बच्चों के नाम रखने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

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लाइव सिटीज डेस्क : अंग्रेजी भाषा के प्रसिद्ध कवि, अभिनेता और नाटककार विलियम शेक्सपीयर ने कहा था, नाम में क्या रखा है, ‘गर गुलाब को हम किसी और नाम से भी पुकारें तो वो ऐसी ही खूबसूरत महक देगा’.



लेकिन, शास्त्रों में वर्णित है कि नाम से ही किसी व्यक्तित्व को प्रभावशाली बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं. त्रेतायुग में जब श्रीराम का नामकरण हुआ तो उस समय रघुकुल के ऋषियों ने उनका नाम रखा. ठीक इसी तरह भगवान श्रीकृष्ण का नाम भी ऋषियों ने काफी विचार करते हुए रखा था.

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इस्लाम धर्म में भी मान्यता है कि व्यक्ति के नाम की तासीर उसके व्यवहार पर पड़ती है इसलिए नाम के अच्छे मतलब होने चाहिए. हम जिस समाज में रहते हैं वह कर्मप्रधान है. यदि आपका नाम बेहतर हो तो आपके कर्म और भाग्य का पिटारा जल्दी खुल सकता है.

यही कारण है कि भारतीय परिवारों में बच्चों के नाम या तो किसी देवी-देवता के नाम पर रखे जाते हैं या फिर कोई अन्य, गौर करने वाली बात यह है कि कोई भी व्यक्ति अपने बच्चों के नाम रावण, कुंभकर्ण, विभीषण, कंस या फिर अन्य दैत्यों के नाम पर नहीं रखता है.

इसलिए जब भी शिशु के जन्म के बाद नामकरण करें. सोच-समझकर ही रखना चाहिए. इसके लिए इन बातों पर गौर करना बेहद जरूरी है. जैसे कि…

शिशु का नामकरण करते समय नाम सरल शब्दों में हो, जिसे उच्चारित करने में समस्या न आएं. अधूरे शब्दों का प्रयोग बिल्कुल न करें.

वर्तमान में दंपत्ति अपने नाम के शब्दों को लेकर एक नया शब्द बनाकर बच्चों के नाम रखते हैं. यह भी एक बेहतर विकल्प है.

कोशिश करें कि शिशु का नाम अक्षर वर्णमाला के पहले या दूसरे अक्षरों में होना चाहिए. बाद के शब्दों का प्रयोग कम से कम करें.

शिशु का नामकरण करते समय उस शब्द का महत्व और अर्थ समझ लेना चाहिए. क्योंकि ऐसे कई शब्द होते हैं जो सुनने और बोलने में भले ही अच्छे लगें, लेकिन उनके अर्थ, अनर्थ भी कर सकते हैं.

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