यहां भगवान शिव पर लोग चढ़ाते हैं झाड़ू, इस अजीबोगरीब मान्यता के बारे में जानकर हो जाएंगे दंग

लाइव सिटिज डेस्क : हमारे भारतवर्ष में मंदिरों और भगवानों के प्रति बहुत ही श्रद्धा है. भारतवर्ष में हर कोई व्यक्ति मंदिर और भगवानों के चमत्कारों पर विश्वास करता है. आपको बता दें कि लोग शिव जी को प्रसन्न करने के लिए धतूरा और बेलपत्र चढ़ाते हैं, जल अर्पित करते हैं जिससे भगवान शिव जी प्रसन्न हो सकें और उनकी कृपा प्राप्त हो पाए. परंतु आज हम आपको इस लेख के माध्यम से एक ऐसे मंदिर के विषय में जानकारी देने वाले हैं जहां पर लोग शिव जी को इन चीजों के स्थान पर झाड़ू अर्पित करते हैं. जी हां आप बिल्कुल सही सुन रहे हैं. आपको यह सुनकर हैरानी अवश्य हुई होगी परंतु यह बात सत्य है कि शिव जी को धतूरे या बेलपत्र के स्थान पर झाड़ू चढ़ाया जाता है.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह मंदिर उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में स्थित बीहाजोई गांव में है जहां के लोग कुछ ऐसा ही करते हैं. बीहाजोई में शिव जी का एक बहुत ही प्राचीन मंदिर है जिसका नाम शिव पातालेश्वर है. यहां पर आने वाले लोग त्वचा से संबंधित रोगों से छुटकारा प्राप्त करने के लिए प्रार्थना करते हैं. अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए यहां पर श्रद्धालु झाड़ू चढ़ाते हैं. मंदिर के पुजारी का इस विषय में कहना है कि यह मंदिर करीब 150 साल पुराना है.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि शिव जी के इस मंदिर में झाड़ू चढ़ाने की यह परंपरा का पालन सदियों से किया जा रहा है. अपनी बात को आगे जारी रखते हुए वहां के पुजारी ने आगे यह बताया है कि यहां रोज शिवलिंग पर झाड़ू चढ़ाने के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी रहती है. सोमवार के दिन यहां हजारों की संख्या में लोग झाड़ू चढ़ाने के लिए आते हैं. यहां के लोगों का ऐसा मानना है कि ऐसा करने से त्वचा की सारी परेशानियों से छुटकारा प्राप्त हो जाता है इस मंदिर में ऐसा करने के पीछे भी एक बहुत ही दिलचस्प और रोचक
कहानी है.

ऐसा बताया जाता है कि इस गांव में भिखारीदास नाम का एक बहुत ही धनी व्यापारी रहता था. भिखारीदास की त्वचा पर काले रंग के धब्बे थे और इसकी वजह से उसको काफी दर्द का भी सामना करना पड़ता था. इस रोग से छुटकारा प्राप्त करने के लिए वह उपचार के लिए एक दिन एक वैद्य के पास गया तब उसको रास्ते में एक आश्रम दिखाई दिया था. भिखारीदास को काफी प्यास लगी थी इसलिए वह पानी की तलाश में आश्रम की ओर बढ़ गया जैसे ही वह अंदर गया वैसे ही आश्रम की सफाई कर रहे एक साधु के झाड़ू से उसका शरीर स्पर्श हो गया था. झाड़ू के छूने मात्र से ही भिखारी दास के दर्द का समाधान हो गया था.

जब भिखारीदास ने उस साधु से इसका कारण पूछा तो उन्होंने कहा कि यह भगवान शिव का चमत्कार है और वह उनके बहुत बड़े भक्त हैं. भिखारीदास ने खुश होकर सोने की अशर्फियों से भरी हुई थैली का भेंट करना चाहा परंतु साधु ने उसे लेने से मना कर दिया था. उन्होंने कहा यदि तुम सही में कुछ देना चाहते हो तो आश्रम के स्थान पर शिव मंदिर का निर्माण करवा दो. भिखारी दास ने वैसा ही किया जो कि आज भी चलता आ रहा है. यहां केवल मुरादाबाद से ही नहीं बल्कि आसपास के जिलों से भी काफी संख्या में भक्त आते हैं और त्वचा से संबंधित परेशानियों से छुटकारा प्राप्त करने के लिए प्रार्थना करते

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