अज़ान या धार्मिक मंत्र, शोर नहीं सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह

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लाइव सिटीज डेस्क : मशहूर पार्श्व गायक सोनू निगम इन दिनों ‘अजान’ को लेकर किए ट्वीट के कारण चर्चा में हैं. इस मामले में सोनू निगम ने अपना सिर भी मुंडवा लिया है. हाल ही में सोनू ने ट्विटर पर एक वीडियो शेयर किया. इसमें तड़के की गई ‘अजान’ की रिकॉर्डिंग है.

इस बात से इतर, इस पूरे मामले को यदि एक दूसरे पहलू में देखा जाए तो ‘अजान’ वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह करती है. अजान ही नहीं बल्कि, हिंदू वैदिक मंत्र, जैन धर्म का णमोकार मंत्र, सिख धर्म का ओंकार मंत्र और बौद्ध धर्म के लोगों द्वारा उच्चारित किए जाने वाले मंत्र ये सभी वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह करते हैं.

लेकिन, यह सकारात्मक ऊर्जा तभी महसूस होगी, जब हम सभी धर्मों को एक नजर से देखें. हम एक ऐसे देश में रहते हैं, जहां सभी धर्मों को सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है.

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अज़ान की शुरुआत

मदीना तैयबा में जब नमाज़ बाजमात देने के लिए मस्जिद बनाई गई तो जरूरत महसूस हुई कि लोगों को जमात (इकटठे नमाज पढने) का समय करीब होने की सूचना देने का कोई तरीका तय किया जाए. रसूलुल्‍लाह ने जब इस बारे में सहाबा इकराम (धर्म मित्रों) से परामर्श किया तो इस बारे में चार प्रस्ताव सामने आए-

-प्रार्थना के समय कोई झंडा बुलंद किया जाए.

-किसी उच्च स्थान पर आग जला दी जाए.

-यहूदियों की तरह बिगुल बजाया जाए.

-ईसाइयों की तरह घंटियाँ बजाई जाए.

उपरोक्त सभी प्रस्ताव आंहज़रत को गैर मुस्लिमों से मिलते जुलते होने के कारण पसंद नहीं आए. इस समस्या में आंहज़रत और सहाबा इकराम चिंतित थे कि उसी रात एक अंसारी सहाबी हज़रत अब्दुल्लाह बिन ज़ैद ने स्वप्न में देखा कि किसी ने उन्हें अज़ान और इक़ामत के शब्द सिखाए हैं. उन्होंने सुबह सवेरे आंहज़रत सेवा में हाज़िर होकर अपना सपना बताया तो आंहज़रत ने इसे पसंद किया और उस सपने को अल्लाह की ओर से सच्चा सपना बताया.

आंहज़रत ने हज़रत अब्दुल्लाह बिन ज़ैद से कहा कि तुम हज़रत बिलाल को अज़ान इन शब्‍दों में पढने की हिदायत कर दो, उनकी आवाज़ बुलंद है इसलिए वह हर नमाज़ के लिए इसी तरह अज़ान दिया करेंगे. इसलिए उसी दिन से अज़ान की प्रणाली स्थापित हुई और इस तरह हज़रत बिलाल रज़ियल्लाहु अन्हु इस्लाम के पहले अज़ान देने वाले के रूप में प्रसिद्ध हुए.

अल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर
अल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर

ईश्वर सब से महान है

अश-हदू अल्ला-इलाहा इल्लल्लाह
अश-हदू अल्ला-इलाहा इल्लल्लाह

मैं वचन देता हूं कि ईश्वर के अतिरिक्त कोई दूसरा उपासना के योग्य नहीं

अश-हदू अन्ना मुहम्मदर रसूलुल्लाह
अश-हदू अन्ना मुहम्मदर रसूलुल्लाह

मैं वचन देता हूं कि मुहम्मद सल्ल. ईश्वर के अन्तिम संदेष्टा हैं
ह्या ‘अलास्सलाह, ह्या ‘अलास्सलाह आओ नमाज़ की ओर
हया ‘अलल फलाह, हया ‘अलल फलाह आओ सफलता की ओर

अस्‍सलातु खैरूं मिनन नउम
अस्‍सलातु खैरूं मिनन नउम

नमाज़ सोने से उत्तम है* (यह मात्र सुबह की नमाज़ में कहे जाते हैं)
अल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर ईश्वर सब से महान है
ला-इलाहा इल्लल्लाह ईश्वर के अतिरिक्त कोई उपासना के योग्य नहीं
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