महादेव की नगरी वाराणसी में है देवी का अनोखा मंदिर,यहां कौड़ी चढ़ाने से लोग बन जाते हैं करोड़पति

लाइव सिटीज डेस्क : भारत देश को धार्मिक देश कहा जाए तो गलत नहीं होगा. जीस प्रकार से यहां कई धर्म के लोग रहते हैं उसी प्रकार उनके लिए यहां मंदिर और मस्जिदें भी हैं. अहर बात करें हिन्दू धर्म की तो यहां हिन्दू पूजा-पाठ में ज्यादा विशवास करते हैं और वो जिन मंदिरों में जाते हैं वो कोई आम नहीं बल्कि बेहद ही खास होता है. इन मंदिरों में चमत्कार के साथ कई रहस्य छीपे रहते हैं.

आज हम आपको एक ऐसे ही मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जो वाराणसी में है. यहां के खोजवा मोहल्ले में दक्षिण भारतीय देवी का एक मंदिर है, जिसे सबरी का स्वरुप माना जाता है. इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यह 10 हजार साल से भी ज्यादा पुराना प्राचीन मंदिर है. भक्त इन्हें बाबा विश्वनाथ की बड़ी बहन भी कहते हैं.

यहां लगी रहती है भक्तों की भीड़

आपको बता दें कि दक्षिण भारत से कौड़िया देवी काशी भ्रमण के दौरान छुदरों की बस्ती में भ्रमण करने गईं, जहां उन्होंने छुदरों का अपमान किया. छुदरों के छू देने से कई दिनों तक उन्होंने खाना त्याग दिया था और साधना पर बैठ गईं थीं. जिसपर मां अन्नपूर्णा ने दर्शन दिया और उनको उसी स्थान पर कौड़ी देवी के रूप में विराजमान कर दिया.

मां अन्नपूर्णा ने उनसे कहा, कौड़ी जिसे कोई नहीं मानता, तुम उसी रूप में पूजी जाओगी और हर युग में तुम्हारी पूजा करने वाला भक्त धनवान होगा. तभी से यहां कौड़ी देवी की पूजा होने लगी.

श्रद्धालु मंदिर में प्रसाद के रूप में 5 कौड़ियां दान कर पूजन करते हैं. इसमें से एक कौड़ी अपने खजाने में ले जाकर रखते हैं. मान्यता है कि इससे धन का भंडार हमेशा भरा रहता है. इसी के चलते यहां दूर-दूर से भक्त आते हैं. मां कौड़िया के काशी आने का विवरण पुराणों में भी मिलते हैं. मां काशी विश्वनाथ की मानस बहन भी कहलाती हैं. बिना इनको कौड़िया चढ़ाए काशी दर्शन पूरा नहीं माना जाता.

कहा जाता है कि द्वापर युग में वनवास के समय भगवान राम को सबरी ने जूठे बेर खिलाए थे. बाद में जब सबरी को अपनी गलती का एहसास हुआ तो उन्होंने भगवान राम से सच बताया और श्रीराम ने उन्हें माफ कर दिया. भगवान ने उन्हें वरदान दिया कि कलयुग में तुम्हारी पूजा होगी और भोग प्रसाद में कौड़ियां चढ़ेगी, तुम शिव की राजधानी काशी में जाकर वास करो. वहीं, छुआ-छूत से मुक्ती और मोक्ष मिलेगा.

आइए जानते हैं वास्तविकता क्या है?

कहा जाता है कि यहां कौड़ी चढ़ाकर कई लोग करोड़पति हो गए. लेकिन सत्य ये रहा – मनुष्य की तरक्की धन-धान्य, यश, ईमानदारी, मेहनत, कर्म पर निर्भर करती है. यहां के बारे में एक मिथ्य यह भी है कि 10 हजार साल पहले दक्षिण भारत से कौड़िया देवी काशी में बाबा विश्वनाथ के दर्शन को आईं थी. लेकिन ऐसा किसी भी ग्रंथ, किताब या पुराण में ऐसा वर्णन नहीं है. लोक मान्यताएं जुड़ी हैं.

एक मिथ्य यह है कि 10 हजार साल पहले छुदरों की बस्ती काशी में थी. लेकिन काशी की लिविंग हिस्ट्री करीब 6000 साल पुरानी मानी जाती है. उससे पहले देवगण का वास था.

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