गोपाष्टमी: आज के दिन करते हैं गायों की विशेष पूजा

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प्रतीकात्मक

लाइव सिटीज डेस्कः गोपाष्टमी ब्रज में संस्कृति का एक प्रमुख पर्व है. गायों की रक्षा करने के कारण भगवान श्री कृष्ण जी का अतिप्रिय नाम ‘गोविन्द’ पड़ा. कार्तिक, शुक्ल पक्ष, प्रतिपदा से सप्तमी तक गो-गोप-गोपियों की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत को धारण किया था. 8वें दिन इन्द्रअहंकार रहित होकर भगवान की शरण में आये. कामधेनु ने श्रीकृष्ण का अभिषेक किया और उसी दिन से इनका नाम गोविन्द पड़ा. इसी समय से अष्टमी को गोपोष्टमी का पर्व मनाया जाने लगा, जो कि अब तक चला आ रहा है.

28 अक्टूबर, शनिवार को गोपाष्टमी है. इस दिन गायों की विशेष पूजा का बड़ा महत्व है. शास्त्रों में उल्लेख है कि कार्तिक माह की शुक्लपक्ष की अष्टमी तिथि को गौओं को स्नान कराकर, उन्हें मेहंदी आदि से सजाकर पूजन करना चाहिए.

इसके पश्चात गायों के साथ कुछ दूर तक चलना चाहिए. कहते हैं ऐसा करने से जीवन में उन्नति आती है. गायों को भोजन कराना चाहिए तथा उनकी चरण को मस्तक पर लगाना चाहिए. ऐसा करने से सौभाग्य की वृध्दि होती है.

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इस दिन प्रात: काल गायों को स्नान कराएं तथा गंध-धूप-पुष्प आदि से पूजा करें. ग्वालों का भी पूजन करें और उन्हें भेंट दें.

गायों को घास खिलाएं और उनकी प्रदक्षिणा करें. गोपाष्टमी को सांयकाल गायें चरकर जब वापस आयें तो उस समय भी उनका अभिवादन और पंचोपचार पूजन करें. उनकी चरण रज को माथे पर धारण करें. उससे सौभाग्य की वृद्धि होती है.

पूरे देश में गोपाष्टमी का उत्सव बड़े ही उल्लास से मनाया जाता है. विशेषकर गोशालाओं के लिए यह बड़े ही महत्त्व का उत्सव है.

इस दिन गोशालाओं की संस्था को कुछ दान देना चाहिए. इस प्रकार से सारा दिन गो-चर्चा में ही लगना चाहिए.