रावण का सर्वनाश हो ऐसा शूर्पणखा भी चाहती थी, जानिए रामायण से जुड़ी ऐसी ही कुछ रोचक बातें

लाइव सिटीज डेस्क : सनातन धर्म में रामायण का महत्व सर्वविदित है. ये सिर्फ एक पौराणिक कथा नहीं बल्कि जीवन का सार है. मूल कथा के साथ इसमे वर्णित हर प्रसंग बेहद अनमोल है जबकि हममें से अधिकांश लोग उनके बारे में नही जानते हैं. दरअसल श्रीराम का वनवास, सीता का हरण और रावण वध जैसे प्रमुख घटनाएं तो हर कोई जानता है पर कई सारे ऐसे प्रसंग भी हैं जिनसे लोग अनभिज्ञ हैं और आज हम आपको ऐसी ही अनसुनी और रोचक बातों के बारे में बताने जा रहे हैं.

असल में भगवान राम को समर्पित कई ग्रन्थ लिखे गए हैं पर उन सब में वाल्मीकि रचित रामायण सबसे प्रामाणिक मानी जाती है. और रामायण से जुड़ी कुछ ऐसी बातें हैं जिनका वर्णन केवल वाल्मीकि कृत रामायण में है. हम आपको वाल्मीकि रचित रामायण के कुछ बातों के बारे में बताने जा रहे हैं.



सीता का भव्य स्वयंवर आयोजित हुआ था

आज तक हम यही सुनते आ रहे हैं कि सीता का भव्य स्वयंवर आयोजित हुआ था जिसको श्रीराम ने जीता था. पर आपको बता दें कि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण में सीता स्वयंवर का कोई वर्णन नहीं है. जी हां, वाल्मीकि कृत रामायण के अनुसार अपने गुरू ऋषि विश्वामित्र के साथ भगवान राम व लक्ष्मण मिथिला पहुंचे थे और वहां विश्वामित्र ने ही राजा जनक से श्रीराम को वह शिवधनुष दिखाने के लिए कहा और तब श्रीराम ने जैसे ही धनुष को देखने के लिए उठाया और प्रत्यंचा चढ़ाया तो वह टूट गया. चूंकि राजा जनक ने यह प्रण किया था कि जो भी उस शिव धनुष को उठा कर उस पर प्रत्यंचा चढ़ा देगा उससे ही वे अपनी पुत्री सीता का विवाह करेंगे. ऐसे में जनक ने सीता का विवाह श्रीराम के साथ कर दिया.

रावण स्वर्ग लोक पहुंचा तो वहां उसे अप्सरा रंभा दिखाई पड़ी

रावण को मिले उस श्राप के विषय में तो आपने सुना होगा जिसकी वजह से उसे किसी पराई स्त्री को उसकी इच्छा के बिना स्पर्श करने पर सर्वनाश होने की चेतावनी मिली थी. उस प्रसंग के बारे में तरह-तरह की मान्यताएं प्रचलित है लेकिन वाल्मीकि के रामायण में उसके बारे में ये लिखा गया है कि जब विश्व विजय करने की मंशा लिए रावण स्वर्ग लोक पहुंचा तो वहां उसे अप्सरा रंभा दिखाई पड़ी और उसकी नियत खराब हो गई. उसने अपनी वासना पूरी करने के लिए रम्भा को पकड़ लिया. तब रम्भा ने बताया कि आप मेरे साथ ऐसा अनाचार ना करें क्योंकि इस समय मैं आपके बड़े भाई कुबेर के बेटे नलकुबेर की सेवा में हूं और इस तरह मैं आपके लिए पुत्रवधू के समान हूं, लेकिन रम्भा के ये कहने पर भी रावण नहीं माना और रंभा से दुराचार किया. ऐसे में जब ये बात नलकुबेर को पता चली तो उसने उसी क्षण रावण को श्राप दे दिया कि आगे से अगर रावण ने किसी पराई स्त्री को बिना उसकी इच्छा के उसे स्पर्श किया तो उसका मस्तक सौ टुकड़ों में खंडित हो जाएगा.

क्रोधित होकर शूर्पणखा ने उसी समय मन ही मन रावण को श्राप दे दिया 

शूर्पणखा के बारे में तो आप जानते ही हैं जिसके लिए रावण ने श्रीराम से बैर पाल लिया था पर क्या आपको पता है कि शूर्पणखा स्वयं भी रावण का विनाश ही चाहती थी. दरअसल रावण की बहन शूर्पणखा का पति था विद्युतजिव्ह, जो कि कालकेय नाम के राजा का सेनापति था और रावण जब विश्व विजय के लिए निकला तो उसका युद्ध कालकेय से भी हुआ था. उसी युद्ध में रावण ने शूर्पणखा के पति विद्युतजिव्ह का वध कर दिया. इससे क्रोधित होकर शूर्पणखा ने उसी समय मन ही मन रावण को श्राप दे दिया कि मेरे ही कारण तेरा सर्वनाश होगा.

कैकयी को दिए वचन के कारण राजा दशरथ को श्रीराम को ना चाह कर भी वनवास जाने का आदेश देना पड़ा था. पर वो किसी भी स्थिति में राम को खुद से दूर और वनवास नही जाने देना चाहते थे पर चूंकि वो वचनबद्ध थे. इसलिए जब राम को रोकने का कोई उपाय नहीं सूझा तो उन्होंने श्रीराम से आग्रह किया कि तुम मुझे बंदी बनाकर स्वयं राजा बन जाओ.

रावण ने कैसे तीनो लोक पर विजय पाने के लिए देवताओं से युद्ध किया था

ये तो आप जानते ही हैं रावण ने कैसे तीनो लोक पर विजय पाने के लिए देवताओं से युद्ध किया था लेकिन क्या आपको ये पता है कि उसने यमराज से भी युद्ध किया था. जी हां, वाल्मीकि रचित रामायण के अनुसार रावण जब विश्व विजय पर निकला तो वह यमलोक भी जा पहुंचा और वहां उसने यमराज को युद्ध की चुनौती दी और तब यमराज और रावण के बीच भयंकर युद्ध हुआ. जिसमें यमराज ने रावण के प्राण लेने के लिए कालदण्ड का प्रयोग करना चाहा था पर ब्रह्मा जी ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया था क्योंकि रावण का वध किसी देवता के हाथों संभव नहीं था.

जब रावण ने सीता का हरण कर उन्हें अपनी अशोक वाटिका में बंदी बला डाला 

इस प्रसंग के बारे में शायद ही आप जानते होंगे कि जब रावण ने सीता का हरण कर उन्हें अपनी अशोक वाटिका में बंदी बला डाला तो उसी रात को ब्रह्मा जी के कहने पर देवराज इंद्र ने माता सीता को सम्बल देने के लिए खीर खिलाई थी. वाल्मीकि रचित रामायण के अनुसार देवराज ने पहले अशोक वाटिका में मौजूद सभी राक्षसों को मोहित कर सुला दिया और उसके बाद माता सीता को खीर अर्पित की, जिसके खाने से सीता मां की शांतचित हो गई.