शरीर अपना न होने के बाद भी अपना मान लेना माया है: जीयर स्वामी

लाइव सिटीज डेस्क(पुष्कर पांडेय): कथा और सत्संग का प्रचलन आनादि काल से है. मानव जीवन में संस्कृति, संस्कार एवं सभ्यता का सतत सकारात्मक विस्तार के लिये कथा और सत्संग आवश्यक है. उपरोक्त बातें  लक्ष्मी प्रपन्न जीयर स्वामी ने चंदवा में चल रहे चातुर्मास प्रवचन के दरम्यान श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कही. श्री त्रिदंडी स्वामी के परम शिष्य श्री जीयर स्वामी जी महाराज ने चंदवा चातुर्मास महायज्ञ में प्रवचन करते हुए कहा कि मन की तरंग मार लिया बीएस हो गया भजन, बुरी आदत सुधार लिया बीएस हो गया भजन. उन्होंने कहा की सन्त के क्षण को व अन्न के कण को कभी बर्बाद नहीं करना चाहिए. अपने माता—पिता का आदर करना चाहिए.


श्री जीयर स्वामी ने कहा कि किसी वस्तु अथवा स्थान के जानकारी के बिना लगाव संभव नहीं है. तुलसीदास जी ने कहा है कि ‘‘बिन जाने न हो ही प्रीति” मोती का गुण एवं महत्व जाने बिना उससे लगाव नहीं होगा. किसी कथा का महत्व प्रतिपादित करते हुये स्वामी जी ने कहा कि कथा सुनने के बाद भी कुछ लोगों के जीवन में उसका प्रभाव नहीं होता. ऐसी स्थिति में यह कहना कि कथा का महत्व नहीं, बिलकुल गलत है.

उन्होंने कहा कि दवा खाने और डाॅक्टर से इलाज कराने के बावजूद कुछ लोगों की मौत हो जाती है. पुलिस के रहते घटनायें हो जाती हैं, लेकिन इसके कारण चिकित्सा, चिकित्सक और पुलिस की अहमियत समाप्त नहीं होती. दवा नहीं खाने रोग बढ़ेगा और पुलिस के नहीं रहने से अराजकता.

 

इस लिये कथा और सत्संग आवश्यक है. इसके वगैर मानव जीवन आचरणविहीन हो जायेगा फिर मानव और पशु के बीच का अन्तर समाप्त हो जायेगा. बहुत लोग कथा के माध्यम से जीवन बदल लेते हैं. ऐसी स्थिति में मनुष्य को सुरक्षित एवं संस्कारित जीवन के लिये कथा आवश्यक है.

उन्होंने कहा कि जिसमें सम्यक प्रकार से दुनिया का ज्ञान समाहित हो, वही संसार है. संसार का प्राण वेद है और वेद श्रीमद्नारायण का श्वास. श्री जीयर स्वामी ने कहा कि जिस ग्रंथ से जीव, माया तथा आराघ्य की जानकारी हो वही वेद है. माया और शरीर पर संक्षिप्त चर्चा करते हुये उन्होंने कहा कि अपना न होने के बाद भी अपना मान लेना माया है.

शरीर में पृथ्वी तत्व की अधिकता के कारण ही इसे पार्थिव शरीर कहा जाता है. आपको बता दें कि चतुर्मास महायज्ञ को लेकर यहां श्रद्धालुओं की अपार भीड़ उमड़ रही है. विश्व में सबसे बड़ा चंदवा में महायज्ञ का आयोजन हो रहा है.

 

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