गलतियों से तौबा करना सिखाता है रमजान : नशुर अजमल 

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फुलवारी शरीफ : हारून नगर निवासी नशुर अजमल ने कहा कि साल के बारह महीनों में इंसान की गलतियों को सुधारने का मौका भी रमजान के रोजे में मिलता है. गलतियों के लिए तौबा करने एवं अच्छाइयों के बदले बरकत पाने के लिए भी इस महीने की इबादत का महत्व है. यह महीना संयम और समर्पण के साथ खुदा की इबादत का महीना माना जाता है जिसमें हर आदमी अपनी रूह को पवित्र करने के साथ अपनी दुनियादारी की हर हरकत को पूरी तत्परता के साथ वश में रखते हुए केवल अल्लाह की इबादत में समर्पित हो जाता है.
जिस खुदा ने आदमी को पैदा किया है उसके लिए सब प्रकार का त्याग मजबूरी नहीं फर्ज बन जाता है. इसीलिए तकवा लाने के लिए पूरे रमजान के महीने रोजे रखे जाते हैं. रमजान के बारे में एक खास बात यह है की रमजान का महीना एक गर्म पत्थर सा मायने रखता है. उस जमाने में अरब में आज से भी भीषण गरमी होती थी. गरमी से तपते पत्थर से नसीहत लेते हुए कि जैसे यह सूरज की किरणों से तप रहा है.
वैसे ही तुम अल्लाह की इबादत में तप कर अपने तन-बदन एवं रूह को पाक-साफ बना लो. रमजान के महीने में की गई खुदा की इबादत बहुत असरदार होती है. इसमें खान-पान सहित अन्य दुनियादारी की आदतों पर संयम कर जिसे अरबी में “सोम” कहा जाता है आदमी अपने शरीर को वश में रखता है साथ ही तराबी और नमाज पढ़ने से बार-बार अल्लाह का जिक्र होता रहता है जिसके द्वारा इंसान की आत्मा (रूह) पाक-साफ होती है.
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