कृष्ण जन्माष्टमी: गृहस्थ के लिए जन्माष्टमी आज, जानिए महत्व और पूजन विधि

लाइव सिटीज डेस्क: भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का त्योहार आज देश भर में खूब धूमधाम और हर्षोल्लास से मनाया जा रहा है. हालांकि इस बार एक नहीं बल्कि दो दिन जन्माष्टमी मनाई जाएगी. आज के दिन गृहस्त वाले व्रत रखकर पूजा करेंगे. तो वहीं शनिवार को बाकी सभी साधु- संत. शायद आपको यह नहीं पता होगा लेकिन यह श्रीकृष्ण का 5246वां जन्मोत्सव है. वैसे, कई क्षेत्रों में और विशेषकर साधु- सन्यासी जन्माष्टमी कल मनाएंगे.

मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में हुआ था. ऐसे में 23 और 24 अगस्त दोनों ही दिन तिथियों को लेकर ऐसा संयोग बन रहा है, जिससे इन दोनों दिन जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जा रहा है.

पूजा की तिथि :

पंचाग को देखें तो अष्टमी तिथि 23 अगस्त को ही सुबह 8.09 बजे से शुरू हो रही है और यह 24 अगस्त को सुबह 8.32 बजे खत्म होगा. वहीं, रोहिणी नक्षत्र 24 अगस्त को तड़के 3.48 बजे से शुरू होगा और ये 25 अगस्त को सुबह 4.17 बजे उतरेगा. कुछ पंडितों के अनुसार रोहिणी नक्षत्र 23 अगस्त को रात 11.56 बजे से ही शुरू हो जाएगा. ऐसे में 23 अगस्त को जन्माष्टमी मनाने को सबसे शुभ माना जा रहा है क्योंकि तब तिथि अष्टमी रहेगी.

जन्‍माष्‍टमी का महत्‍व

श्रीकृष्‍ण जन्‍माष्‍टमी का पूरे भारत वर्ष में विशेष महत्‍व है. यह हिन्‍दुओं के प्रमुख त्‍योहारों में से एक है. ऐसा माना जाता है कि सृष्टि के पालनहार श्री हरि विष्‍णु ने श्रीकृष्‍ण के रूप में आठवां अवतार लिया था. देश के सभी राज्‍य अलग-अलग तरीके से इस महापर्व को मनाते हैं. इस दिन क्‍या बच्‍चे क्‍या बूढ़े सभी अपने आराध्‍य के जन्‍म की खुशी में दिन भर व्रत रखते हैं और कृष्‍ण की महिमा का गुणगान करते हैं. दिन भर घरों और मंदिरों में भजन-कीर्तन चलते रहते हैं. वहीं, मंदिरों में झांकियां निकाली जाती हैं और स्‍कूलों में श्रीकृष्‍ण लीला का मंचन होता है.

जन्‍माष्‍टमी की पूजा विधि

जन्‍माष्‍टमी के दिन भगवान कृष्‍ण की पूजा का विधान है. अगर आप अपने घर में कृष्‍ण जन्‍माष्‍टमी का उत्‍सव मना रहे हैं तो इस तरह भगवान की पूजा करें:
– स्‍नान करने के बाद स्‍वच्‍छ वस्‍त्र धारण करें.
– अब घर के मंदिर में कृष्ण जी या लड्डू गोपाल की मूर्ति को सबसे पहले गंगा जल से स्नान कराएं.
– इसके बाद मूर्ति को दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और केसर के घोल से स्नान कराएं.
– अब शुद्ध जल से स्नान कराएं.
– इसके बाद लड्डू गोपाल को सुंदर वस्‍त्र पहनाएं और उनका श्रृंगार करें.
– रात 12 बजे भोग लगाकर लड्डू गोपाल की पूजन करें और फ‍िर आरती करें.
– अब घर के सभी सदस्‍यों में प्रसाद का वितरण करें.
– अगर आप व्रत कर रहे हैं तो दूसरे दिन नवमी को व्रत का पारण करें.

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