नागपंचमी विशेष : जानें क्यों की जाती है आज के दिन नाग की पूजा

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लाइव सिटीज डेस्क : सावन महीने में शुक्ल पक्ष की पंचमी को नागपंचमी मनाई जाती है. आज 27 जुलाई बृहस्पतिवार को नागपंचमी मनाई जा रही है. नागपंचमी के दिन नाग देवता की पूजा की जाती है. मान्यता है कि इस दिन सांपों की पूजा करने से नाग देवता प्रसन्न होते हैं.

ये है पूजा का समय
नागपंचमी की पूजा सुबह सात बजकर एक मिनट से लेकर 28 जुलाई को सुबह 9 बजकर 16 मिनट तक की जा सकती है. धार्मिक ग्रंथों के मुताबिक अगर किसी जातक की कुंडली में कालसर्प दोष हो तो उसे नागपंचमी के दिन भगवान शिव और नागदेवता की पूजा करनी चाहिए. इस पर्व पर प्रमुख नाग मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है और भक्त नागदेवता के दर्शन व पूजा करते हैं. मान्यता है कि जो भी इस दिन श्रद्धा व भक्ति से नागदेवता का पूजन करता है उसे व उसके परिवार को कभी भी सर्प भय नहीं होता.

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वर्षा ऋतु में नाग पंचमी : वर्षा ऋतु में नाग पंचमी मनाने के पीछे भी ठोस कारण हैं. दरअसल, बरसात में बिलों में पानी भर जाने से सांप बाहर आ जाते हैं. वे आश्रय की खोज में रिहायशी इलाकों, सड़कों, खेतों, बाग-बगीचों और झुरमुटों में आकर छिप जाते हैं. ऐसे में हम सब उन्हें देख कर भयभीत होते हैं. हालांकि सच यह है कि मनुष्य जितना सांपों से डरता है, उतना ही वे भी मनुष्य से डरते हैं. बिना कष्ट पाए या छेडख़ानी के वे आक्रमण नहीं करते. ऐसे में वे हमें कोई नुक्सान न पहुंचाएं, इसके लिए उनकी पूजा करके प्रसन्न करने की प्रथा स्वाभाविक है.

नाग पूजा की परम्परा : नाग पूजा हमारे देश में प्राचीन काल से प्रचलित है. वराह पुराण में इस उत्सव के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया गया है कि आज के ही दिन सृष्टिकर्ता ब्रह्मा ने अपने प्रसाद से शेषनाग को विभूषित किया था. इनके द्वारा पृथ्वी धारण रूप में अमूल्य सेवा करने के अतिरिक्त नाग जाति के और भी महत्वपूर्ण कार्य हैं. समुद्र मंथन के समय वासुकि नाग की रस्सी बनाई गई थी. यही कारण है कि आदि ग्रंथ वेदों में भी नागों को नमस्कार किया गया है.

इस त्योहार के बारे में एक कथा भी है. कथा के अनुसार एक बार किसी गांव में एक किसान रहता था. किसान के एक बेटी और दो बेटे थे. किसान बहुत मेहनती था. अपने परिवार को पालन पोषण के लिए वो खुद हल चलाता था. एक दिन हल जोतते हुए किसान ने गलती से एक नागिन के अंडों को कुचल दिया और सभी अंडे नष्‍ट हो गए.

नागिन खेत में नहीं थी. जब वह लौटी तो बहुत गुस्सा हुई और उसने बदला लेने की ठानी ली. नागिन ने कुछ ही समय बाद किसान के बेटों को डस लिया, जिससे दोनों की मौत हो गई. नागिन किसान की बेटी को भी डसना चाहती थी. लेकिन वो घर पर नहीं थी. अगले दिन नागिन फिर किसान के घर आई तो देखकर बहुत हैरान हुई, क्योंकि किसान की बेटी ने नागिन के सामने एक कटोरी में दूध रख दिया और नागिन से माफी मांगने लगी.

किसान की बेटी के इस रवैये से नागिन बहुत खुश हुई और नागिन ने दोनों भाइयों को जीवित कर दिया. यह घटना श्रावण शुक्ल की पंचमी को हुई थी, यही कारण है कि इस दिन नागों की पूजा की जाती है.

वहीं एक दूसरी कथा के मुताबिक एक राजा की रानी गर्भवती थी. उसने राजा से जंगल से फल लाने की इच्छा व्यक्‍त की. राजा वन से करैली तोड़ने लगा. तभी वहां नाग देवता आ गए और कहा कि तुमने मेरी आज्ञा की बिना करैली क्यों तोड़ी? राजा ने क्षमा मांगी लेकिन नाग देवता ने एक न सुनी. राजा ने नाग देवता से कहा कि मैंने रानी को वचन दिया है, इसलिए वो करैली को घर ले जाना चाहते हैं.

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