जानें, क्या है विजयादशमी के पर्व का महत्व …

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लाइव सिटीज डेस्क : दस दिनों का पर्व दशहरा आज विजयादशमी के पर्व के साथ समाप्त हो जाएगा. पहली पूजा से लेकर अंतिम दिन तक लोग मां की भक्ति में इस तरह लीन हो जाते हैं. विजयादशमी का पर्व पूरे देश में धूम धाम से मनाया जाता है. ऐसे कहना है की इस दिन रावण के दस सिर दस बुराई की प्रतिक है.

आपको बताते चले की इस दिन प्रभु श्री राम ने बुराई को हराने के लिए रावण का वध किया था. आज मां की विदाई के साथ लंकेश का भी पुतला दहन किया जाएगा. इसको लेकर श्रद्धालु खास उत्साह में नज़र आ रहें हैं. रावण के पुतले दहन के साथ हम यह कल्पना करते हैं कि आज सत्य की असत्य पर जीत हो गई और अच्छाई ने बुराई को समाप्त कर दिया. लेकिन क्या वास्तव में ऐसा हो पाता है. सनातन धर्म की यह परम्पराएं केवल आंख मूंद कर इनकी पुनुरुक्ति करने के लिए नहीं हैं. बल्कि यह परम्पराएं तो हमें इनके पीछे छिपे गूढ़ उद्देश्यों को स्मरण रखने एवं उनका अनुपालन करने के लिए बनाई गई हैं.

 

पूरे भारत में दशहरे का त्योहार उत्साह के साथ मनाया जाता है लेकिन विभिन्न राज्यों में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ इस पर्व को मनाएं जाने की प्रथा है.

लोकप्रिय आस्था के अनुसार, भगवान राम ने 10 दिनों तक अपनी पत्नी सीता को बचाने के लिए रावण ये युद्ध किया जिसमें वह पराजित हुआ, रावण ने सीता का अपहरण किया था. भगवान राम की यह जीत बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है. इस त्योहार के दौरान पूरे भारत में अलग-अलग जगहों पर रामलीला और नाटकों का आयोजन किया जाता है. दशहरे से नौ दिन पहले नवरात्रि का पर्व होता है जिसमें लोग देवी दुर्गा की पूजा कर उपवास करते हैं.

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