इस बार 14 नहीं 15 को है मकर संक्रांति, जानें शुभ मुहूर्त और महत्व

लाइव सिटीज, सेंट्रल डेस्क: पौष शुक्ल पक्ष सोमवार 14 जनवरी को अष्टमी तिथि रात्रि 07:23 है. इसके उपरांत नवमी तिथि 15 तारीख की रात 07:29 मिनट तक है. साथ ही अश्विनी नक्षत्र व साध्य योग है. इस दिन भौमाश्विनी सर्वार्थअमृतसिद्धि योग दिन में 09:25 तक है. इस बार सूर्य का मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी (सोमवार) को रात्रि 2.09 बजे (पाश्चात्य मत से 15 जनवरी, मंगलवार को) हो रहा है.

ज्योतिसाचार्य श्रीपति त्रिपाठी ने बताया कि इसका पुण्यकाल 15 जनवरी की सुबह से ही दिनभर रहेगा. यहीं से भगवान भास्कर उत्तरायण होते हैं, जिससे देवताओं के दिन का प्रारम्भ माना जाता है. यहीं से हमारे शुभ कार्य शुरू भी हो जाते हैं. पुनः यहीं से हमारा सौर माघ मास भी आरम्भ हो जाता है. शिशिर ऋतु का भी शुभागमन काल यही से है. शास्त्र का स्थापित नियम है कि मकर राशि की सूर्य संक्रांति यदि रात में किसी भी समय लगे तो उसका पुण्य काल दूसरे दिन होता है. अतः मकर संक्रांति खिचड़ी का पवित्र पर्व 15 जनवरी मंगलवार को मानाया जाएगा.

यह पर्व पूरे देश में विभिन्न स्वरूपों एवं परम्पराओं के साथ मनाया जाएगा. मकर संक्रांति का एक लौकिक नाम खिचड़ी भी है. लोग मंगलवार को खिचड़ी बनाना एवं खाना शुभ नहीं मानते हैं. लेकिन यहां दिन की अपेक्षा संक्रान्ति की महत्ता अधिक है, इसलिए खिचड़ी पर्व मनाने में कोई हानि नहीं है.

रात्रौ तु प्रदोषे निशीथे वा मकरसंक्रमे

माधवमते द्वितीयदिन एव पुण्यम !!

यधस्तमयवेलायां मकरं याति भास्कर: !!

प्रदोषे वार्द्धरात्रे वा स्नानं दानं परेहनि !!

जब सूर्यास्त के पहले ही संक्रांति होती है तो उभयमत में पूर्व ही पुण्यकाल होता है. रात्रि में तो प्रदोष या निशीथ (रात्रि) में मकर की संक्रांति में दूसरे दिन ही पुण्यकाल होता है.

वृद्धगार्ग्य का वचन है कि –

आसन्न संक्रमं पुण्यं दिवार्ध स्नानदानयोः!!

यदि प्रदोष के समय पहली रात में या अर्ध रात्रि में मकर राशि पर सूर्य जाता है तो स्नान और दान दूसरे दिन करें. “मकर संक्रांति” के दिन पवित्र नदियों में तिल का उबटन लगा कर स्नान करना विशेष लाभप्रद रहता है. “मकर संक्रांति” स्नान का पुण्य काल दिनांक 14 जनवरी 2019 की अर्द्धरात्रि 2 बजकर 20 मिनट से दिनांक 15 जनवरी 2019 को प्रात: काल से लेकर सायंकाल 6 बजकर 20 मिनट तक रहेगा.

तिलदान का विशेष महत्व –

“मकर-संक्रांति के दिन तिल से बनी हुई वस्तुओं एवं ताम्र पात्रों का दान देना श्रेयस्कर रहेगा.

तीर्थ स्थान

शास्त्रों के अनुसार इस दिन प्रात: काल जल्दी उठकर उबटन लगाकर किसी भी तीर्थ स्थान के जल से स्नान करना चाहिए. अगर तीर्थ का जल उपलब्ध ना हो तो आप दूध या दही से भी स्थान कर सकते हैं.

आराध्य देव

स्नान करने के उपरांत अपने आराध्य देव या देवी की उपासना कर उनसे आशीर्वाद प्राप्त करें.

पुण्यकाल

इस दिन पुण्यकाल में दांत मांजने, बाल धोने, फसल काटने, गाय या भैंस का दूध निकालने जैसा काम नहीं करना चाहिए.

दान करने का भी विशेष महत्व

इन सबके अलावा मकर संक्रांति के दिन दान करने का भी विशेष महत्व है. विशेष तौर पर इस दिन तिल, गुड़, खिचड़ी और चावल का दान किया जाता है.

राशि

मकर संक्रांति का आपकी राशि पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है, इसलिए यह बहुत जरूरी है कि आपके द्वारा किया जाने वाला दान आपकी राशि से जुड़ा हो. चलिए जानते हैं राशि के अनुसार आपके लिए कौन सा दान फलदायी साबित होगा.

मेष राशि

मेष राशि के लोगों को गुड़, मूंगफली, तिल का दान देना चाहिए वहीं वृषभ राशि के लोगों के लिए सफेद कपड़े और तिल का दान करना उपयुक्त रहेगा.

मिथुन राशि

मिथुन राशि के लोग मूंग दाल, चावल और कंबल का दान करें, वहीं कर्क राशि के लोगों के लिए चांदी, चावल और सफेद वस्त्र का दान देना उचित है.

सिंह राशि

सिंह राशि के लोगों को तांबा और सोने के मोती दान करने चाहिए, वहीं कन्या राशि के लोगों को चावल, हरे मूंग या हरे कपड़े का दान देना चाहिए.

तुला राशि

तुला राशि के जातकों को हीरे, चीनी या कंबल का देना चाहिए और वृश्चिक राशि के लोगों को मूंगा, लाल कपड़ा और तिल दान करना चाहिए.

कुंभ राशि

कुंभ राशि के जातकों के लिए काला कपड़ा, काली उड़द, खिचड़ी और तिल का दान चाहिए, वहीं मीन राशि के लोगों को रेशमी कपड़ा, चने की दाल, चावल और तिल दान देने चाहिए.

मोक्ष की प्राप्ति

हिन्दू धर्म में उत्तरायन का महत्व बहुत ज्यादा है. यह भी माना जाता है कि जिस व्यक्ति की मृत्यु मकर संक्रांति के दिन होती है उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है. यही वजह है कि इस दिन पूरे तन्मयता के साथ मनाया जाना चाहिए.

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