वट सावित्री व्रत 2017 : जानें महत्व और पूजा विधि

लाइव सिटीज डेस्क : वट सावित्री व्रत हिंदी कैलेंडर में ज्येष्ठ अमावस्या के दौरान मनाया जाता है जो शनि जयंती के साथ मेल खाता है क्योकि इसी दिन शनिदेव जयंती मनाई जाती है. साल 2017 में वट सावित्री व्रत 25 मई को पड़ रहा है.

वट पूर्णिमा पूजा सामग्री लिस्ट :

वट पूजा को रखने के लिए आपको निम्न सामग्री कि आवश्यकता पड़ती है जिसकी मदद से आप वट पूजा रखते है तो जाने इस सामग्री के बारे में :

सत्यवान-सावित्री की मूर्ति (कपड़े की बनी हुई)बाँस का पंखालाल धागाधूपमिट्टी का दीपकघीफूलफल( आम, लीची तथा अन्य फल)कपड़ा – सवा मीटर का दोसिंदूरजल से भरा हुआ पात्ररोली

वट सावित्री व्रत पूजा विधि इन हिंदी :

व्रतधारी को वट व्रत वाले दिन निम्न प्रकार से इस व्रत को रखना चाहिए और व्रत का फल प्राप्त रखना चाहिए.

व्रतधारी को व्रत वाले दिन को गंगा जल से पवित्र करना चाहिए. फिर बांस कि टोकरी में धन्य को भरकर ब्रह्मा जी की मूर्ति उसमे स्थापित करना चाहिए. ब्रह्माजी के दाई ओर सत्यवान की मूर्ति और बाईं ओर सावित्री कि मूर्ति स्थापित करनी चाहिए. उस टोकरी को वट वृक्ष के नीचे रख देना चाहिए. इसके पश्चात सावित्री व सत्यवान का पूजन कर, वट वृक्ष की जड़ में जल अर्पण करना चाहिए. पूजन के समय चने, जल, धूप, मौली, रोली, सूत, का इस्तेमाल करना चाहिए. सूत के धागे को बात के वृक्ष पर लपेटना है फिर उसकी तीन बार परिक्रमा करनी है और सावित्री व सत्यवान कि कथा सुननी चाहिए.

वट सावित्री पूजा का महत्व :

वैट सावित्री व्रत के अनगिनत महिमा का उल्लेख कई हिंदू पुराणों में है जैसे कि ‘भव्य्योर पुरण’ और ‘स्कंद पुराण’. वत सावित्री व्रत पर, भक्त ‘वात’ या बांनी वृक्ष की पूजा करते हैं. हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, बरगद का पेड़ ‘त्रिमुत्रिस’ का प्रतीक है, अर्थात् ब्रह्मा, विष्णु और महेश.

vat-vrat

वृक्ष की जड़ों भगवान ब्रह्मा का प्रतिनिधित्व करते हैं, स्टेम भगवान विष्णु का प्रतीक है और वृक्ष का ऊपरी हिस्सा भगवान शिव है. इसके अलावा पूरे ‘वट’ पेड़ ‘सावित्री’ का प्रतीक है. महिलाओं ने अपने पति की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इस दिन एक पवित्र उपवास का पालन किया और अपने अच्छे भाग्य और जीवन में सफलता के लिए प्रार्थना भी की.

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