ज्योतिष शास्त्र के अनुसार वारिस योग

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लाइव सिटीज डेस्क : व्यक्ति जब स्कूल कॉलेजों की पढ़ाई पूरी करके, अपनी आजीविका की व्यवस्था करके गृहस्थ जीवन कदम रखता यानि उसकी शादी हो जाती है तो उसके बाद प्रश्न उठता है उसके वारिस की. यानी उसका उत्तराधिकारी कौन होगा. उसकी वंश परंपरा को आगे कौन बढ़ाएगा. संतान सुख की प्राप्ति कब होगी. संतान होगा तो वह लड़की होगी या लड़का होगा. गर्भवती की डिलीवरी नॉर्मल होगी या सिजेरियन होगा. इन सभी प्रश्नों का ज्योतिष में गणना एवं आकलन किया जाता है.

ज्योतिष में संतान के लिए मुख्यतया पंचम भाव, द्वितीय एवं 11वें भाव को कारक माना गया है. साथ ही साथ गुरू एवं शुक्र की भी प्राथमिकता दी गई है. शुक्र मानव शरीर में हारमोनल परिवर्तन को दिखाता है एवं सेक्स संबंधी क्रियाओं का भी कारक शुक्र ग्रह को ही माना गया है. गुरु की प्रबल स्थिति होने पर एवं पंचम भाव में स्थित ग्रह एवं पंचमेश की स्थिति शुभ हो तो व्यक्ति के जीवन में या विवाहोपरांत संतान संबंधी या वारिस से संबंधित चिंता नहीं करनी होती है, परंतु पंचम भाव में दुष्ट या प्रतिकूल ग्रहों की उपस्थिति शनि चंद्र की उपस्थिति केतु से दृष्टि एवं पंचम भाव का राहु केतु के साथ दृष्टिगत होना या संजोग करना कष्टकारी माना गया है.

जिन स्त्रियों की कुंडली में अथवा पुरुष की कुंडली में ऐसी स्थिति हो तो विवाह के बाद संतान होने में विलंब होती है और एक दो या तीन एबॉर्शन या गर्भपात की स्थिति भी आती है. साथ ही साथ नवांश कुंडली में भी पंचम भाव के नवांश की स्थिति देखना अनिवार्य है. यदि नवांश कुंडली में भी ग्रहों की स्थिति ठीक न हो और लग्न कुंडली में पंचम का उपनक्षत्र स्वामी, छठे, आठवें एवं बारहवें भाव से योग करता है तो संतानहीनता का सामना करना पड़ता है. प्रश्न कुंडली या जन्म कुंडली में पंचम भाव का उपनक्षत्र स्वामी द्वितीय, पंचम या 11वें में से किसी भाव का कार्येश हो तो संतान होगी.

ज्योतिषाचार्य प्रशांत कुमार संपर्क सूत्र: 8100778339                ई—मेल:[email protected]

द्वितीय पंचम और ग्यारहवें भावों के कार्येश से ग्रहों की दशा अंतर्दशा में संतान होती है. यदि पंचम का उपनक्षत्र स्वामी चतुर्थ का सफल कार्येश हो तो गर्भपात या संतान से अनबन आदि वाली स्थिति रहती है. कई बार प्रश्न यह आता है कि क्या डिलीवरी ठीक या सरलता से होगी. इसका उत्तर हम इन तरीकों से देखते हैं यदि प्रश्न कुंडली में पंचम का उपनक्षत्र स्वामी बुध, शुक्र, गुरु, चंद्रमा इनमें से कोई ग्रह हो और मंगल से संबंधित न हो साथ ही अष्टम से संबंधित न हो तो नार्मल डिलीवरी होगी, परंतु पंचम का उपनक्षत्र स्वामी मंगल से संबंधित हो या अष्टम का कार्येश हो तो ऑपरेशन या सीजेरियन का योग बनता है.

कई बार प्रश्न आता है क्या मुझे मनचाहा संतान सुख प्रापत् हो पाएगा. यानि इच्छानुसार बेटा या बेटी का जन्म होगा. इसका नियम यह है कि पंचम और लाभ दोनों भावों के उपनक्षत्र स्वामी वक्रीय न हो मार्गी हो एवं मार्गी ग्रह के नक्षत्र में हो और द्विस्वभाव राशि में न हो तो मनचाही संतान का योग बनता है. साथ ही पंचम का उपनक्षत्र स्वामी द्वितीय पंचम या लाभ भाव का कार्येश हो और स्थिर राशि में हो तो मनचाही संतान होती है. संतुलन की स्थिति जानने के लिए पुरुष एवं स्त्री दोनों की कुंडली पर विचार करना जरूरी होता है.

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किसी एक की कुंडली के द्वारा संतान की स्थिति बताना गलत होता है. दोनों कुंडलियों में महादशा अंतर्दशा एवं गोचर की स्थिति साथ ही साथ भावों की स्थिति एवं ग्रहों की डिग्री यानी झुकाव को देखना आवश्यक होता है. यदि किसी पाप ग्रह की दशा अंतर्दशा या पंचम भाव श्री संजोग की स्थिति है तो उसका उचित दान जप पूजा एवं संतान गोपाल स्रोत पुस्तक पढ़ कर ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव को दूर किया जाता है.