भारत में है भगवान गणेश का एक अनोखा मंदिर जहां चिट्ठी भेजते ही दूर हो जाते हैं सभी दु:ख

लाइव सिटीज डेस्क : दुनिया में कई ऐसे मंदिर हैं जो अपने विचित्र कारनामों की वजह से जाने जाते हैं. ऐसे ही एक विचित्र मंदिर के बारे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं जो भगवान श्री गणेश का है. दुनिया के किसी भी कोने में चले जाओं, लोगों की भगवान में आस्था और विश्वास के अलग-अलग उदाहरण देखने को मिलेंगे. हिंदू धर्म में 33 करोड़ देवी-देवताओं के अस्तित्व स्वीकार किए गए हैं. कोई भी शुभ कार्य करने के लिए भगवान श्री गणेश का नाम प्रथम में लिया जाता है. कहा जाता है कि श्रीगणेश विघ्नहर्ता हैं, वे शुभ कार्य में आने वाली सभी बाधाओं को हर लेते हैं. यहीं वजह है कि हवन, पूजा या अन्य कार्य करने से पहले भगवान गणेश का आह्वान किया जाता है.

भगवान गणेश को केवल एक नहीं, बल्कि अन्य कई नामों से पुकारा जाता है. उनके चमत्कारों से कौन परिचित नहीं है, सभी उनकी महिमा का गुणगान करते हैं. इतना ही नहीं उनके अद्भुत चमत्कारों से आज भी पूरा हिन्दू पौराणिक इतिहास भरा है, लेकिन आज हम श्री गणेश की के एक ऐसे चमत्कार की बात करने जा रहे है जो आज भी साक्षात माना जाता है.

वैसे भगवान गणेश कई मंदिर है, जो देश-विदेश में मौजूद है लेकिन आज हम एक ऐसे मंदिर की बात कर रहे है जो भारत की भूमि पर ही मौजूद है और लोगों में काफी मशहूर भी है. माना जाता है कि लोग कोई भी शुभ कार्य करने से पहले इस मंदिर में भगवान गणेश को चिट्ठी भेज कर निमंत्रण पत्र भेजते है. यह मंदिर सवाई माधौपुर से करीब 10 किलोमीटर दूर रणथंबौर किले के भीतर स्थित है. जहां भगवान गणेश के चरणों में चिठ्ठियों और निमंत्रण पत्रों का ढेर लगा रहता है.

शुभ कार्य से पहले इस मंदिर में चिट्ठी भेजने का उद्देश्य है कि भगवान गणेश उस अवसर पर आने वाली सभी बाधाओं को पहले ही रोक लेते है. बताया जाता है कि इस मंदिर की स्थापना 10वीं सदी में राजा हमीर की थी. राजा हमीर के स्वप्न में स्वयं भगवान गणेश ने दर्शन दिए और उन्हें विजयी होने का आशीर्वाद दिया. युद्ध में विजय होने के बाद राजा ने किले के भीतर ही भगवान गणेश के मंदिर की स्थापना कर दीं.

लोग, यहां दूर-दूर से भगवान गणेश के नाम डाक के जरिए चिट्ठी या निमंत्रण भेजते है, ताकि उनके सभी कार्य संपन्न हो सकें. पत्र मिलते ही मंदिर के औजारी उसे भगवान गणेश को अर्पित कर देते हैं.

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