सावन की दूसरी सोमवारी पर सूर्य संक्रांति का बन रहा संयोग

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लाइव सिटीज डेस्क : रिमझिम फुहारों के बीच सावन की अल्हड़ मस्ती में शिवालयों में गूँजता बोल बम का जयकारा और भक्ति के जल प्रपात से सराबोर भगवान भोलेनाथ. जी हां कुछ ऐसा ही दृश्य होता है सावन के सोमवारी में. भक्तों के भाव से इतना मनोहर दृश्य होता है की सावन पर्व में शिवालयों में भीड़ होती है. भोलेनाथ को अतिप्रिय सावन मास की दूसरी सोमवारी 17 जुलाई को है. पांच दशक के बाद सावन में महासंयोग बना है. इससे शिव भक्तों में पूरा उत्साह है. भोलेनाथ को सोमवारी पर लाखों श्रद्धालु जलाभिषेक और रूद्राभिषेक करेंगे. राजधानी के तमाम शिवालयों में सावन की दूसरी सोमवारी को लेकर तैयारी जोरों पर है. जलाभिषेक से शिव व शक्ति दोनों होंगे प्रसन्न ज्योतिषाचार्य प्रियेन्दु प्रियदर्शी के अनुसार सावन की इस बार शुरुआत सिद्धि योग में हुई है जबकि समापन सिद्धि योग और आयुष्मान योग में होगा. इन दोनों योग के स्वामी स्वयं शिव है. शिव पुराण और भृगु संहिता के अनुसार सोमवार को भोलेनाथ को जलाभिषेक, पूजन से शिव और शक्ति दोनों प्रसन्न होते हैं.

 

अमृत व जय योग में दूसरी सोमवारी पर जलाभिषेक :-

आचार्य विपेन्द्र झा माधव के अनुसार सावन की दूसरी सोमवारी पर भोलेनाथ का जलाभिषेक अमृत व जय योग में होगा. दूसरी सोमवारी पर भोलेनाथ को आक के फूल पर ईत्र डालकर अर्पण करने और गन्ने के रस से रूद्राभिषेक करने से समस्त ग्रहों से शांति मिलती है. दूसरी सोमवारी पर सूर्य संक्रांति का संयोग ज्योतिषों के अनुसार सावन की दूसरी सोमवारी पर सूर्य संक्रांति का भी संयोग बन रहा है. सूर्य सोमवार को ही कर्क राशि में जाएंगे. सौर मास के हिसाब से सावन की शुरुआत इसी सोमवार से होगी. कर्क के स्वामी चंद्रमा हैं जबकि शिव के सिर पर भी वे विराजमान हैं. जबकि सावन की समाप्ति भी सौर मास के हिसाब से सूर्य के सिंह राशि में संक्रमण की तिथि 17 अगस्त को होगी. कुछ श्रद्धालु चंद्र मास के हिसाब से तो कई सौर मास के अनुसार सावन में पूजा-आराधना करते हैं. नारियल पानी व अनार के रस से करें अभिषेक ज्योतिषाचार्य पीके युग ने शिव पुराण के हवाले से बताया कि सोमवार चंद्रमा का दिन होता है. शिव के मस्तक पर चंद्रमा विराजते हैं. इसलिए सोमवारी को जल, दूध, अनार का रस व कच्चे नारियल के पानी से बाबा भोलेनाथ का अभिषेक करना चाहिए. इससे महादेव प्रसन्न होते हैं और इच्छित वर की प्राप्ति होती है.

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सावन की सोमवारी में पूजा:-

पहली सोमवारी–महामायाधारी की पूजा दूसरी सोमवारी –महाकालेश्वर तीसरी सोमवारी…अर्द्धनारीश्वर चौथी सोमवारी —तंत्रेश्वर पांचवी सोमवारी —त्रयम्बकेशर पूजन से लाभ:- महाकालेश्वर की पूजा से–आरोग्यता की प्राप्ति अर्द्धनारीश्वर की पूजा से –ग्रहों की शांति,मानसिक लाभ तंत्रेश्वर की पूजा से —अकालमृत्यु और भयादि से मुक्ति त्रयम्बकेशर की पूजा से —शरीर में अद्भुत ऊर्जा की प्राप्ति इन चीजों के अर्पण से शिव की कृपा :- कच्चे चावल : धन एवं यश दूर्वा से : लंबी आयु, सौभाग्य भांग: विकारों से मुक्ति गेहूं, ज्वार: संतान, जमीन का लाभ गन्ने का रस: शत्रुनाश, कर्ज से मुक्ति दूध: स्वास्थ्य, सुंदरता घी: आत्मबल, ऊर्जा चंदन: सामाजिक,राजनीतिक प्रतिष्ठा ईत्र से : परिवार में एकता, शांति केशर, शहद: सुखमय जीवन, आरोग्यता, मनोवांक्षित जीवनसाथी.

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