी को सिर्फ पुष्कर में उनका मंदिर होने का श्राप दिया था.