रमजान का दूसरा अशरा शुरू, गुनाहों से मगफिरत की दुआ करें

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लाइव सिटीज डेस्क : रहमतों और बरकतों के महीने माहे रमजान का पहला अशरा ‌‘रहमत’ मंगलवार को पूरा हो गया. आज बुधवार को दूसरा अशरा ‌‘मगफिरत’ शुरू हो गया है. इस अशरे में दो जुमे मिलेंगे. इस अशरे में 14वां मझला रोजा भी होगा. रमजान का एक अशरा पूरा होने के साथ रोजेदारों में दुगुना उत्साह नजर रहा है. इस अशरे को मगफिरत वाला अशरा भी कहा जाता है. उलेमा-ए-दीन फरमाते हैं कि इस अशरे में मुसलमानों को मगफिरत की दुआ करनी चाहिए.

रमजान शरीफ के महीने में तीन अशरे होते हैं. पहला रहमत, दूसरा मगफिरत और तीसरा जहन्नुम से निजात वाला होता है. अल्लाह तआला रमजान में हर मोमिन की दुआ कुबूल फरमाता है. मुसलमानों को चाहिए कि गुनाहों से तौबा और मगफिरत की दुआ करें. उलेमा-ए-दीन फरमाते हैं कि इफ्तार के वक्त की दुआ अल्लाह तआला को पसंद है उसे कुबूल फरमाता है.

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रजमान-उल-मुबारक इस्लामिक कैलेंडर का नौवाँ महीना है. यह रहमतों वाला, बरकतों वाला महीना है, जिसमें अल्लाह शैतान को कैद कर देता है, जिससे वह लोगों की इबादत में खलल न डाले. रमजान-उल-मुबारक में हर नेकी का सवाब 70 गुना कर दिया जाता है.  हर नवाफिल का सवाब सुन्नतों के बराबर और हर सुन्नत का सवाब फर्ज के बराबर कर दिया जाता है. इस तरह सभी फर्ज का सवाब 70 गुना कर दिया जाता है. मतलब यह कि इस माहे-मुबारक में अल्लाह की रहमत खुलकर अपने बन्दों पर बरसती है.

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