ज्योतिष : प्राइवेट क्षेत्रों में नौकरी का योग

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लाइव सिटीज डेस्क : विद्यार्थी जब पढ़ाई लिखाई पूरी करके कंपटीशन की तैयारी करते हैं तो उनके दिमाग में एक बात हमेशा रहती है क्या मैं हमें नौकरी लग जाएगी, ताकि उनकी भी बरसों की मेहनत फलीभूत हो जाए. आजकल नौकरी की समस्या आम होती है. खासकर प्राइवेट क्षेत्र में हमेशा नौकरी में अस्थिरता का माहौल है. बढ़ते कंपटीशन की वजह से प्राइवेट क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों का कैरीयर हमेशा दांव पर लगा रहता है.

आइए हम इसका विवेचन करें “क्या नौकरी मिलेगी”

ज्योतिष में कर्म-क्षेत्र के लिए द्वितीय छठे दसम एवं ग्यारहवे भावों से विवेचना की जाती है. यदि छठे भाव का उपनक्षत्र स्वामी द्वितीय छठे दसम एवं लाभ भाव से जुड़ा हुआ हो तो नौकरी मिलती है, परंतु नौकरी किस समय में मिलेगी इसके लिए कालनिणय बताने के लिए महादशा स्वामी ऊपर दिए गए भावों का कार्यैश हो तो उस ग्रह की दशा अंतर्दशा में नौकरी मिलेगी.

साथ ही साथ यह देखना होगा की गोचर में दशमेश के साथ कैसी युति बना रहा है. यदि छठा और दसवां भाव बलवान हो और लाभ भाव से जुड़ा हुआ हो तो व्यक्ति काफी अच्छी इंक्रीमेंट या सैलरी के साथ नए जॉब को जॉइन करता है.

कभी-कभी जॉब करने के साथ-साथ यह चिंता लगी रहती है कि कहीं हमारा वर्तमान जॉब छूट नहीं जाएगा. इसके लिए ज्योतिष में नियम है कि 18 अथवा 10,000 स्थित ग्रह अथवा छठे भाव का स्वामी या दसवें भाव का स्वामी पंचम या नवम स्थान के ग्रह के अधिकार वाले या पंचमेश अथवा नवमेश के अधिकार वाले नक्षत्र में हो तो इस प्रकार की दशा अंतर्दशा में नौकरी को छोड़ना पड़ता है या छुट्टी है इसके बारे में प्रश्न कुंडली या जन्म कुंडली से विवेचना की जाती है.

प्रश्न कुंडली के दशम का उपनक्षत्र स्वामी पंचम मथुरा नवम का कायैश हो तो नौकरी छुट जाती है. इसके साथ-साथ ही हमें गोचर की विवेचना करनी पड़ती है और चल रही दशा अंतर्दशा को विचार कर निर्णय दिया जाता है.

ज्योतिषाचार्य प्रशांत कुमार संपर्क सूत्र: 8100778339 ई—मेल:[email protected]

कई बारी अभी प्रश्न आता है क्या एक नौकरी रहते हुए दूसरी नौकरी लग जाएगी. इस प्रकार के प्रश्न में छठे भाव का काफी महत्व होता है. छठे भाव का उप नक्षत्र स्वामी बुध ग्रहण से या द्विस्वभाव राशि से संबंधित होने के साथ दशा अंतर्दशा स्वामी बुध जादुई सौ बार असी से संबंधित हो तो उसी प्रकार की अंतर्दशा में एक नौकरी के होते हुए दूसरी नौकरी भी मिल जाती है.

कई बार लोगों के मन में यह बता रहती है कि नौकरी को छोड़कर कोई बिजनेस किया जाए इसके लिए ज्योतिष शास्त्र में नियम है कि जन्म कुंडली में दशम का उपनक्षत्र स्वामी बुद्ध अथवा द्विस्वभाव राशि से संबंधित होने के साथ-साथ सप्तम भाव का कार्य हो तो बिज़नेस की संभावना बढ़ जाती है.

महादशा स्वामी यदि द्वितीय छठे दसम एवं ग्यारहवे भावो का कार्यैश हो तथा सप्तम का भी कार्यैश हो तो उस महादशा में एवं अंतर्दशा में बिजनेस होती है नौकरी के लिए चल रही महादशा अंतर्दशा का भी काफी बड़ा किरदार होता है. यदि सूर्य की महादशा चल रही हो और नौकरी में अड़चने आ रही हो तो उसके लिए प्रत्येक रविवार को सूर्य को जल चढ़ाना चाहिए और उढहुल का फूल चढ़ाना लाभकारी होता है.

यदि चंद्रमा की महादशा चल रही हो और कुंडली में चंद्रमा दुष्ट ग्रहों की युति के साथ हो तो सोमवार को खीर बनाकर गरीबों को दान करना चाहिए. यदि मंगल की अंतर्दशा दशा चल रही हो और नौकरी में अड़चने आ रही हो तो मंगलवार को हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए एवं पीला लड्डू हनुमान जी को अर्पित करना चाहिए.

बुध यदि बुरी स्थिति में हो कुंडली में तो गणेश जी को प्रत्येक बुधवार को दूर्वा चढ़ाना चाहिए और प्रतिदिन ओम गं गणपतए नमः  मंत्र का जाप करना चाहिए. उसी तरह गुरु वक्री हो या शत्रु राशि में बैठा हो तो गुरु की शुभता बढ़ाने के लिए गुरुवार को केले का खासकर पीले केले का दान करना चाहिए.

शुक्र की महादशा अंतर्दशा चल रही हो और शुक्र अस्त हो या शत्रु ग्रह के साथ बैठा हो तो वह ऐसी स्थिति में चावल दान करना उचित माना गया है.

शनि की स्थिति प्रतिकूल होने अर्थात ढैया, कंटक शनि या सनी का साढे साती की स्थिति में सुंदरकांड का पाठ करना अत्यंत लाभकारी माना गया है एवं पीले प्रसाद को चढ़ाना चाहिए.