महाशिवरात्रि कल, इन शुभ योगों में होगी शिवजी की पूजा सफल, जानें महत्व

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क: महाश‌िव श‌िवरात्र‌ि को ज्योत‌िषशास्‍त्र में बहुत ही शुभ द‌िन माना गया है. इस साल महाश‌िवरात्र‌ि के द‌िन धनिष्ठा नक्षत्र रहेगा. धनिष्ठा नक्षत्र और सोमवार के योग से शुभ नाम का योग बनता है जो पूरे दिन रहेगा. महाशिवरात्रि पर चारों प्रहर की पूजा करने वाले शिव भक्तों को स्थिर लक्ष्मी और आरोग्यता प्रदान करने वाला है.

भगवान शिव के विवाह का दिन फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को माना जाता है. शिवपुराण में इस चतुर्दशी को महाशिवरात्रि कहा गया है. इस शिवरात्रि में महा इसलिए लगा है क्योंकि शिवरात्रि तो हर महीने में एक बार आती है लेकिन फाल्गुन मास की शिवरात्रि साल में केवल एक बार आती है. महाशिवरात्रि का महत्व इसलिए है क्योंति यह शिव और शक्ति की मिलन की रात है. आध्यात्मिक रूप से इसे प्रकृति और पुरुष के मिलन की रात के रूप में बताया जाता है. इस रात में आध्यात्मिक शक्तियां अधिक जागृत होती हैं इसलिए शास्त्रों में कहा गया है कि इस रात का उपयोग ध्यान, योग, तप और साधना में करना चाहिए. इस वर्ष महाशिवरात्रि 4 मार्च को है.

04 मार्च सोमवार को दिन में 04 बजकर 10 मिनट तक त्रयोदशी तिथि है इसके बाद चतुर्दशी तिथि मिलने के कारण महाशिवरात्रि व्रत पर्व का मान 4 फ़रवरी सोमवार को होगा. फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को शिवरात्रि पर्व मनाया जाता है. माना जाता है कि सृष्टि का प्रारंभ इसी दिन से हुआ. पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन सृष्टि का आरम्भ अग्निलिंग (जो महादेव का विशालकाय स्वरूप है) के उदय से हुआ. अधिक तर लोग यह मान्यता रखते है कि इसी दिन भगवान शिव का विवाह देवि पार्वति के साथ हुआ था. साल में होने वाली 12 शिवरात्रियों में से महाशिवरात्रि की सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है.

शिवरात्रि –

प्रत्येक मास के कृष्णपक्ष की चतुर्दशी शिवरात्रि कहलाती है, लेकिन फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी महाशिवरात्रि कही गई है. इस दिन शिवोपासना भुक्ति एवं मुक्ति दोनों देने वाली मानी गई है, क्योंकि इसी दिन अर्धरात्रि के समय भगवान शिव लिंगरूप में प्रकट हुए थे.

माघकृष्ण चतुर्दश्यामादिदेवो महानिशि। ॥ शिवलिंगतयोद्रूत: कोटिसूर्यसमप्रभ॥

भगवान शिव अर्धरात्रि में शिवलिंग रूप में प्रकट हुए थे, इसलिए शिवरात्रि व्रत में अर्धरात्रि में रहने वाली चतुर्दशी ग्रहण करनी चाहिए. कुछ विद्वान प्रदोष व्यापिनी त्रयोदशी विद्धा चतुर्दशी शिवरात्रि व्रत में ग्रहण करते हैं. नारद संहिता में आया है कि जिस तिथि को अर्धरात्रि में फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी हो, उस दिन शिवरात्रि करने से अश्वमेध यज्ञ का फल मिलता है. जिस दिन प्रदोष व अर्धरात्रि में चतुर्दशी हो, वह अति पुण्यदायिनी कही गई है. इस बार 6 मार्च को शिवरात्रि प्रदोष व अर्धरात्रि दोनों में विद्यमान रहेगी.

ईशान संहिता के अनुसार इस दिन ज्योतिर्लिग का प्रादुर्भाव हुआ, जिससे शक्तिस्वरूपा पार्वती ने मानवी सृष्टि का मार्ग प्रशस्त किया. फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को ही महाशिवरात्रि मनाने के पीछे कारण है कि इस दिन क्षीण चंद्रमा के माध्यम से पृथ्वी पर अलौकिक लयात्मक शक्तियां आती हैं, जो जीवनीशक्ति में वृद्धि करती हैं. यद्यपि चतुर्दशी का चंद्रमा क्षीण रहता है, लेकिन शिवस्वरूप महामृत्युंजय दिव्यपुंज महाकाल आसुरी शक्तियों का नाश कर देते हैं. मारक या अनिष्ट की आशंका में महामृत्युंजय शिव की आराधना ग्रहयोगों के आधार पर बताई जाती है. बारह राशियां, बारह ज्योतिर्लिगों की आराधना या दर्शन मात्र से सकारात्मक फलदायिनी हो जाती है.

यह काल वसंत ऋतु के वैभव के प्रकाशन का काल है. ऋतु परिवर्तन के साथ मन भी उल्लास व उमंगों से भरा होता है. यही काल कामदेव के विकास का है और कामजनित भावनाओं पर अंकुश भगवद् आराधना से ही संभव हो सकता है. भगवान शिव तो स्वयं काम निहंता हैं, अत: इस समय उनकी आराधना ही सर्वश्रेष्ठ है.

महाशिवरात्रि

महाशिवरात्रि हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है. भगवान शिव का यह प्रमुख पर्व फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी को शिवरात्रि पर्व मनाया जाता है. माता पार्वती की पति रूप के महादेव शिव को पाने के लिये की गई तपस्या का फल महाशिवरात्रि है. इसी दिन माता पार्वती और शिव विवाह के पवित्र सूत्र में बंधे. शादी में जिन 7 वचनों का वादा वर वधु आपस में करते है उसका कारण शिव पार्वती विवाह है. महादेव शिव का जन्म उलेखन कुछ ही ग्रंथो में मिलता है. परंतु शिव अजन्मा है उनका जन्म या अवतार नहीं हुआ. महाशिवरात्रि को भारत वर्ष में काफी धूम धाम से मनाया जाता है.

शिव पुराण-

शिव पुराण में देवो के देव महादेव अर्थात् महाकाल के बारे में विस्तार से बताया गया है. शिव पुराण में शिव लीलाओ और उनके जीवन की सभी घटनाओ के बारे में उल्लेख किया गया है. शिव पुराण में प्रमुख रूप से 12 सहिंताये है. महादेव ने एक बार इस दुनिया को बचने के लिए विष का पान करना पड़ा था, और उस महाविनाशक विष को अपने कंठ में धारण किया था. इससे वजह से उन्हें नीलकंठ के नाम से भी जाना जाता है.

शिव पुराण के अनुसार, महाशिवरात्रि पूजा में छह वस्तुओं को अवश्य शामिल करना चाहिए:

शिव लिंग का पानी, दूध और शहद के साथ अभिषेक।बेर या बेल के पत्ते जो आत्मा की शुद्धि का प्रतिनिधित्व करते हैं;

सिंदूर का पेस्ट स्नान के बाद शिव लिंग को लगाया जाता है. यह पुण्य का प्रतिनिधित्व करता है;

फल, जो दीर्घायु और इच्छाओं की संतुष्टि को दर्शाते हैं;

जलती धूप, धन, उपज (अनाज)

दीपक जो ज्ञान की प्राप्ति के लिए अनुकूल है-

और पान के पत्ते जो सांसारिक सुखों के साथ संतोष अंकन करते हैं.

महाशिवरात्रि का महत्व

भगवान शिव चतुर्दशी तिथि के स्वामी हैं. ऐसे में ज्योतिष शास्त्रों में इसे शुभफलदायी कहा गया है. वैसे तो शिवरात्रि हर महीने आती है, लेकिन फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को महाशिवरात्रि कहा गया है. इस समय तक सूर्यदेव भी उत्तरायण हो जाते हैं और ऋतु परिवर्तन भी होता है. ऐसे में इस शुभ समय में महाशिवरात्रि पर शिव पूजन से इच्छित फल की प्राप्ति होती है. ज्योतिष के अनुसार चतुर्दशी तिथि को चंद्रमा अपनी कमजोर स्थिति में आ जाते हैं. चन्द्रमा को शिव जी ने मस्तक पर धारण कर रखा है. ऐसे में शिव पूजन से व्यक्ति का चंद्र मजबूत होता है.

शिव पूजन विधि

सबसे पहले मिट्टी के बर्तन में पानी भरकर, उसमें बेलपत्र,  धतूरे के पुष्प, चावल आदि डालकर शिवलिंग पर चढ़ायें.

अगर घर के आस-पास शिवालय न हो, तो शुद्ध गीली मिट्टी से ही शिवलिंग बनाकर पूजा कर सकते हैं.

इस दिन रात्रि जागरण और शिवपुराण का पाठ सुनने का महत्व है.

अगले दिन सवेरे जौ, तिल, खीर और बेलपत्र का हवन कर व्रत समाप्त किया जाता है.

दिन के चौथे प्रहर में शिवालय में जाकर शिवलिंग पर जलाभिषेक कर बेलपत्र चढ़ाने से भोलेनाथ की कृपा प्राप्त होती है.

रात्रि के चौथे प्रहर में ब्राह्मणों के मुख से वेदमंत्र संहिता, रुद्राष्टाध्यायी पाठ श्रवण करना चाहिए.

राशिफल-

मेष : मेष राशि के स्वामी मंगल हैं. इनके लिए लाल रंग शुभ माना जाता है. लाल चंदन व लाल रंग के पुष्प यदि भगवान भोलेनाथ को अर्पित करें तो यह बहुत ही पुण्य फलदायी रहता है. यदि पूजा के समय नागेश्वराय नम: मंत्र का जाप भी किया जाए तो भगवान शिवशंकर मन की मुराद जल्द पूरी करते हैं.

वृषभ : वृषभ तो भगवान शिव के वाहन भी हैं. आपके राशि स्वामी शुक्र माने जाते हैं. सफेद रंग आपके लिए शुभ है. वृषभ जातकों को भगवान शिव की पूजा चमेली के फूलों से करनी चाहिए. साथ ही अपने कष्टों के निवारण व अपेक्षित लाभ प्राप्ति के लिए शिव रुद्राष्टक का पाठ भी करना चाहिए.

मिथुन : मिथुन राशि के स्वामी बुध माने जाते हैं. मिथुन जातक भगवान शिव को धतूरा, भांग अर्पित कर सकते हैं. साथ ही पंचाक्षरी मंत्र ॐ नम: शिवाय का जाप करना भी आपके लिए लाभकारी रहेगा.

कर्क : कर्क राशि के स्वामी चंद्रमा हैं जिन्हें भगवान शिव ने अपनी जटाओं में धारण कर रखा है. कर्क जातकों को शिवलिंग का अभिषेक भांग मिश्रित दूध से करना चाहिए. रूद्रष्टाध्यायी का पाठ आपके कष्टों का हरण करने वाला हो सकता है.

सिंह : सिंह राशि के स्वामी सूर्य हैं. भगवान शिव की आराधना में सिंह जातकों को कनेर के लाल रंग के पुष्प चढ़ाने चाहिए. इसके साथ ही शिवालय में भगवान श्री शिव चालीसा का पाठ भी करना चाहिए. यह पूजन आपके लिए अति लाभकारी सिद्ध हो सकती है.

कन्या :  कन्या के स्वामी बुध माने जाते हैं. कन्या जातकों को भगवान शिवजी की पूजा में बेलपत्र, धतूरा, भांग आदि सामग्री शिवलिंग पर अर्पित करनी चाहिए. इसके साथ ही पंचाक्षरी मंत्र का जाप आपकी मनोकामनाओं को पूरी कर सकता है.

तुला : तुला राशि के स्वामी शुक्र माने जाते हैं. आपको मिश्री युक्त दूध से शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए. साथ ही शिव के सहस्रनामों का जाप करना भी आपकी राशि के अनुसार शुभ फलदायी माना जाता है.

वृश्चिक : वृश्चिक राशि के स्वामी मंगल हैं. भोले भंडारी की पूजा आपको गुलाब के फूलों व बिल्वपत्र की जड़ से करनी चाहिए. इस दिन रूद्राष्टक का पाठ करने से आपकी राशि के अनुसार सौभाग्यशाली परिणाम मिलने लगते हैं.

धनु : बृहस्पति को धनु राशि का स्वामी माना जाता है. इन्हें पीला रंग प्रिय होता है. धनु राशि वाले जातकों को शिवरात्रि पर प्रात:काल उठकर भगवान शिव की पूजा पीले रंग के फूलों से करनी चाहिए. प्रसाद के रूप में खीर का भोग लगाना चाहिए. आपके लिए शिवाष्टक का पाठ कष्टों का नाश करने वाला है.

मकर : मकर शनि की राशि मानी जाती है. धतूरा, भांग, अष्टगंध आदि से भगवान शिव की पूजा आपके लिए जीवन में शांति और समृद्धि लाने वाली होगी. इसके साथ ही आपको पार्वतीनाथाय नम: का जाप भी करना चाहिए.

कुंभ : कुंभ राशि के स्वामी भी शनि ही हैं. कुंभ जातकों को गन्ने के रस से शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए. साथ ही धन लाभ पाने के लिये शिवाष्टक का पाठ आपको करना चाहिए. जल्द ही अच्छे परिणाम मिल सकते हैं.

मीन : मीन राशि के स्वामी बृहस्पति हैं. मीन जातकों को पंचामृत, दही, दूध एवं पीले रंग के फूल शिवलिंग पर अर्पित करने चाहिए. घर में सुख समृद्धि व धनधान्य में वृद्धि के लिए पंचाक्षरी मंत्र नम: शिवाय का चंदन की माला से 108 बार जाप करना चाहिए.

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