लक्ष्मीनिया दुर्गा मंदिर की महिमा है अपरंपार, पढ़े पूरी रिपोर्ट …

samastipur

लाइव सिटीज डेस्क(राजू गुप्ता) : अनुमंडल क्षेत्र के शिवाजीनगर प्रखंड अंतर्गत लक्ष्मीनिया गांव स्थित स्थापित मां दुर्गा मंदिर की महिमा काफी अपरंपार है. यहां हर साल बड़े ही आस्था व श्रद्धा के साथ -साथ काफी धूमधाम से पूजा सम्पन्न किया जाता है. काफी दूर-दूर से लोग यहां माता के दर्शन करने आते है. सच्चे दिल से मांगी गयी लोगों की मनोकामना मैया पूरी भी करती हैं. वहीँ हर वर्ष कि भांति इस वर्ष भी माता के दरबार में बनी पंडाल काफी आकर्षक का केंद्र बना हुआ है. पूजा समिति के व्यवस्थापक जनार्दन चौधरी ने बताया कि कोलकाता से फूलों को लाकर इस बार माता को चढ़ाया गया है.

वहीं राजस्थान से माता के 108 चूड़ियां मंगाई गयी है. जिस एक चूड़ी  की कीमत 1000 रूपया  है. वही माता के दरबार में अयोध्या से आए हुए मुजफ्फरपुर निवासी पंडित मोहन झा के द्वारा नवरात्रा पाठ का आयोजन किया जा रहा है. लगातार 24 घंटे नवरात्रा पाठ होने से पूरा गांव भक्तिमय बना हुआ है. संकल्पकर्ता व्यवस्थापक जनार्दन चौधरी के छोटे पुत्र मीनेश चौधरी ने जानकारी देते हुए बताया कि उक्त मंदिर की स्थापना वर्ष 1982 ई में ग्रामीणों के सहयोग से किया गया था. गांव के ही स्वर्गीय मार्कंडेय चौधरी उर्फ खखुन महंत जी को माता ने सपना दिया था. उक्त गांव में अगर हमारी पूजा आराधना नहीं की गई तो गांव में आए दिन संकट आता रहेगा. स्वप्न आने के बाद स्वर्गीय मारकंडे चौधरी ने अगली सुबह ग्रामीणों की बैठक कर गांव के पोखर किनारे माता की मूर्ति स्थापित कर पूजा करने लगे.

गुरुकुल कोचिंग के संस्थापक सौरभ चौधरी के भाई उक्त गांव निवासी संकल्प करता मिनेश चौधरी ने बताया कि बचपन से ही वह समस्तीपुर में रहा करते थे. वर्ष 2002 ई में मुझे भी स्वप्न में आकर दुर्गा माता ने कहा था कि मेरे परिवार के द्वारा गांव के उक्त मंदिर में आकर पूजा पाठ किया जाए. जिसके बाद ही मेरे परिवार सहित गांव का भला हो सकेगा. जिसके बाद मेरे परिवार के द्वारा 2002 वर्ष से ही लगातार उक्त दुर्गा मंदिर में मेरे परिवार के द्वारा मूर्ति स्थापित कर पूजा अर्चना  होता आ रहा है. इस वर्ष भी 2 सौ किलो की एक ही लड्डू माता को चढ़ाया जाएगा. साथ ही संकल्पकर्ता मीनेश चौधरी ने बताया कि मंदिर के व्यवस्थापक मेरे पिता जनार्दन चौधरी लिवर फेलियोर की अंतिम स्टेज से गुजर रहे थे. जिनको इलाज के लिए मेरे परिवार के द्वारा पी जी आई में भर्ती कराया गया.

जहां उक्त मंदिर के माता की कृपा से ही पी जी आई द्वारा 9 वा ऑर्गन डोनेशन कर मेरे पिताजी का जान बचाई गयी. इधर बीमारी से पीड़ित व्यवस्थापक श्री जनार्दन चौधरी ने बताया कि माता की कृपा से ही मेरा दूसरा जन्म हुआ है. मुझे जिस तरह की बीमारी हो गई थी. पीजीआई के डॉक्टरों ने भी मेरे परिवार को लिवर फेलियोर अंतिम स्टेज से गुजरने की बात कह कर घर ले जा ले जाने की सलाह दी थी लेकिन माता की कृपा होने से उसी दिन चंडीगढ़ की एक पूजा नाम की लड़की उस पी जी आई अस्पताल में भर्ती करायी गयी थी. पुजा को ब्रेन डेड होने के बाद उक्त पूजा लड़की के माँ के सहयोग से मुझे लीवर ट्रांसप्लांट कर पी जी आई अस्पताल के द्वारा मुझे लीवर लगाया गया. जिसके बाद अभी अपने गांव लक्ष्मीनिया में जिंदा अवस्था में मौजूद हूं.

माता की कृपा से ही उस पूजा नाम का लड़की ने ही मुझे एक नई जीवन दान देकर माता की सेवा करने को लेकर लक्ष्मीनिया गांव भेजा है. इसीलिए आज मुझे पूरा विश्वास हो गया कि लक्ष्मीनिया दुर्गा मंदिर की माता की महिमा काफी अपरंपार है. श्री चौधरी ने बताया कि माता की मनोकामना गांव के कई लोगों सहित आसपास के लोगों के ऊपर भी काफी कृपा रहती है. जिसमें समस्तीपुर के एक धनेश्वर यादव ने भी इस मंदिर में आकर मन्नते मांगा था. जो माता की कृपा से पूरा हो गया. वही समस्तीपुर जिले के रूपौली गांव निवासी डॉ अमरनाथ चौधरी को भी कोई संतान नहीं था. उनके द्वारा भी इस मंदिर में संतान को लेकर मन्नतें मांगा गया था. जो माता की कृपा से डॉक्टर अमरनाथ चौधरी को पुत्र की प्राप्ति हुई. गांव के कई युवाओं  को माता की कृपा से  सरकारी नौकरी में भी नौकरी प्राप्त हुआ है. ऐसे कई  माता के भक्त  लोगों के द्वारा मन्नते पूरा होने पर पूजा में सहयोग प्रत्येक वर्ष से करते आ रहे है. ऐसी कई तरह की मन्नतें क्षेत्र के कई लोगों को प्राप्त हो चुका है  उन सभी लोग के द्वारा भी प्रत्येक वर्ष इस मंदिर में आकर माता की सेवा में अपना सहयोग देकर पूजा को सफल बनाते हैं.

व्यवस्थापक श्री चौधरी ने बताया कि मंदिर परिसर के पास मेला का आयोजन, रावण दहन, सहित्य निशुल्क स्वास्थ्य शिविर, एवं कई सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया है. इधर दुर्गा मंदिर परिसर में पूजा अर्चना एवं संध्या देने को लेकर आस पास के सैकड़ों महिलाओं की भीड़ उमड़ी हुई थी. वही पूजा को सफल बनाने में गांव के व्यवस्थापक जनार्दन चौधरी, सौरभ चौधरी, मीनेश चौधरी, पंकज चौधरी, शंभू चौधरी , कामेश्वर चौधरी, रामपुकार चौधरी, राधेश्याम चौधरी, शशिकांत चौधरी, नवीन यादव, लक्ष्मण यादव, संतुन पासवान, हरदेव पासवान, पैक्स अध्यक्ष टुनटुन चौधरी, प्रदीप महतो, सहित दर्जनों युवा अपना योगदान दे रहे हैं.

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