सीता नवमी विशेष : प्रकृति का स्वरूप माता सीता, सुखदायक है जानकी नवमी व्रत

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लाइव सिटीज डेस्क : हिंदू पौराणिक पवित्र ग्रंथ रामायण की मुख्य नायक और नायिका भगवान श्रीराम और माता सीता है. श्रीराम के तीन भाई थे. लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्‍न. श्रीराम सबसे बड़े पुत्र थे. ठीक इसी तरह माता सीता की तीन बहनें मांडवी, श्रुतकीर्ति और उर्मिला थी. माता सीता सबसे बड़ी थीं.

सीता उपनिषद में वर्णित है कि सीता उपनिषद अथर्ववेद का एक भाग है इस लिए इसे अथर्ववेदीय उपनिषद भी कहते हैं. इस उपनिषद के अनुसार देवगण तथा प्रजापति के मध्य हुए प्रश्नोत्तर में ‘सीता’ को शाश्वत शक्ति का आधार माना गया है. इसमें सीता को प्रकृति का स्वरूप बताया गया है.

वैशाख मास की नवमी तिथि जानकी (सीता जी) नवमी के नाम से प्रसिद्ध है. इस दिन जानकी जी की पूजा अर्चना की जाती है. राजा जनक के यहां सीता जी का प्राकट्य इसी दिन हुआ था. शास्त्रों के अनुसार मिथिला के राजा जनक के कोई संतान नहीं थी, उन्होंने गुरु के आदेशानुसार संतान प्राप्ति के लिए यज्ञ करने की तैयारी शुरू की तो पहले यज्ञशाला बनाने के लिए हल से भूमि को समतल करना आरम्भ किया.

जब राजा जनक हल चला रहे थे तो दोपहर के समय धरती में से एक सुन्दर कन्या प्रकट हुई जो साक्षात लक्ष्मी ही थी. उस दिन नवमी तिथि थी. राजा ने उस बालिका को गोद में उठा कर गुरु जी को दिखाया तो उन्होंने राजा जनक के यहां प्रकट होने से उस कन्या का नाम जानकी रख दिया. इस प्रकार जगदीश्वर की वल्लभा देवेश्वरी लक्ष्मी सम्पूर्ण लोकों की रक्षा के लिए राजा जनक के भवन में ही पली और बड़ी हुई और बाद में इनका विवाह राजा दशरथ के पुत्र मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम जी के साथ हुआ.

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सौभाग्यशाली महिलाएं अपने पति की मंगलकामना तथा उनकी दीर्घायु के लिए इस दिन व्रत भी करती हैं तथा यथासंभव वस्तुओं का दान करके पुण्य की भागी बनती हैं. इस दिन जो महिलाएं व्रत नहीं भी कर सकतीं वे जानकी स्तोत्र, श्री रामचरित मानस और श्री सुन्दरकाण्ड का पाठ करके भी पुण्य कमा सकती हैं.

महिलाएं पुत्र प्राप्ति की कामना से भी इस दिन व्रत करती हैं.